दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने पर फर्स्ट एड की जरूरत पड़ती है। दिल के दौरे के लक्षण देखते ही अलर्ट हो जाएं और इलाज करें। 15 मिनट में अगर व्यक्ति को सही इलाज मिल जाता है तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।
हार्ट अटैक आने के बाद के 90 मिनट बेहद महत्त्वपूर्ण होते हैं और इस दौरान किया गया उपचार ही मरीज को जीवन दे सकता है।
ध्यान रखें कि रोगी नहीं बता सकता कि उसे ये तकलीफ होने वाली है। तकलीफ हो जाने पर ही उसे पता चलता है, उसकी छाती में असहनीय पीड़ा होती है और उसकी नाड़ी की गति धीमी व कमजोर हो जाती है। चेहरे का रंग पीला पड़ जाता है, सांस फूलने लगती है व ठंडे पसीने आते हैं। वह निढाल और बेबस सा हो जाता है।
एस्प्रिन दें
मेडिकल सहायता मिलने से पहले ऐसे व्यक्ति को 300 मिग्रा एस्प्रिन या ईकोस्प्रिन 150 की 2 गोली दी जा सकती है। एस्प्रिन से खून पतला हो जाता है और खून का थक्का घुल जाने से खून अवरुद्ध रक्तवाहिका से गुजर जाता है। सबसे अच्छा तो यह है कि एस्प्रिन की 1 गोली को चूरा करके इसे जबान के नीचे रख लिया जाए ताकि ये जल्दी से खून में घुल जाए और 1 गोली पानी में घोलकर दी जा सकती है। (जिन लोगों को पेट का अल्सर हो, और जिन्हें एस्प्रिन से एलर्जी हो, उन्हें एस्प्रिन नहीं दी जानी चाहिए)
नाक दबाएं
मरीज की नाक को उंगलियों से दबाकर रखिए और अपने मुंह से कृत्रिम सांस दें। नथुने दबाने से मुंह से दी जा रही सांस सीधे फेफड़ों तक जा सकेगी। लंबी सांस लेकर अपना मुंह चिपकाएं, हवा मुंह से किसी तरह से बाहर न निकल रही हो।
सीपीआर विधि अपनाएं
कार्डियोपल्मॉनेरी रिससिटेशन या सीपीआर विधि जिसे हिंदी में संजीवनी क्रिया भी कहते हैं। सीपीआर का उद्ïदेश्य डॉक्टरी सहायता मिलने तक पीड़ित व्यक्ति को जीवित रखना होता है। जिसे निम्नलिखित ढंग से क्रम अनुसार करें।
1. सर्वप्रथम पीड़ित को किसी ठोस जगह पर लिटा दें और पीड़ित के एक ओर घुटनों के बल बैठ जाएं।
2. अपना एक हाथ का पंजा पीड़ित के छाती के बीच की हड्ïडी जहां पर छाती कि हड्डियां मिलती हैं के मध्य में रखें। यह स्थान छाती के मध्य में दोनों निप्पल के बीच में होना चाहिए।
3. इसके बाद दूसरे हाथ को पहले हाथ के ऊपर रखे हुए उंगलियों को बाध लें। अपनी बाजुओं और कोहनियों को सीधा रखें।
4. उसके बाद पीड़ित के छाती की हड्डियों को सीध 1.5 से 2 इंच या 4 से 5 से.मी. तक नीचे दबाव दें। छाती पर दबाव देने की यह प्रक्रिया प्रति मिनट 100 बार कि गति से होनी चाहिए।
5. दबाव देने और छोड़ने कि क्रिया एक बार में 30 बार करें। दबाव देने और छोड़ने का समय बराबर होना चाहिए।
6. पीड़ित को सीपीआर देते समय 2 बार कृत्रिम सांस दें और 30 बार छाती पर दबाव देना चाहिए। छाती पर दबाव और कृत्रिम सांस देने का अनुपात 302 रखें।
7. जब तक आपातकालीन सहायता प्राप्त न हो या पीड़ित सामान्य सांस लेना शुरू न कर दे तब तक सीपीआर देते रहें।
सीपीआर क्या है?
