Cow Ghee Benefits: देसी घी सदियों से भारतीय रसोई की शान रहा है। आहार के विभिन्न तरह के व्यंजनों और मिठाइयों में इस्तेमाल होने के साथ-साथ देसी घी का उपयोग औषधीय और सौंदर्य संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए भी किया जाता है। देसी घी में मौजूद औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में कई बीमारियों के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

देसी घी को लेकर लोगों में यह धारणा देखने को मिलती है कि इसे खाने से मोटापा और दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ता है, जो कुछ हद तक निराधार है। आमतौर पर देसी घी गाय, भैंस और बकरी के दूध से बना होता है। इनमें भैंस के दूध से बने घी में सबसे ज्यादा फैट होता है जबकि गाय के दूध से बने घी में फैट और कैलोरी कम होते हैं। साथ ही फैट कम होने से गाय का दूध सुपाच्य है और बीमारियों से बचाव में कारगर है।
आहार विशेषज्ञों के हिसाब से एक व्यक्ति पूरे दिन में 10-15 ग्राम या 2-3 चम्मच घी खा सकता है। जब वह किसी भी रूप में अधिक मात्रा से ज्यादा घी का सेवन करता है तो फैट हमारे सेल्स में जमा होना शुरू हो जाता है। ऊपर से अगर उस व्यक्ति की फिजीकल एक्टिविटीज ज्यादा नहीं हों, तो सेल्स या मांसपेशियों में जमा हुआ फैट मोटापे को जन्म देता है। वैज्ञानिकों ने तो यह साबित कर दिया है कि संतुलित मात्रा में गाय दूध से बने देसी घी का सेवन वजन कम करने में सहायक होता है।
शरीर बनाए मजबूत

देसी घी में संतृप्त या सैचुरेटिड और असंतृप्त या अनसैचुरेटिड दो तरह की वसा होती है जिसमें से 65 प्रतिशत भाग संतृप्त वसा का होता है। हमारे सेल्स द्वारा अवशोषित हो जाते हैं और हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। रात को सोते समय दूध में एक चम्मच देसी घी डालकर पीने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है और शरीर हष्ट-पुष्ट बनता है।
गंभीर बीमारियों से बचाए
गाय के दूध से बने देसी घी में ओमेगा-3, ओमेगा-7 जैसे कई फैटी एसिड, लिनोलेनिक जैसे एंटी ऑक्सीडेंट, कैलोरीज़, प्रोटीन भी पाए जाते हैं। ये हानिकारक फ्री रेडिकल्स कणों से हमारे शरीर की रक्षा करते है और हृदय रोग, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करके एलडीएल बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और हृदय रोगों के खतरे को बचाता है। एक लुब्रिकेंट की तरह हार्ट की आर्टिरीज में ब्लॉकेज को खत्म करता है।
देसी घी में कैंसर पैदा करने वाले ब्यूट्रिक एसिड ब्रेन ट्यूमर को बढ़ने से रोकता है। यह एक मजबूत माइक्रोबियल, कैंसर विरोधी और एंटी वॉयरल एजेंट के रूप में काम करता है और शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है जिससे इंफेक्शन से बचाव करने में सहायक है। रोजाना 1 चम्मच देसी घी दूध में मिलाकर पीने या दाल में मिलाकर खाएं।
एनर्जी बूस्टर का करे काम

देसी घी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर शरीर को हेल्दी रखता है और एनर्जी प्रदान करता है। सर्दियों में देसी घी का सेवन शरीर केा गर्म रखता है और मजबूत बनाता है।
जोड़ों के दर्द में दे आराम
हमारी हड्डियों को मजबूत बनाता है और जोड़ों के दर्द से राहत पहुंचाता है। गाय के दूध से बने देसी घी के सेवन से जोडों के बीच चिकनाई बनी रहती है जिससे वे आसानी से काम करते हैं और उनमें दर्द कम होता है। नियमित रूप से सेवन के अलावा जोड़ों पर देसी घी की मालिश करना फायदेमंद होता है। हाथ-पैर में जलन या दर्द होने पर गाय के घी से पैरों के तलवे की मालिश करने से आराम मिलता है।
शारीरिक-मानसिक विकास में सहायक

