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Healthy Intestine Tips: आंतों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी खाद्य पदार्थ
Healthy Intestine Tips

Healthy Intestine Tips: शारीरिक-मानसिक रूप से स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने में हमारा जठरांत्र (गैस्ट्रोइन्टेस्टनल टैक्ट) अहम भूमिका निभाता है। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली का 70 प्रतिशत से अधिक भाग हमारे आंतों पर निर्भर करता है। आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया हमारे खाने से पौष्टिक तत्वों को पचाते हैं और उन्हें पूरे शरीर तक पहुंचाकर हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। इसके साथ ही ये बैक्टीरिया आंतों में मौजूद बैड बैक्टीरिया से हमारी रक्षा करते हैं और पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं। ऐसे में अगर हमारी आंतों में कोई समस्या होती है, तो पाचन तंत्र कमजोर होता है। ऐसे में हमें अपनी आंतों या कहें कि पाचन तंत्र को दुरुस्त रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए हमें अपने आहार में रोजाना गट- फ्रेंडली चीजें शामिल करनी चाहिए, जिनमें से कुछ चीजें इस प्रकार हैं-

राइस कांजी

आहार विशेषज्ञों के अनुसार क्योंकि प्रोबॉयोटिक्स खाद्य पदार्थ आंतों में गुड बैक्टीरिया बढ़ाने और शरीर की रोग- प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में सहायक होते हैं। अगर हम घर में पारंपरिक तरीके से बनने वाली राइस कांजी बनाएं, तो इससे बेहतर प्रोबॉयोटिक्स क्या हो सकता है। राइस कांजी बनाने के लिए आपको कसोरा जैसे मिट्टी के बर्तन, 1-3 चम्मच पके हुए सफेद चावल और एक से डेढ़ गिलास पानी की जरूरत होगी। चावलों और पानी को मिट्टी के बर्तन में डालकर रात भर के लिए छोड़ दें। इस मिश्रण को अगले दिन खाली पेट पिएं। फाइबर रिच राइस कांजी कब्ज की शिकायत दूर कर मल त्याग प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है।

रजिस्टेंस स्टार्च

पकाकर ठंडे किए हुए आलू और चावल, कच्चा केला, कटहल ओट्स जैसे खाद्य पदार्थ रजिस्टेंस स्टार्च के अच्छे स्रोत हैं। कब्ज की समस्या दूर होती है। पौषक तत्व छोटी आंत से खून में न जाने के कारण व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है। कोलोन कैंसर का खतरा कम रहता है। इसके अलावा रजिस्टेंट स्टार्च की पाचन प्रक्रिया बहुत धीरे होती है, जिसकी वजह से इसके सेवन से दूसरे फाइबर की तुलना में पेट में गैस या एसिडिटी कम बनती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी बहुत उपयोगी है।

घी

आपके पेट की समस्याओं को दूर करने के लिए घी बहुत उपयोगी खाद्य पदार्थ है। आयुर्वेद में घी की उपयोगिता का वर्णन किया गया है। मेडिकल साइंस ने भी माना है कि व्यक्ति को दिन में 2-3 छोटे
चम्मच गाय के घी का सेवन करना फायदेमंद है। रोटी चुपड़ने या दाल में मिलाने के अलावा घी का सेवन कच्चा भी किया जा सकता है। घी में छोटी आंत की अवशोषण क्षमता में सुधार लाने और पेट के अम्लीय पीएच लेवल को कम करने की क्षमता होती है। इसमें मौजूद ब्यूटिरिक एसिड, विटामिन ए, डी, ई और के आंतों को स्वस्थ, रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने, जोड़ों को लुब्रिकेंट करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक हैं।

एप्पल साइडर वेनेगर

जब हम प्रोबायोटिक्स की बात करते हैं, तो पहले हमें प्रीबायोटिक्स की तरफ ध्यान देना भी जरूरी है। वास्तव में प्रीबायोटिक्स का सेवन प्रोबाटिक्स की गुणवत्ता को बढ़ाता है। जब तक आप प्रीबायोटिक के रूप में अपने शरीर को ऊर्जा प्रदान नहीं करेंगे, तब तक प्रोबायोटिक्स का नियमित रूप से सेवन करना बेकार साबित होगा। एप्पल साइडर वेनेगर ऐसा ही प्रीबायोटिक है जो आंतों की दीवारों को मजबूत बनाता है। साथ ही छिद्रयुक्त आंत की वजह से पेट में एसिड का स्तर कम होने
और सूजन होने जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है।

त्रिफला

आयुर्वेद की देन त्रिफला में शक्तिशाली औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसमें 3 भारतीय सुपरफूड का मिश्रण है- अमलकी, बिभीटका और हरीतकी। त्रिफला के सेवन से व्यक्ति की भूख बढ़ती है, एनर्जी लेवल बढ़ता है और उसे तरोताजा महसूस कराता है। त्रिफला हमारी आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है। पेट में सूजन, अपच, कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याओं में त्रिफला का सेवन से आराम मिलता है। यह छोटी आंत, बड़ी आंत और पेट में मौजूद विषाक्त पदार्थों को फ्लश आउट करके उन्हें स्वस्थ बनाए रखता है।

भीगी हुई काली किशमिश

फाइबर से भरपूर भीगी हुई काली किशमिश का सेवन हमारी जठरांत्र को स्वस्थ रखने में बहुत कारगर है। नियमित रूप से सुबह खाली पेट किशमिश का सेवन करने से कब्ज की समस्या से राहत मिलती है। मल त्याग की प्रक्रिया सुचारू होती है।

सब्जा या तुलसी के बीज

सब्जा के बीजों में शीतलनकारी गुण और ऑयल भी मिलता है, जो शरीर के जठरांत्र मार्ग में बनने वाली गैस से राहत पहुंचाने में मदद करता है और पेट की सफाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ध्यान रखें कि सब्जा के बीजों को प्रभावी बनाने के लिए उन्हें पानी में भिगोकर ही सेवन करें। अंत में अच्छे स्वास्थ्य विशेषकर जठरांत्र स्वास्थ्य को पाने के लिए पौष्टिक तत्वों से भरपूर इन खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में जरूर शामिल करें। इसके साथ ही दिन में भरपूर मात्रा में पानी जरूर पिएं।

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