Corona Variant JN.1: कोविड-19 हमारे साथ रहेगा, समय-समय पर इसके नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से दुनिया भर में कोविड दोबारा दहशत फैला रहा है। इन दिनों जो कोरोना का जेएन.1 वैरिएंट फेल रहा है, ये ओमिक्रोन स्ट्रेन के म्यूटेशन के परिणामस्वरूप बना सब-वैरिएंट है। जेएन.1 वैरिएंट अब भारत, सिंगापुर, चीन, ब्रिटेन, अमेरिका, मलेशिया जैसे देशों में पैर पसार रहा है। भारत में केरल से शुरू हुआ यह वैरिएंट गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान, दिल्ली में इसके मरीज देखने को मिल रहे हैं। फिलहाल 4 हजार से ज्यादा एक्टिव मामले हैं जिनमें सबसे ज्यादा मामले केरल में हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जेएन.1 वैरिएंट के तेजी से बढ़ते प्रसार को देखते हुए इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरस्ट’ घोषित किया है। एक स्टडी के मुताबिक अपनी संक्रामक प्रवृत्ति के कारण यह दूसरे वैरिएंट से ज्यादा शक्तिशाली है। यानी इससे संक्रमण की संभावना दूसरे ओमिक्रोन वैरिएंट की तुलना में 1.2 गुना ज्यादा है। लेकिन जेएन.1 वैरिएंट एक माइल्ड कैटेगरी का वैरिएंट है, ऐसे में संक्रमित व्यक्ति को जान का जोखिम कम है। संक्रमित व्यक्ति को अपर एयरवेज़ में तकलीफ ज्यादा हो रही है यानी जुकाम, नज़ला, गले में दर्द है। वायरल निमोनिया, ऑक्सीजन सेचुरेशन या शरीर में ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याएं नहीं आ रही है। मरीज ज्यादा जटिलता का सामना किए बिना ठीक हो रहे हैं।
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क्या है लक्षण

एक्सपर्ट का मानना है कि कोविड-19 के अलग-अलग वैरिएंट के कारण लक्षणों में हल्के बदलाव दिख सकते हैं क्योंकि लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। व्यक्ति की इम्यूनिटी और ओवरऑल हेल्थ के आधार पर लक्षण अलग-अलग भी हो सकते हैं। वर्तमान सर्दी के मौसम में होने वाले इंफ्लूएंजा फ्लू के समान लक्षण देखने को मिल रहे हैं। जैसे- बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश और दर्द, बहती नाक या नाक बंद होना, सांस लेने में परेशानी, तेज सिर दर्द, बदन दर्द, कमजोरी या थकान, मांसपेशियों में दर्द, नींद न आना, उल्टियां, पेट खराब होना, दस्त लगना या डायरिया होना, स्वाद-गंध में कमी होना। इनके साथ ही एंग्जाइटी, डिप्रेशन जैसे मानसिक समस्याएं भी व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती हैं।
किन्हें है रिस्क
वैरिएंट से संक्रमित होने में ये लोग हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं। उन्हें यथासंभव सावधानी बरतनी जरूरी है-
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग, छोटे बच्चे और 60 साल से बड़े बुजुर्ग।
- दूसरी बीमारियों से ग्रस्त लोग या डायबिटीज, किडनी, हाइपरटेंशन, हार्ट, अस्थमा जैसी रेस्पेरेटरी, कैंसर जैसी क्रोनिक बीमारी के कारण इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज स्थिति के लोग।
- वे लोग जिन्होंने कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाई है।
- गर्भवती महिलाएं
कब जाएं डॉक्टर के पास

