खुशी की बात है कि एक-दूसरे से प्यार करने वाले माता-पिता के यहां एक प्यारा-सा स्वस्थ शिशु जन्म लेगा, बस आपको इतना ध्यान रखना है कि आपकी गर्भावस्था पूरी तरह आरामदायक और सेहतमंद हो। हालांकि यह सब करना मुश्किल नहीं है।

गर्भावस्था, आहार योजना, आपको व शिशु को समर्पित होती है, इससे शिशु को क्या लाभ होगा? बहुत से फायदों में से एक है कि जन्म के समय उसका वजन अच्छा होगा। दिमाग अच्छी तरह विकसित होगा, जन्म के समय होने वाले नुक्स या रोग नहीं रहेंगे। आप मानें या न मानें, अगर आप अभी से रात के खाने में हरी गोभी… व दूसरी हरी सब्जियां शामिल कर लेंगी तो आपका प्रीस्कूलर बच्चा खाने-पीने की स्वस्थ आदतें अपनाएगा और एक सेहतमंद इंसान बनेगा।

इससे सिर्फ आपके शरीर को ही फायदा नहीं होगा। आपका गर्भावस्था आहार इस बात की पुष्टि करता है कि प्रसव सुरक्षित होगा। अच्छे खान-पान वाली महिलाओं में एनीमिया, गैस्टेशनल डायबिटीज व प्रीक्लैंपसिया जैसी परेशानियां पैदा नहीं होतीं, सोच-समझ कर चुने गए खाद्य पोषण आपके मूड को भी संतुलित बनाए रखते हैं। ऐसी महिलाओं का प्रसव समय से पहले या बाद में न होकर, समय से ही होता है। प्रसव के बाद शरीर को सही आकार में आने में भी देर नहीं लगती।

अगर आप इन सब फायदों का मतलब समझ गई हैं, तो आपको अपने भोजन को पौष्टिक बनाने के लिए कमर कसनी होगी क्योंकि गर्भावस्था आहार और औसतन पौष्टिक भोजन में खास अंतर नहीं होता। बस गर्भावस्था आहार के लिए थोड़े से बदलाव लाने पड़ते हैं, क्योंकि शिशु के लिए अधिक मात्रा में कैलोरी व पोषण की आवश्यकता होती है। बुनियाद तो वही रहेगी, प्रोटीन व कैल्शियम, साबुत अनाज, फल व सब्जियां और सेहतमंद वसा का पौष्टिक संतुलन सब कुछ सुना हुआ लगता है न ? हमारे पोषण विज्ञानी सालों से आपको यही खाने की राय तो देते आ रहे हैं।

एक और अच्छी खबर है। अगर आप अब तक काफी कम मात्रा में आदर्श भोजन लेती आई हैं तो उन्हें गर्भावस्था आहार में बदलना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा क्योंकि बदलाव के बारे में सोचने से ही शुरूआत हो जाएगी। आप अब भी मजे से अपने केेक ओर चिप्स खा सकती है। बस उनमें थोड़े से फेर बदल लाने पड़ेंगे। आप कई स्वादिष्ट व्यंजनों के माध्यम से विटामिन और खनिज लवण की मात्रा ले सकती हैं यानी सेहत के साथ-साथ स्वाद पर भी पूरी नजर!

बेहतरी के लिए आहार में बदलाव लाने से पहले एक बात का खासतौर पर ध्यान रखें। इस लेख में गर्भावस्था के समय लिए जानें वाले आदर्श आहार के बारे में बताया गया है, लेकिन अगर आपको इस पौष्टिक भोजन से कुछ अरूचि होने लगे तो अपनी इच्छानुसार इसमें थोड़ा सा सोच-विचार कर खान-पान की आदतें अपनाएं। आपके बर्गर या फ्रेंचफ्राई खाने में कोई हर्ज नहीं लेकिन थोड़ा सलाद साथ हो तो क्या कहने।

नौ माह के सेहतमंद भोजन के नौ बुनियादी नियम
कौर गिनें-आपको पूरे नौ महीने तक अपने शिशु के लिए ढेर-सा पौष्टिक आहार लेना है। उस अजन्मे शिशु को एक सेहतमंद शुरूआत देनी है। जब भी अपना भोजन चबाएं तो अपने शिशु के बारे में सोचें। याद रखें कि हर एक कौर नन्हें शिशु को पोषण पहुंचाने का सुनहरा अवसर होगा।

सभी कैलोरी बराबर नहीं होती- कैलोरी चुनते समय सावधान रहें, उसकी मात्रा की बजाए गुणवत्ता पर ध्यान दें। 10 आलू चिप्स की 100 कैलोरी, छिलके सहित सिंक आलू की 100 कैलोरी के बराबर नहीं होगी। आपकी व बेबी को 2,000 खाली कैलोरी की बजाए 2,000 पोषक कैलोरी से कहीं ज्यादा फायदा होगा। प्रसव के बाद आपके शरीर पर इनका असर दिखाई देगा।

आप भूखी रहेंगी तो बच्चा भी भूखा रहेगा-क्या आप नन्हें शिशु को भूखा रखना चाहेंगी तो उसे जन्म से पहले भूखा क्यों रखें? उसे प्रतिदिन नियमित रूप से पोषण मिलना जरूरी है आप ही तो ‘यूटेराइन कैफे’ में भोजन देती हैं। चाहे आपको भूख न भी लगी हो, बच्चा तो भूखा है इसलिए खाना न छोड़ें। सही समय पर संतुलित भोजन लें। अध्ययनों से पता चला है कि संतुलित भोजन लें। अध्ययनों से पता चला है कि दिन में पांच बार खाने वाली (तीन भोजन दो स्नैक्स या छः बार थोड़ा भोजन) माताएं काफी स्वस्थ रहती हैं। हालांकि यह सिर्फ कहना आसान है, खासतौर पर जब खाने के नाम से ही आपको उबकाई आती हो। इसी किताब में आपको ऐसे सुझाव मिल जाएंगे जो आपके काम आ सकते हैं।

