क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज के लक्षण और कारण क्या हैं
जब हमारे शरीर में एक तरह के व्हाइट ब्लड सेल सही से काम नहीं करते हैं, तो क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज होने की संभावना बढ़ जाती है। बच्चों में भी यह समस्या होने की संभावना अधिक होती है।
Chronic Granulomatous Disease: क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज एक जन्मजात डिसऑर्डर है। यह डिसऑर्डर तब होता है, जब हमारे शरीर में एक तरह के व्हाइट ब्लड सेल सही से काम नहीं करते हैं। इन व्हाइट ब्लड सेल्स को फैगोसाइट कहा जाता है। फैगोसाइट आमतौर पर शरीर को इंफेक्शंस से लड़ने में मदद करते हैं। जब यह सेल्स सही से काम नहीं करते हैं, तो इससे शरीर का बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शंस से बचाव नहीं हो पाता है। क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज से पीड़ित लोगों के फेफड़े, स्किन, लिम्फ, लिवर और शरीर के अन्य हिस्सों में इंफेक्शन हो सकता है। इस रोग की संभावना बचपन में अधिक होती है, लेकिन कुछ लोगों में युवावस्था में भी इसका निदान हो सकता है। आइए जानें क्या हैं इसके लक्षण और कारण।
क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज के लक्षण
क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज से पीड़ित लोग हर कुछ सालों में गंभीर बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन का अनुभव करते हैं। लंग्स में इंफेक्शन होना ऐसे लोगों में सामान्य है। इस समस्या से पीड़ित लोगों की स्किन, लिवर आदि में इंफेक्शन होना भी कॉमन है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

- बुखार
- सांस अंदर लेते या बाहर छोड़ते हुए छाती में दर्द होना
- लिम्फ नोड्स में सूजन
- नाक का लगातार बहना
- स्किन में समस्या जैसे रैशेज, सूजन या लालिमा
- मुंह में सूजन और लालिमा
इसके अलावा रोगी को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं जैसे उल्टी आना, डायरिया, पेट में दर्द, मल में खून आना आदि।
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क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज के कारण
हमारे पांच जीन्स (Genes) में से एक में बदलाव होना क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज का कारण हो सकता है। क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज से पीड़ित लोगों को अपने माता-पिता से बदले हुए जीन विरासत में मिलते मिलते हैं। ये जीन प्रोटीन प्रोड्यूज करते हैं, जो एंजाइम बनाते हैं। यह एंजाइम इम्यून सिस्टम को सही से काम करने में मदद करते हैं। एंजाइम व्हाइट ब्लड सेल्स में एक्टिव होते हैं, जो कवक और बैक्टेरिया को नष्ट करके हमारे शरीर को इंफेक्शन से बचाते हैं। एंजाइम इम्यून सेल्स में भी सक्रिय होते हैं जो हमारे शरीर को हील होने में मदद करता है। जब इनमें से किसी एक जीन में परिवर्तन होता है, तो प्रॉटेक्टिव प्रोटीन प्रोड्यूज नहीं होते हैं या वो प्रोड्यूज तो करते हैं लेकिन यह प्रोटीन सही से काम नहीं करती है।
क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज का उपचार
क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज के उपचार का लक्ष्य इंफेक्शन से बचाव और कंडिशन को मैनेज करने में मदद करना है। इसके उपचार में यह सब शामिल है:
- इंफेक्शन मैनेजमेंट- डॉक्टर सबसे पहले बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन से बचाव की तरफ फोकस करते हैं। इसके उपचार में ट्राइमेथोप्रिम और सल्फैमेथॉक्साज़ोल का कॉम्बिनेशन जैसी दवाईयां दी जा सकती हैं। इसके अलावा अन्य एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाईयां भी दी जा सकती हैं।
- इंटरफेरॉन गामा- रोगी को डॉक्टर इंटरफेरॉन-गामा इंजेक्शन भी दे सकते हैं, जिससे इंफेक्शंस से बचाव के लिए इम्यून सिस्टम में सेल्स को बूस्ट करने में मदद मिल सकती है।
- स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन- कुछ मामलों में क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज के इलाज के लिए स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। इस तरीके से उपचार कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है जैसे रोग के लक्षण, डोनर का मिलना आदि।

क्रॉनिक ग्रैन्युलोमेटेस डिजीज से बचाव संभव नहीं है। अगर किसी व्यक्ति की इस रोग की फैमिली हिस्ट्री है, तो अपने बच्चों में इस डिसऑर्डर के रिस्क के बारे में जानने के लिए डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
