An increased heart rate is not normal
An increased heart rate is not normal

Increased Heartbeat: आपने अक्सर देखा होगा कि घबराहट के समय दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाती है, तेज चलते समय या दौड़ते वक्त भी धड़कन बढ़ जाती है। मगर कुछ स्थितियों में दिल की धड़कन अचानक तेज हो जाती है, ऐसा क्यों होता है। आइए जानते हैं विस्तार से।

हार्ट बीट या दिल की धड़कन का बढ़ना, पसीना आना और बेचैनी जैसे लक्षण महसूस होना अनियमित या असामान्य हृदय गति, इस स्थिति को अरिदमिया के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति में हार्ट रिदम स्थिर नहीं रहती, दिल तेजी से धड़कता है और घबराहट महसूस हो सकती है। सामान्य तौर पर एक व्यक्ति की हार्टबीट 60 से 100 धड़कन प्रति मिनट तक रहनी चाहिए लेकिन जब ये 120 या इससे अधिक हो जाए तो थोड़ी सावधानी बरतनी आवश्यक हो जाती है। दिल की धड़कन का बढ़ना सामान्य नहीं होता, ये किसी कार्डिओकुलर

समस्यांओ का संकेत भी हो सकता है। इसे नियंत्रित और सामान् य करने में कई घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं लेकिन इसके पहले हृदय गति तेज होने के कारण और लक्षणों के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

हार्ट बीट तब तेज हो जाती है जब हृदय की पंपिंग गतिविधि में कोई रुकावट आने लगती है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। हालांकि, ज़्यादातर मामलों में ये कोई गंभीर समस् या नहीं होती लेकिन इसे नजरअंदाज करने की भूल भी न करें। चलिए जानते हैं दिल की धड़कन तेज होने के संभावित कारणों के बारे में।

निर्जलीकरण तब होता है जब तरल पदार्थ के कम सेवन से शरीर में पानी की मात्रा में कमी आ जाती है। निर्जलीकरण होने से दिल की धड़कन तेजी से प्रभावित होती है और घबराहट होने लगती है। तेज हार्टबीट को टैकाकार्डिओ के रूप में भी जाना जाता है। जिसमें प्रतिमिनट 100 से अधिक हार्टबीट को मेजर किया जा सकता है। निर्जलीकरण के दौरान हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

कैफीन एक उत्तेजक है और असामान् य रूप से बड़ी मात्रा में लेने से अनियमित हार्ट बीट की समस् या हो सकती है। आमतौर पर एक दिन में 10 ग्राम से अधिक कैफीन का सेवन हृदय रोग का कारण बन सकता है। चाय और कॉफी के अलावा एनर्जी ड्रिंक, चॉकलेट और सह्रश्व लीमेंट्स में भी अधिक मात्रा में कैफीन पाई जाती है।

अल्‍कोहल हार्ट बीट को सामान् य स् तर से काफी बढ़ा सकती है। अधिक अल् कोहल के सेवन से शरीर में पानी की कमी हो जाती है और इलेक्ट्रोलाइट गड़बड़ी भी हो सकती है। ये दोनों ही दिल की धड़कन बढ़ने का कारण हो सकते हैं। इसलिए जो लोग नियमित रूप से अल् कोहल का सेवन करते हैं उन् हें कम मात्रा में पीने की सलाह दी जाती है। महिलाओं को प्रतिदिन शराब का एक पैग या पुरुषों को 2 पैग से अधिक नहीं पीना चाहिए।

ब्लड में लो ऑक्सीजन लेवल, जिसे हाइपोक्सिमिया कहा जाता है, भी तेज हार्टबीट का कारण हो सकता है। लो ऑक्सीजन लेवल लंग्स इफेक्शन, निमोनिया और कई हार्ट डिजीज के कारण हो सकता है।

एनीमिया की वजह से कई शारीरिक समस् याएं आ सकती हैं जिसमें से तेज हार्ट बीट होना काफी सामान्य है। शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत् वों को पहुंचाने के लिए हार्ट बीट सामान् य से अधिक बढ़ जाती है। जिसके परिणामस्वरूप दिल की तेज धड़कन की अनुभूति हो सकती है।

कई लोगों को हार्ट बीट तेज होने पर किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं लेकिन थकान और सांस लेने में परेशानी इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आपकी दिल की धड़कन तेज है। दिल की धड़कन तेज होने पर ये लक्षण महसूस हो सकते हैं-

1. थकान
2. सांस लेने में कठिनाई
3. चक् कर
4. तेज धड़कन
5. बेहोशी
6. अधिक पसीना आना
7. गर्मी लगना
8. अधिक प्यास लगना
9. सीने में दर्द
10. जबड़े में दर्द

दिल की धड़कन कुछ ही मिनट या सेकेंड के लिए तेज होती है जैसे आप तेजी से घूम रहे हों, बैठे हों या लेटे हों। जीवनशैली में बदलाव या घरेलू उपचार आपकी दिल की धड़कन को कं ट्रोल या कम करने में मदद कर सकते हैं।