थोड़ी सी कार्यकुशलता- कहीं आप यह सोचकर तो नहीं डर रहीं कि इस तरह अंधाधुध खाने से आप कैसी दिखेंगी। इस बारे में ज्यादा चिंता न करें। आपको थोड़ा कुशल होना होगा। जैसे फुल फैट वसा वाले डेयरी उत्पादों की बजाए लो फैट डेयरी उत्पाद, तले हुए की बजाए सिका या उबला भोजन, मक्खन की मात्रा कम लें या भूनते समय जैतून के तेल की कम मात्रा लें। अगर आपका वजन कम बढ़ रहा हो तो इस तरह के खाद्य पदार्थ चुनें, जो आपका वजन बढ़ा सकें। अगर आपका वजन ज्यादा हो तो ऐसे खाद्य पदार्थ चुनें, जिससे आपका वजन तो ज्यादा न बढ़े लेकिन शिशु को पूरा पोषण मिल सके।

कार्बोहाईड्रेट का मामला- कई गर्भवती महिलाएं वजन बढ़ने के डर से अपने भोजन में से कार्बोहाईड्रेट  की मात्रा घटा देती हैं जैसे कि ‘आलू’ इसमें कोई शक नहीं कि रिफाइंड कार्बोहाईड्रेट जबकि साबुत अनाज की डबलरोटी ब्राउन चावल, ताजे फल व सब्जियां, सूखी बींस व नाश्पाती व छिलके सहित आलू विटामिन बी की पूर्ति करते हैं। आवश्यक रेशा व प्रोटीन की मात्रा देते हैं । ये न सिर्फ शिशु बल्कि आपके लिए भी फायदेमंद हैं। इससे जी नहीं मिचलाएगा और न ही कब्ज होगा। इससे पेट भरा महसूस होगा तो आपका वजन भी ज्यादा नहीं बढ़ेगा।

एक और अध्ययन से पता चला है कि कांप्लैक्स कार्बोहाईड्रेट की अधिक मात्रा लेने से रेशा अधिक मात्रा में मिलता है और ‘गैस्टेशनल डायबिटीज’ होने का खतरा घट जाता है। रेशे की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं। एकदम जल्दी से रेशे की मात्रा बढ़ाएंगी तो पेट में गैस बन सकती है।

कुछ मीठा हो जाए- मीठा खाना किसे पसंद नहीं होता लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि मीठे की अधिक मात्रा आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है। इससे मोटापे के अलावा दांतों व मसूड़ों के रोग, मधुमेह, हृदय रोग व कोलोन कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। अक्सर कुछ मीठे पदार्थों में पोषक तत्वों की मात्रा काफी कम होती है। ऐसे में कैंडी और सोडा सबसे पहले दिमाग में आते हैं।
रिफाइंड चीनी बाजार में कई रूपों में मिलती है, जिसमें आप काॅर्न सीड डीहाईड्रेट कैन जूस को शामिल कर सकती हैं।

शहद एक ऐसी शुगर है, जो रिफाइंड नहीं होती। इसमें रोगों से लड़ने वाले एंटीआॅक्सीडेंट पाए जाते हैं। आप इसकी मदद से कई तरह के पौष्टिक व्यंजन तैयार कर सकती हैं। हालांकि आपको उन सभी खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल पर रोक लगानी होगी जिनमें शुगर (चीनी) की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इस तरह आप कुछ ऐसे पौष्टिक व्यंजन चुन पाएंगी, जिनमें थोड़ा बहुत मीठा भी होता है।

स्वादिष्ट व पौष्टिक मीठा पाना चाहती हैं तो चीनी की बजाय फल, मेवे और फलों का रस लें। इनसे आपको मिठास के अलावा विटामिन, खनिज लवण व फाइटोकैमिकल भी मिलेंगे। आप कैलोरी फ्री शुगर विकल्प भी ले सकती हैं, जो गर्भावस्था में बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचाते।

पौष्टिक भोजन के स्त्रोत- प्रकृति का पोषण से गहरा नाता है। अक्सर कई प्राकृतिक खाद्य पदार्थ अपने मूल रूप में पोषण से भरपूर होते हैं । ताजे मौसमी फल खाएं। डिब्बाबंद फल न ही लें तो बेहतर होगा, यदि वे लेने भी पड़े तो ऐसे पैक चुनें, जिनमें नमक चीनी व बसा की मात्रा कम से कम हो। हर रोज कच्चे फल व सब्जियां जरूर खाएं। जब फल या सब्जियां पकाने पड़ें तो उन्हें हल्की भाप में ही पकाएं ताकि विटामिन व खनिज लवण नष्ट न हों।

प्रोसेस्ड फूड में कई तरह के रसायन वसा व चीनी आदि मिलाए जाते हैं जिससे उनका पोषक मूल्य काफी घट जाता है। स्मोक्ड टर्की की बजाय ताजी भुनी टर्की लें। साबुत अनाज से बनी मैकरोनी के साथ चीज लें। चीज़ भी ताजा हो तो बेहतर होगा, आप ताजा और ओटमील भी ले सकती है।

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