बच्चों को डायपर पहनाना आज की जरूरत है। वर्किंग महिलाओं के लिए तो ये और भी जरूरी हो जाता है कि उनके बच्चे के कपड़े बार-बार गीले न हों और उनका समय भी बचे। हाउस वाइफ के लिए भी घर पर काम करना आसान हो जाता है, जब बच्चे के कपड़े जल्दी-जल्दी बदलने नहीं पड़ते हैं। लेकिन इन सबके बीच एक दिक्कत होती है डायपर रैशेज की।

इन रैशेज का इलाज कई बार भारी पड़ जाता है। दरअसल अगर समय रहते इन पर ध्यान ना दें तो इन रैशेज को ठीक करना कठिन होता जाता है। और एक स्थिति के बाद डॉक्टर के पास भी जाना पड़ता है। मगर डायपर रैशेज को अगर घरेलू उपायों से ठीक किया जाए तो दिक्कत कम होती है। कह सकते हैं स्थिति खराब होने से पहले काबू में आ जाती है। घरेलू उपाय, जिनका साइड इफेक्ट आमतौर पर नहीं होता है। इन घरेलू उपायों के बारे में अगर आप अभी तक नहीं जानती थीं तो हम इनसे आपकी पहचान कराए देते हैं। एक बार आजमाने के बाद ये आपको फायदेमंद लगेंगे ही- 

 

15 मिनट का समय

बच्चे रैशेज ठीक होने का तरीका जानने से पहले ये जान लीजिए कि कुछ देर के लिए बच्चे का बिना डायपर के रहना भी जरूरी है। ये कुछ देर कम से कम 15 मिनट होनी ही चाहिए। बच्चे के निचले हिस्से को इतनी देर तो कम से कम हवा लगनी ही चाहिए। डायपर पहनने से पहले बच्चे की बॉडी जरूर ही सूखी हुई होनी चाहिए। रैशेज होने की संभावना तब ही कम हो सकती है। 

 

बदलें डायपर कॉनस्टार्च के साथ

जब भी आप डायपर बदलें तो कॉनस्टार्च का इस्तेमाल आपके बच्चे को रैशेज से बचाने में बढ़िया असर करेगा। दरअसल कॉनस्टार्च नमी को सोखने का काम करता है और इसका असर भी कम करता है। इसको इस्तेमाल करने के लिए गीले डायपर को निकालने के बाद हिप्स को गुनगुने पानी से धो लें। अब इस जगह पर कॉनस्टार्च अप्लाई करें। अगला डायपर इसके सूखने के बाद ही इस्तेमाल करें। 

 

कमाल का नारियल तेल

नारियल तेल को वैसे भी हमेशा से त्वचा के लिए अच्छा माना जाता रहा है। डायपर रैशेज के लिए भी ये तेल खूब काम आता है। इससे रैशेज में काफी सुधार हो सकता है। ये बेहतर से बेहतर होते जाएंगे समय के साथ। इसके लिए आपको गुनगुने पानी से पहले सफाई करनी है। अब इसे अच्छे से सुखा लें। अब नारियल तेल लगा लें। नारियल तेल एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल होता है। जिसकी वज्श से रैशेज में लगातार सुधार होते रहते हैं। 

 

बेकिंग सोडा भी करेगा मदद

बेकिंग सोडा जरूर आपकी कुकिंग के काम आता है लेकिन इस बार ये आपके बच्चे के डायपर रैशेज को ठीक करने के भी काम आएगा। इसके लिए आपको कम से कम 15 कप पानी लेना होगा। अब इसमें 2 चम्मच बेकिंग सोडा डाल दीजिए। अब इस सोडा और पानी के मिश्रण को बच्चे के हिप्स में लगाएं। अब इस मिश्रण से सफाई करें। ज्यादा रगड़ें नहीं, वरना बच्चे की त्वचा को नुकसान हो सकता है। सफाई के बाद हिप्स जब सूख जाएं तब ही दोबारा डायपर पहनाएं। 

 

ब्रेस्ट मिल्क बना जाएगा दवा– 

ब्रेस्ट मिल्क वैसे भी बच्चों के लिए दवा का काम करता है। लेकिन ये डायपर रैशेज के लिए भी दवा का ही काम करते हैं। इसमें आपको कुछ अलग से नहीं करना है बल्कि ब्रेस्ट मिल्क की कुछ बूंदें रैशेज वाली जगह पर लगानी हैं। अब इसे यूंहीं सूखने दें। 

 

एलोवेरा करेगा रिलैक्स

एलोवेरा आजकल हर घरेलू नुस्खे का हिस्सा होता ही है। इसमें इतनी सारी खासियतें हैं कि इसके स्पेशल होने को नकारा भी नहीं जा सकता है। डायपर रैशेज में भी एलोवेरा बहुत काम आता है। इसके लिए आपको एलोवेरा जेल को बेबी के हिप्स में लगाना है खासतौर पर उस जगह जहां अक्सर रैशेज हो जाते हैं। एलोवेरा सबसे पहले तो जलन दूर करता है, फिर धीरे-धीरे रैशेज को भी खत्म कर देता है। 

 

विनेगर  दिखाएगा कमाल– 

विनेगर की एक खासियत ये भी है कि ये पीएच बैलेंस को भी ठीक करता है। दरअसल यूरिन में पीएच का लेवल जरूरत से ज्यादा होता है। विनेगर इसी लेवल को बैलेंस करता है। आप अगर कपड़े का डायपर या कोई भी दूसरा डायपर बच्चे ले लिए इस्तेमाल कर रही हैं तो डायपर एरिया को थोड़ा पानी मिले विनेगर से साफ कर दें। ये सॉल्युशन त्वचा पीएच बैलेंस ठीक कर देगा। फिर बच्चे को राहत मिल जाएगी। विनेगर का इस्तेमाल कपड़े के डायपर धोने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके 1 बाल्टी पानी में थोड़ा विनेगर मिला लें। अब इस पानी में कपड़े के डायपर धो लें। 

 

नीम के गुण

डायपर रैशेज को नीम के गुणों से भी सही ठीक किया जा सकता है। नीम एंटी माइक्रोबियल होता है, जिससे संक्रमण बढ़ता नहीं है। गंभीर या खुले घावों पर नीम या इसके तेल का इस्तेमाल ठीक नहीं होता है। लेकिन हल्के रैशेज पर नीम का पाउडर और तेल लगाया जा सकता है। 

 

घर पर नील का तेल

घर पर नीम का तेल बनाना भी बहुत आसान होता है। आप कड़वे तेल के साथ फिटकरी और नीम को पका लीजिए। इसको खूब पकाना है। बस इसके बाद तैयार है नीम का तेल। 

 

डॉक्टर की याद

डायपर रैशेज घरेलू तरीकों से ठीक किए जा सकते हैं लेकिन कई बार स्थिति खराब होने पर डॉक्टर को याद कर लेने में ही समझदारी होती है। जैसे रैशेज के आसपास दाने होना या इनका पैरों तक बढ़ जाना। इसके साथ ही अगर एक हफ्ते के अंदर रैशेज ठीक न हों तो भी आपको डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए। 

 

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