वर्तमान स्थिति में सर्दी-खांसी बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह से दवाई लें। कोविड के ये लक्षण दिखाई देने पर व्यक्ति को सबसे पहले खुद को होम आइसोलेट कर लेना चाहिए। अगर 2-3 दिन में घर पर उपचार से आराम न आए तो डॉक्टर को जल्द संपर्क करना चाहिए। आरटीपीसीआर टेस्ट कराएं। जीनोम सिक्वेंसिंग से ज्यादातर मरीज नए वैरिएंट से पीड़ित होने की पुष्टि की जाती है।
सिम्टोमैटिक उपचार है कारगर
माइल्ड लक्षण होेने की वजह से मरीज की स्थिति के आधार पर एसिम्टोमैटिक उपचार किया जाता है। जैसे-बुखार के लिए दिन में क्रोसिन या पैरासिटामोल ले सकते हैं। सर्दी-जुकाम ज्यादा होने पर म्यूकस की वजह से नाक-गला बंद होने पर स्टीम लेने की सलाह दी जाती है। ज्यादातर लोग घर में रहकर ठीक हो रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा आराम करें। पानी या लिक्विड डाइट का सेवन ज्यादा करें। गर्म पानी, चाय, काफी, कहवा, सूप, हल्दी वाला दूध जैसे गर्म पेय पीना फायदेमंद है। विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें। बिना डॉक्टरी सलाह के किसी तरह की दवाई न लें। रोजाना विटामिन सी की 500 मिग्रा की 1.2 टेबलेट भी ले सकते हैं।
बचाव है संभव

कोरोना का यह वैरिएंट संक्रामक भले ही न हो, संक्रामकता बहुत अधिक है। एलर्ट रहना जरूरी है। डब्ल्यूएचओ के हिसाब से हालांकि मौजूदा कोरोना वैक्सीन जेएन.1 पर कारगर जरूर है। लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लोगों को सेल्फ-केयर और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर अपनाने की बहुत जरूरत है।
- मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग या समुचित दूरी बनाकर रखें, हाथों को बार-बार धोते रहें या सेनिटाइज करें।
- बच्चों को मास्क जरूर पहनाएं।
- अगर किसी को खांसी जुकाम है तो खांसते समय टिशू पेपर का इस्तेमाल करें या कोहनी मोड़कर आर्म में खांसे। ताकि वायरस हवा में ज्यादा न फैले और दूसरे को संक्रमण का खतरा कम हो। इस्तेमाल किए टिशू को पॉलीबैग या पेपर बैग में अच्छी तरह कवर करके फेंके।
- भीड़भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें। जाना जरूरी हो तो एन-95 मास्क पहनकर जाएं।
- पार्टी में जाना अवायड करें। पार्टी में एक भी व्यक्ति अगर कोरोना संक्रमित है, उससे संक्रमण फैल सकता है। जाना जरूरी हो तो कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर फोलो करें।
- कोरोना वैक्सीन की प्रिकॉशनरी डोज जरूर लें। लेकिन वैक्सीन लगवा चुके लोगों को अन्य डोज़ लेने की जरूरत नहीं है।
- घर में बना पौष्टिक और संतुलित आहार का सेवन करें। विटामिन सी, विटामिन-मिनरल, हाई प्रोटीन डाइट और एंटी ऑक्सीडेंट रिच इम्यूनिटी बूस्टर आहार का सेवन ज्यादा करें। जरूरी हो तो अच्छे रेस्तरां या विश्वसनीय जगह पर ही खाना खाएं। जंक फूड, फास्ट फूड, पैक्ड फूड से परहेज करें।
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। अच्छी दिनचर्या का पालन करें, समय पर सोएं, समय पर जागें। रात को कम से कम 6-7 घंटे की नींद जरूर लें। दिन में कम से कम 30 मिनट अपनी क्षमता और पसंद के अनुसार व्यायाम करें।
- वर्तमान मौसम में सर्दी से बचाव करें। सर्दी में गिरते तापमान की वजह से ऑक्सीजन की कमी का ध्यान रखें। इंडोर हों, तो वेंटिलेशन का ध्यान रखें।
- किसी भी तरह की समस्या हो, डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
(डॉ मोहसिन वली, सीनियर फिजीशियन, नई दिल्ली)
