‘‘मैं हमेशा पेट के बल सोती आई हूँ। अब मुझे डर लगता है। मुझे किसी दूसरे तरीके से सोना आरामदायक नहीं लगता।”
बदकिस्मती से गर्भावस्था में पेट व पीठ के बल (आरामदायक मुद्राएँ) सोना सही नहीं होता। पेट के बल सोने का मतलब होगा कि आप किसी तरबूज पर सो रही हैं। पीठ वाली मुद्रा आरामदायक तो है लेकिन आपके गर्भाशय का सारा भार; पीठ, आंतों व प्रमुख रक्तनलिकाओं पर पड़ेगा। इस दबाव से पीठ का दर्द बढ़ जाएगा। पाचन में कठिनाई होगी रक्तप्रवाह में बाधा आएगी! आप हाइपोटैंशन या लो ब्लड प्रेशर की शिकार हो सकती हैं, जिससे आप हमेशा उनींदा महसूस करेंगी।

इसका मतलब यह नहीं कि आपको खड़े होकर सोना पड़ेगा। अपनी बाईं ओर करवट लें व दोनों टांगों के बीच एक तकिया रखें। यह शिशु के लिए भी ठीक रहेगा। इससे प्लेसेंटा के रक्त प्रवाह में बाधा नहीं आएगी। किडनी सही तरीके से काम करेगी यानी व्यर्थ पदार्थ शरीर से बाहर निकलते रहेंगे। हाथों, पाँवों व टखनों में कम से कम सूजन होगी।

बहुत कम लोग, सारी रात एक ही करवट में सो पाते हैं। यदि आंख खुलने पर आप स्वयं को पीठ या पेट के बल पाएँ तो चिंता न करें। इससे कोई नुकसान नहीं होगा, बस अपनी करवट बदल लें। हो सकता है कुछ रातों तक थोड़ा अजीब लगे पर जल्दी ही आपको इसकी आदत हो जाएगी। यदि 5 फीट लंबा या बैज के आकार के तकिया लगा लेंगी तो आपको इस तरह सोzने में आसानी रहेगी। यदि आपके पास ऐसे तकिए न हों तो फालतू तकिए लेकर शरीर को इतनी आरामदायक मुद्रा में लाएं कि आपको गहरी नींद आ सके।
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