जी हां, डिलीवरी के कुछ महीने बाद तक ऐसा होना बिल्कुल सामान्य है। हंसते, खांसते, छींकते समय या कोई भारी काम करते समय मूत्राशय पर दबाव पड़ता है और मूत्र रिसने लगता है। प्रसव व डिलीवरी के दौरान मूत्राशय व पेल्विक के आसपास की मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं और आप मूत्र का बहाव नहीं रोक पातीं। गर्भाशय सिकुड़ता है तो मूत्राशय पर इसका भी दबाव पड़ता है। हार्मोनल बदलाव भी इसके जिम्मेवार होते हैं।
इस प्रक्रिया को समाप्त होने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। तब तक आप पैड लगाएँ। हां, टेंपून लगाने से कोई फायदा नहीं होगा।
इसके अलावा निम्नलिखित उपाय भी आजमा सकती हैं।
कीगल व्यायाम :– कीगल व पेल्विक एरिया से जुड़े व्यायाम जारी रखें। ये आपके काफी सहायक हो सकते हैं।
वजन घटाएँ :– गर्भावस्था के समय बढ़ा हुआ वजन घटाना होगा क्योंकि उसी फालतू वजन के कारण अब भी मूत्राशय पर दबाव पड़ रहा है।
मूत्राशय को प्रशिक्षित करें :- हर आधे घंटे बाद, इच्छा न होने पर भी मूत्र के लिए जाएँ।इसी तरह धीरे-धीरे बीच का समय अंतराल बढ़ाएं।
कब्ज से बचें :– कब्ज की वजह से भी मूत्राशय पर दबाव बढ़ता है। नियमित समय पर शौच करें।
तरल पदार्थ लें :– दिन में कम से कम आठ गिलास पानी पीएँ। यह न सोचें कि कम पानी पीएंगी तो मूत्र का रिसाव कम होगा बल्कि डी-हाईड्रेशन से मूत्र का संक्रमण हो सकता है। संक्रमित मूत्राशय से ज्यादा रिसाव होगा और रिसते मूत्राशय में आसानी से संक्रमण होगा।
डॉक्टर की मदद लें
आपने अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर ली लेकिन अब भी मूत्र का रिसाव बंद नहीं हो पा रहा। कोई बात नहीं, अपने डॉक्टर से बात करें। वह कोई इलाज बताएँगे ताकि जरूरत पड़ी तो सर्जरी भी करेंगे। बस, आप हिम्मत न हारें।