मस्तिष्क के टिशूज और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति करने में मदद करता है। शारीरिक-मानसिक संतुलन कायम कर स्मरणशक्ति और हातिविधियों को बढ़ावा देता है। एक कप दूध में एक चम्मच गाय का घी और एक चम्मच मिश्री मिलाकर पीने से शारीरिक और मानसिक कमजोरी दूर होती है। सिर पर गाय के घी की मालिश करना असरदार है।
वेट मैनेजमेंट में मददगार
लिनोलिक एसिड से भरपूर गाय के दूध से बने देसी घी शरीर की पाचन प्रक्रिया या मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है। इससे पाचन संबंधी विकार और पेट के अल्सर के उपचार में मदद मिलती है। मेटाबॉलिज्म ठीक होने से शरीर में अनावश्यक फैट को स्टोर नहीं होता। इससे वजन कंट्रोल में रहता है खासतौर पर पेट की फैट कम होता है।
कब्ज की शिकायत करे दूर

देसी घी के नियमित सेवन से एसिडिटी और कब्ज की शिकायत दूर होती है और भूख बढ़ती हैै। रात को सोने से पहले गर्म दूध में एक चम्मच देसी घी मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है।
पुरानी खांसी में दे आराम
सूखी खांसी में दूध में गाय का देसी घी देसी घी मिलाकर पीने से खुश्की दूर करता है और खांसी में आराम मिलता है। पुरानी खांसी होने पर देसी घी और गुड़ गर्म कर खाने से आराम मिलेगा। कफ होने पर गाय के घी से पीठ और छाती की मालिश करने से कफ की शिकायत दूर होती है। खांसी से गला बैठने पर देसी घी में काली मिर्च का थोड़ा-सा पाउडर मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
माइग्रेन दर्द में दे आराम

सिरदर्द होने पर देसी घी की सिर और पैरों के तलवे की मालिश करने से आराम मिलता है। सुबह-शाम देसी घी की दो बूंदे नाक में डालने से माइग्रेन के दर्द काफी आराम मिलता है।
बढ़ाए आंखों की रोशनी
वसा में घुलनशील विटामिन ए, डी और ई स भरपूर देसी घी आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक है। साथ ही यह रोजमर्रा के आहार में लिए जाने वाले विटामिन्स को मांसपेशियों में आसानी से स्टोर कर लेता है। एक चम्मच देसी घी, एक चम्मच पिसी चीनी और एक-चौथाई चम्मच काली मिर्च मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय खाकर गर्म दूध पीना फायदेमंद है।
मॉश्चराइजर एजेंट का करे काम

देसी घी में मौजूद फैटी एसिड सर्दियों में सूखी त्वचा को बखूबी हाइड्रेट कर नमी प्रदान कर त्वचा को कोमल बनाने में मददगार है। नियमित रूप से त्वचा की मालिश करने से एंटी-एजिंग का काम भी करता है यानी उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में आने वाली झुर्रियों को कम करता है। देसी घी की मालिश आंखों के नीचे डार्क सर्कल को भी कम करती है और आंखों को आराम पहुंचाता है। रात सेाते समय या नहाने से पहले देसी घी की मालिश करने से रूखापन दूर होता है, दाग-धब्बे दूर होेते हैं और चमक आती है। देसी घी में थेाड़ा-सा कपूर मिलाकर लगाने से त्वचा में होने वाले दाने कम होते हैं। सर्दियों में फटे होंठों और एड़ियों पर दिन में कम से कम 2 बार देसी घी लगाना फायदेमंद रहता है।
बालों को दे नई जान
गाय के दूध से बना देसी घी ड्राई, कर्ली, दोमुंहे और झड़ते बालों की समस्या को दूर करने में मदद करता है। बराबर मात्रा में देसी घी, जैतून या नारियल तेल मिलाकर अच्छी तरह सिर की मालिश करके 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद माइल्ड शैंपू से बाल धोने से बाल नरम और चमकदार हो जाते हैं। बाल काले, मजबूत और घने होते हैं।
(डॉ संजीव कुमार, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट, दिल्ली)