स्ट्रैस हार्ट बीट को बढ़ा सकता है और खराब भी कर सकता है। क् योंकि तनाव और उत्तेजना आपके एड्रेनालाइन को बढ़ा सकते हैं। रिलैक् सेशन के माध्यम से अपने स् ट्रैस को मैनेज करने में मदद मिल सकती है। रिलैक् सेशन टेक् नीक में आप मेडिटेशन, ताई ची, प्राणायाम या योग का सहारा ले सकते हैं। इससे दिल की धड़कन को कंट्रोल करना आसान हो जाएगा।

डिहाइड्रेशन के कारण हार्ट बीट तेज हो जाती है। ऐसा इ सलिए क् योंकि हमारे ब् लड में पानी होता है, निर्जलीकरण की स्थिति में ब्लड गाढ़ा हो जाता है जो हार्ट बीट को प्रभावित करता है। शरीर में ब् लड जितना गाढ़ा होगा उतनी ज्यादा मेहनत हृदय को ब्लड पंप करने के लिए करनी होगी। जो हार्ट बीट को बढ़ा सकती है। इसलिए तेज हार्ट बीट के दौरान पानी का सेवन करें।

ये जानकर आपको हैरानी हो सकती है कि तेज खांसने से हार्ट बीट को सामान् य करने में मदद मिल सकती है। जब आप तेजी से खांसते हैं तो आपकी छाती पर दबाव पड़ता है जिस वजह से दिल की धड़कन को सामान्य होने का मौका मिल जाता है। इसलिए आपको जब भी महसूस हो कि आपकी दिल की धड़कन तेज हो रही है तो तेजी से खांस सकते हैं।

हार्ट बीट तेज होने की स्थिति में ब्रीदिंग एक् सरसाइज फायदेमंद हो सकता है। हालांकि यदि नियमित रूप से ब्रीदिंग एक्सरसाइज की जाए तो दिल की कई बीमारियों और समस् याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। सही ढंग से ब्रीदिंग एक् सरसाइज करने के लिए आप एक् सपर्ट से सलाह कर सकते हैं।

get enough sleep
get enough sleep

अधिक थकान और कई बार नींद पूरी न होने के कारण भी हार्ट बीट तेज हो जाती है। इसलिए आपको जब भी महसूस हो कि आपकी हार्ट बीट तेज हो रही है तो आराम करें या थोड़ी देर सो जाएं। हार्ट को हेल्दी बनाने के लिए प्रतिदिन 6-7 घंटे की पर्याप्त नींद लें।

चिंता या घबराहट हार्ट पल्पीटेशन के आम कारणों में से एक है। तेज हार्ट बीट स्ट्रैस हार्मोन और नर्वस सिस् टम की सक्रियता के कारण हो सकती है जो पैनिक अटैक को ट्रिगर कर सकती है। हालांकि पैनिक अटैक अस्थायी होते हैं और किसी गंभीर समस् या का संकेत नहीं होते।

हार्ट को हेल्दी बनाने के लिए आपको अपनी डाइट में बदलाव करना होगा। हैवी और अधिक मात्रा में खाना खाने से आपकी हार्ट बीट प्रभावित हो सकती है। इसलिए दिल की धड़कन को सामान् य बनाए रखने के लिए फ्रूट, वेजिटेबल, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन को भोजन में शामिल करना चाहिए।

कई बार खाना खाने के बाद दिल की धड़कन तेजी से चलने लगती है। दिल की धड़कन बढ़ना आम बात है और ये कोई गंभीर समस्या नहीं है। लेकिन दिल की धड़कन का तेज होना हमारी लाइफस् टाइल और डाइट पर निर्भर करता है। कम पोटैशियम वाला भोजन या निर्जलीकरण की वजह से धड़कन तेज हो सकती है। यदि आपको हाइपोग्लाइसीमिया या लो ब् लड शुगर है तो आपकी डाइट के कारण दिल की धड़कन बढ़ने का खतरा अधिक हो जाता है। वहीं खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक, डाइट ड्रिंक, सोडा, अल् कोहल या कैफीन का सेवन करने से भी दिल की धड़कने बढ़ सकती हैं। इसके अलावा फूड एलर्जी भी हार्ट बीट को बढ़ाने में मदद कर सकती है। जो लोग बिना चबाए जल् दी-जल् दी खाना खाते हैं उनकी दिल की धड़कन भी सामान् य से अधिक हो सकती है इसलिए खाना आराम से धीरे-धीरे चबाकर खाएं और खाने के बाद 15-20 मिनट की सैर अवश् य करें। यदि ये समस् या बार-बार महसूस हो रही हैं तो ब् लड, यूरिन और स्ट्रैस टेस्ट कराएं और चिकित् सक से समय रहते संपर्क करें।