Kids Mattress Effects: आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में पैरेंटिंग काफी मुश्किल होती जा रही है। माता-पिता होना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। पैरेंट्स अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए दिन-रात लगे रहते हैं, जिससे उनके बच्चे खुश रहें और उन्हें कोई भी बीमारी तक छू ना पाए। हम उन्हें अच्छे से अच्छा खाना, हाइजीन और अच्छा एनवायरमेंट देने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर चीज का ध्यान देने के बाद भी अगर बच्चा जिस बिस्तर पर सो रहा है वही उसके सेहत के लिए खतरनाक सकता है?
क्या कहती है कनाडाई शोधकर्ताओं की स्टडी
हाल ही में कनाडाई शोधकर्ताओं की एक स्टडी से यह बात खुलकर सामने आई है कि बच्चे जिस बिस्तर पर चैन से सोते हैं। उन पर ऐसे कई छुपे हुए खतरे हैं, जो उनके सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। बच्चों के बिस्तर में छुपे खतरे दिखाई नहीं देते लेकिन इनका असर काफी गहरा हो सकता है। इस आर्टिकल में हम यह जानेंगे कि बच्चों के बेड में ऐसे कौन-कौन से खतरे छुपे हो सकते हैं, जिन्हें पता करके हमें अपने बच्चों को उनसे बचाना चाहिए, जिससे पैरेंट्स तुरंत इस पर काम करेंगे।
धूल, फंगस और बैक्टीरिया
कई बार हम गद्दे को धूप में सुखाना भूल जाते हैं। अगर गद्दे काफी लंबे समय से धूप में नहीं सुखाए गए हैं या बहुत गंदे हैं तो उसमें धूल, फंगस और बैक्टीरिया हो सकते हैं। घर के बिस्तर के गद्दे में कुछ ऐसे कीड़े पनपते हैं, जिससे बच्चों को अस्थमा, एलर्जी या किसी तरीके की स्किन प्रॉब्लम हो सकती है। समय-समय पर गद्दों को धूप में डालकर अच्छे से सुखाए। चार-पांच साल से पुराने गद्दे को घर से हटा दें। किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया से बचने के लिए अपने घर के गद्दों पर डस्ट प्रूफ और वॉटरप्रूफ कवर लगाएं।
बेड शीट्स में छिपे केमिकल्स
बेड शीट्स और सॉफ्ट टॉयज में इस्तेमाल किए गए प्रिंट्स और फैब्रिक इनडोर पॉल्यूशन का कारण बनते हैं। बच्चों के बेड पर कार्टून वाली बेडशीट्स बिछी होती हैं, जिसमें इस्तेमाल किए गए फैब्रिक और रंग बच्चों के हेल्थ के लिए हार्मफुल हो सकते है क्योंकि इनमें हार्मफुल केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। इसलिए कोशिश करना चाहिए कि हमेशा हल्के रंग और कॉटन की बेडशीट चुनें। बच्चा जिन खिलौने को लेकर अपने साथ सोता है, उन्हें हफ्ते में एक बार जरूर धोएं।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को रखें दूर
बच्चों के बेड के पास रखा हुआ मोबाइल, टैबलेट या चार्जर उनके नींद में बाधा डालते हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट में से हार्मफुल रेडिएशन निकलते हैं, जो बच्चों के मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। बच्चों के सोने से कम से कम 1 घंटे पहले सारे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को बेड से हटा दें। कमरे का माहौल एकदम शांत और स्वस्थ रखें, जिससे बच्चा गहरी नींद ले पाए बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी होती है।
बिस्तर की सफाई को ना करें नजरअंदाज
अक्सर हम बच्चों की बेडशीट को बदलकर सोचते हैं कि बेड की सफाई हो चुकी है, लेकिन उससे कहीं अधिक खतरा बेड के आसपास की छिपी हुई जगह में पनपता है। ऐसी जगह जो हम देख नहीं पाते, जैसे- बेड के कोनों में या बेड के अंदर जमी हुई धूल बच्चों के लिए असली खतरा बनते हैं। हफ्ते में एक बार बेड के नीचे और चारों तरफ सफाई जरूर करें। घर के हर कोनों की सफाई जरूरी है। बच्चों को बेड पर खाने पीने से रोकें।