सीपीआर जिसे हिंदी में संजीवनी क्रिया भी कहते हैं, एक ऐसी क्रिया है जो उस समय प्रयोग में लाई जाती है जब कोई दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति बेहोश होता है सांस नहीं ले पा रहा होता है और उसके शरीर में खून का संचार भी नहीं हो रहा होता है।
सीपीआर में दो कार्य किये जाते हैं
1. मुंह द्वारा सांस भरना
2. छाती को दबाना
सीपीआर हमारे शरीर में श्वसन क्रिया और रक्ताभिसरण क्रिया यह 2 क्रियाओं को जारी रखता है। इन दोनों क्रिया में से एक भी क्रिया अगर 4 मिनटों के ऊपर बंद पड़ेगी तो सबसे महत्त्वपूर्ण अवयव मस्तिष्क को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पायेगी और 4 मिनट बाद मस्तिष्क के पेशी मृत होना चालू हो जाते हैं। 10 मिनटों में मस्तिष्क के सारे पेशी मृत हो जाते हंै। ऐसे मरीजों में सीपीआर तुंरत देकर हम डॉक्टर के आने तक कम से कम जिंदा रखने में कामयाब हो सकते हैं । सीपीआर क्रिया की जरूरत दिल का दौरा पड़ने, गला घुटने, पानी में डूबने, बिजली का झटका लगने, घुएं से दम घुटने या जहरीली गैसों को सूंघ लेने जैसी स्थितियों में पड़ती है।

इमरजेंसी फोन करें
मरीज को लिटाने और एस्प्रिन की टैबलेट देने के बाद तुरंत इमरजेंसी नंबर पर फोन करें और एंबुलेंस को तुरंत बुलाएं।
मरीज को लिटाएं
दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को सबसे पहले आरामदायक स्थिति में लिटाएं रोगी के बटन खोलें और कपड़े ढीले कर दें। यदि उसकी रीढ़ की हड्डी या छाती में तेज दर्द हो रहा हो तो गर्म या ठंडे पानी का स्पंज करें। गर्म पानी में भिगोकर और फिर निचोड़ कर पट्टी को हृदय के आस पास की जगह पर रखें। जब तक रोगी की धड़कन सामान्य न हो जाए या आप डॉक्टर के पास न पहुंच जाएं, रोगी का उपचार जारी रखें। रोगी के आस-पास शांति बनाए रखें। तेज रोशनी और शोर शराबा न करें और बार-बार पट्टी उठा कर त्वचा को साफ करते रहें।
अब आगे क्या करें?
आप फौरन डॉक्टर के पास जाएं। सबसे अच्छा ये होगा कि आप किसी ऐसे अस्पताल जाएं जहां ई. सी. जी और खून का टैस्ट CPK-MB या सबसे जरूरी Troponin अथवा Troponin किया जा सके।
करें खांसी का प्रयोग
ज्यादातर लोग दिल के दौरे के वक्त अकेले होते हैं तथा सांस लेने में तकलीफ होती है। वे बेहोश होने लगते हैं और उनके पास सिर्फ 10 सेकण्ड्स होते हैं। ऐसे हालत में पीड़ित जोर- जोर से खांस कर खुद को सामान्य रख सकता है। हर खांसी से पहले पीड़ित को एक जोर की सांस लेनी चाहिए और खांसी इतनी तेज हो की छाती से थूक निकले। जब तक मदद न आये ये प्रक्रिया दो सेकंड तक दोहराई जाए ताकि धड़कन सामान्य हो जाए।
जोर की सांसें फेफड़ों में ऑक्सीजन पैदा करती हैं और जोर की खांसी की वजह से दिल सिकुड़ता है जिससे रक्त सचंालन नियमित रूप से चलता है।
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