Overview: कार्डियोलॉजिस्ट का खुलासा: विसरल फैट घटाने और हार्ट हेल्थ सुधारने का सबसे तेज़ तरीका
कार्डियोलॉजिस्ट्स के मुताबिक शरीर में जमा विसरल फैट दिल की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यह फैट आंतों और लिवर के आसपास जमा होकर ब्लड प्रेशर, शुगर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाता है। सही डाइट, रोज़ाना 30 मिनट की वॉक और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से इसे तेजी से कम किया जा सकता है। वजन घटाने के साथ-साथ हार्ट हेल्थ भी मज़बूत होती है।
Lose Visceral Fat Fast: पेट के आसपास की चर्बी हम सबको परेशान करती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ दिखने वाली चर्बी ही नहीं, बल्कि अंदरूनी चर्बी भी बहुत खतरनाक होती है? इसे विसरल फैट कहा जाता है। यह हार्ट, लिवर और पैनक्रियाज़ जैसे वाइटल ऑर्गन्स के आसपास जमा होती है और कई बीमारियों का कारण बनती है।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप जमनदास ने बताया है कि ज्यादा शुगर और बार-बार खाने की आदत इस चर्बी को और बढ़ा देती है। उन्होंने कहा कि अगर हम इसे कम करना चाहते हैं, तो सबसे असरदार तरीका है उपवास (फास्टिंग)। जब हम कुछ समय तक खाना नहीं खाते, तो शरीर शुगर की जगह जमा फैट को एनर्जी के लिए इस्तेमाल करने लगता है। इससे धीरे-धीरे यह हार्मफुल फैट पिघलने लगती है।
डॉ. जमनदास के अनुसार, उपवास न सिर्फ फैट घटाने में मदद करता है, बल्कि ब्लड शुगर कंट्रोल, हार्ट हैल्थ और मेटाबॉलिज़्म को भी बेहतर बनाता है। इस लेख में हम समझेंगे कि विसरल फैट क्या है, यह क्यों खतरनाक है और फास्टिंग इसे कैसे कम करता है। साथ ही, जानेंगे कि फास्टिंग करने के सही तरीके और किन सावधानियों की ज़रूरत होती है।
विसरल फैट क्या है

विसरल फैट वह फैट है जो हमारे ऑर्गन्स के आसपास जमा हो जाती है, जैसे लिवर, हार्ट और पैनक्रियाज़। यह बाहर से उतना क्लेयर दिखाई नहीं देती, लेकिन धीरे-धीरे हमारे शरीर की वर्किंग को बिगाड़ देती है। रिसर्च बताती है कि ज्यादा विसरल फैट से डायबिटीज़, हाई बीपी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि सिर्फ पेट अंदर या बाहर दिखने से सेहत का अंदाज़ा नहीं लगाना चाहिए। यह चर्बी छुपी हुई होती है और चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है।
शुगर और इंसुलिन का बैलेंस

जब हम बार-बार मीठा या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाते हैं, तो शरीर में इंसुलिन नाम का हार्मोन बढ़ता है। यह इंसुलिन शुगर को एनर्जी बनाने में मदद करता है। लेकिन जब यह बहुत ज्यादा हो जाता है, तो शरीर शुगर को फैट में बदलकर स्टोर करना शुरू कर देता है। यही फैट आगे चलकर विसरल फैट बनता है। यानी ज्यादा मीठा और बार-बार स्नैकिंग करना इस चर्बी को और बढ़ा देता है। इसलिए डॉक्टर कहते हैं कि अगर सेहतमंद रहना है तो शुगर और बार-बार खाने की आदत पर कंट्रोल ज़रूरी है।
फास्टिंग कैसे बर्न करती है फैट
डॉ. जमनदास के अनुसार, जब हम कुछ घंटे तक खाना नहीं खाते, तो शरीर पहले जमा ग्लाइकोजन इस्तेमाल करता है। लेकिन लगभग 12 घंटे बाद, शरीर के पास नई शुगर नहीं बचती। तब वह फैट को बर्न करना शुरू करता है। यही वह समय है जब शरीर विसरल फैट को भी एनर्जी के रूप में खर्च करता है। इसे ही फास्टिंग का फायदा कहा जाता है। यानी थोड़े-थोड़े समय की फास्टिंग न केवल पेट को आराम देती है, बल्कि खतरनाक इन्टर्नल फैट को भी कम करता है।
फास्टिंग से मिलने वाले फायदे
फास्टिंग सिर्फ चर्बी घटाने के लिए नही है। इसके और भी बड़े फायदे हैं। यह शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारता है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है। इसके अलावा, यह शरीर में इंफ्लामेशन कम करता है, जो कई बीमारियों की जड़ है। नियमित उपवास से दिल की सेहत अच्छी रहती है, वजन संतुलित रहता है और मेटाबॉलिज्म भी एक्टिव हो जाता है। रिसर्च कहती है कि जो लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं, उनका दिल और दिमाग लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं।
उपवास करते समय क्या सावधानी रखें
फास्टिंग हर किसी के लिए एक जैसा नही होता। अगर आपको डायबिटीज़, लो बीपी या कोई और गंभीर बीमारी है तो पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूरी है। शुरुआत में छोटे-छोटे फास्ट रखें, जैसे 12 घंटे का, और धीरे-धीरे इसे 14 या 16 घंटे तक बढ़ाएँ। इस दौरान पानी, हर्बल चाय या नींबू पानी बिना चीनी के ले सकते हैं। जब खाना खाएँ तो उसमें सब्जियाँ, प्रोटीन और हेल्दी फैट ज़रूर शामिल करें। बहुत तला-भुना या मीठा खाने से बचें। साथ ही, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद भी इस प्रोसेस को सफल बनाते हैं।

