सुबह की पहली किरण के साथ ही तन और मन में एक अलग प्रकार की स्फूर्ति का आगमन होता है। हर ओर रोशनी और पेड़ पौधों से छनकर आने वाली हवाएं वातावरण को निर्मल स्वरूप प्रदान कर रही हैं। मगर फिर भी मन में उठने वाले सवाल और आस पास के माहौल की खींचतान के कारण मन कुछ देर के लिए तो शांत हो सकता है, मगर उसे स्थिर करना आसान नहीं हैं। ऐसे में हम इन पांच तरीकों को अपनाकर सुबह सुबह अपने मन और तन को कुछ इस प्रकार से जागृत कर सकते हैं।

 

मेडिटेशन करें

खुद को तनावमुक्त और तरो.ताजा रखने का सबसे बेहतरीन विकल्प है मेडिटेशन यानि ध्यान लगाना। मेडिटेशन आपकेे स्ट्रेस लेवल को केंद्रित करने और कम करने में मदद करता है। इसलिए सुबह उठने के बाद सीधे बैठें और कम के कम 5 मिनट तक मेडिटेशन करें। आप समय के साथ इस अवधि को बढ़ा सकती हैं। अपनी सांस लेने पर ध्यान केंद्रित करना या अपने दिन के पहले कुछ मिनटों के लिए कोई मंत्र दोहराना आपकी मानसिक मजबूती के लिए चमत्कार कर सकता है।

 

प्रकृति के नजदीक जाएं

हम सभी अपने कामों में इतना बिजी हो जाते हैं कि प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने के लिए कुछ समय बिताना हमारे लिए वास्तव में मुश्किल हो जाता है। बस प्रकृति के साथ होना। बगीचे में घूमना और सुंदर फूलों को देखनाए पक्षियों को चहकते हुए सुनना हमें खुद से जुड़ने का मौका देता है।

 

वाइब्स को महसूस करना शुरू करें

आपको अपने मन की अनदेखी करने से रोकने की आवश्यकता है। कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आपको लगता है कि कुछ गलत है या आप जिस व्यक्ति से बात कर रहे हैं उसके इरादे गलत हैं। अगर आप इस तरह का कोई भी खतरा महसूस करते हैं तो उसके अनुसार कार्य करें और अपने दिमाग द्वारा आपको दिए गए ऐसे अलर्ट को कभी भी अनदेखा न करें।

 

सपनों को लिखें

ऐसे दिन हैं जब आप कुछ असामान्य सपना देखते हैं और बस इसे अनदेखा करते हैं। हालांकि, ये सपने आपके जीवन में जल्द ही होने वाली किसी चीज़ के संकेत हो सकते हैं। सपने आपके अवचेतन मन में खेलते हैं जब आप सोते हैं और वे सामान्य रूप से आपके जीवन से जुड़े होते हैं। अगली सुबह आप जो सपना देखते हैं उसे अवश्य लिखें, इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है और यह आपके अंतर्ज्ञान को भी मजबूत बनाता है।

 

थोड़ी देर टहलें

सुबह आमतौर पर महिलाएं बहुत बिजी होती हैं, इसलिए एक संपूर्ण एक्सरसाइज रूटीन को फॉलो करना उनके लिए संभव नहीं होता है। लेकिन सिर्फ 20 मिनट तो अपने लिए निकाल ही सकती हैं। इस समय के दौरान रनिंग या जॉगिंग आपके शरीर और दिमाग के लिए चमत्कार कर सकती है। यहां तक कि थोड़ी सी एक्सरसाइज करके भी आप अपने वजन को आसानी से कंट्रोल कर सकती हैं। साथ ऐसा करने से कई बीमारियों से बचावए मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा और अनुशासन की भावना भी पैदा होती है।

 

ध्यान साधना के तीन आयाम 

सर्वप्रथम साधक जब ध्यान लगाने की चेष्टा करता है तब मन अत्यधिक चंचल हो जाता है तथा मन में अनेकों प्रकार के ख्याल उभरने लगते हैं। साधक विचार को जितना ही एकाग्र करना चाहता है उतनी ही तिव्रता से मन विचलित होने लगता है तथा मन में दबे हुए अनेकों विचार उभर कर सामने आने लगते हैं इस लिए ध्यान साधना को तीन आयामों में विभक्त किया गया है।

1 विचार दर्शन

2 विचार सर्जन

3 विचार विसर्जन

 

विचार दर्शन 

साधक को चाहिए कि जब ध्यान लगाने बैठे तब मन में जो विचार उत्पन्न हो उसे होने दें। विचारो को आने से न रोकें न ही विचारों को दबाने की चेष्टा करे। मन में विचार लाना नही है और न ही विचारों को आने से रोकना है। केवल दृष्टा बन कर विचारों को देखते रहना है।

मन एक विचार से दूसरा विचार दूसरे से तीसरा इस तरह से अनेको प्रकार के विचार घटना, दुर्घटना, वास्तविक तथा काल्पनीक अनेकों विचार मन में उत्पन्न होते रहेंगे परंतु आपको उन विचारों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं केवल दृष्टा बनकर आप देखते जाइये कि मन किस प्रकार कल्पना लोक में उड़ान भर रहा है। ऐसा करने से धीरे.धीरे आपके विचारों में कमी आने लगेगी और विचार स्थिर होने लगेंगे।

 

विचार सर्जन 

इस क्रिया में साधक को अपनी आँखे बंद कर मन को आज्ञाचक्र पर कुछ देर तक केद्रित करने का प्रयास करना चाहिए तत्पश्चात मन मे कोई विचार लाए और कुछ देर तक उस पर ध्यान को केद्रित करें और उस विचार को मन से हटा दें तथा पुनः दूसरा विचार लाएं और उस पर भी कुछ देर तक ध्यान केंद्रित कर उसे भी मन सें हटा दें। इस तरह मन में अलग.अलग विचारों को लाते रहें तथा कुछ देर तक उसपर अपना ध्यान केंद्रित कर उसें हटाते जायें। इस तरह करते रहने से धीरे.धीरे मन थकान अनुभव करने लगेगा और कुछ देर के लिए कुछ सोंचना बंद कर देगाए आपको ऐसा लगेगा कि मन आराम करना चाह रहा है।धीरे.धीरे आप देखेगे कि मन आपके काबू में होने लगेंगे तथा विचार शून्य होने लगेगा।

 

विचार विर्सजन 

साधक अपनी आँखे बंद कर धीरे.धीरे गहरी श्वांस ले और धीरे.धीरे छोड़े कुछ देर बाद मन में कोइ विचार आने दें। जैसे ही मन में कोइ विचार आता है उसे तुरंत अपने मन से हटा देंए फिर मन में कोइ विचार आये उसे भी हटा देंए इस तरह मन मे उठने वाले सभी विचारों को मन से हटाते जाएं ऐसी क्रिया को ही विचार विर्सजन कहा जाता है।

इस क्रिया में साधक को चाहिए कि मन मे उठने वाले विचारों को न रोकें बल्कि उन विचारों को मन से हटाने का प्रयास करते रहना चाहिए। इस प्रकार से अभ्यास करते रहने से मन निर्विकार तथा निर्विचार होने लगता है और विचार शुन्य की स्थिती बनने लगती है तथा अर्तमन के जागृत होने से अलौकिक एवं चमत्कारिक दृष्य तथा घटनाएं ध्यान की अवस्था में दिखाई देने लगते हैं।

 

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