Overview:स्तनों में महसूस होने वाली गांठ हमेशा कैंसर नहीं होती, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है।
स्तनों में महसूस होने वाली गांठ हमेशा कैंसर नहीं होती, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर जांच, सही निदान और आधुनिक उपचार से यह समस्या पूरी तरह सुरक्षित रूप से ठीक की जा सकती है।
Breast Cancer during Pregnancy: गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान अगर ब्रेस्ट में कोई भी बदलाव या समस्या महसूस हो, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। वैसे तो यह बहुत कम होता है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर स्थिति होती है, और समय पर इलाज ना हो तो जोखिम बढ़ सकता है।
इस बीमारी को मेडिकल भाषा में Pregnancy-associated Breast Cancer (PABC) कहा जाता है। यह आमतौर पर आक्रामक होता है, यानी तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए डिलीवरी के बाद तक इंतजार करना या स्तनपान के खत्म होने तक इलाज टालना सही नहीं होता।
आंकड़ों की बात करें तो ये स्थिति हर 3000 में से एक गर्भवती महिला को प्रभावित करती है। 45 साल से कम उम्र की महिलाओं में होने वाले कुल ब्रेस्ट कैंसर मामलों में से करीब 7% ऐसे ही केस होते हैं। 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में ये आंकड़ा 10% और 35 साल से कम में 15.6% तक पहुंच जाता है।
गर्भावस्था में ब्रेस्ट में गांठ क्यों है चिंता की बात?

गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं, खासकर ब्रेस्ट में। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हर बदलाव सामान्य ही हो।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ब्रेस्ट में कोई नई या अजीब सी गांठ महसूस हो, तो उसे अनदेखा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
एक रिसर्च में पाया गया कि गर्भवती महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पहला लक्षण लगभग सभी मामलों में खुद महसूस की गई गांठ ही थी। इसके अलावा त्वचा का मोटा होना, निपल से खून या पस जैसा डिसचार्ज होना भी लक्षण हो सकते हैं।
जब कैंसर का पता चलता है, तब तक अक्सर लिम्फ नोड्स (बगल की गांठें) भी प्रभावित हो चुकी होती हैं।
जल्दी जांच और सही इलाज क्यों जरूरी है?
गर्भावस्था के दौरान ब्रेस्ट के टिशू में नेचुरल बदलाव होते हैं, जिससे कभी-कभी कैंसर की पहचान देर से होती है। इससे इलाज मुश्किल हो सकता है।
इसलिए जल्दी जांच और डायग्नोसिस बेहद ज़रूरी है।
सुरक्षित जांच और इलाज के विकल्प
अगर डॉक्टर को गांठ संदिग्ध लगे, तो सबसे पहले ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड की सलाह दी जाती है यह जांच गर्भावस्था में सुरक्षित होती है और गांठ का सही प्रकार (साधारण या कैंसर) बता सकती है।
कई बार बायोप्सी की भी ज़रूरत पड़ती है, जो सुरक्षित तरीके से की जा सकती है।
कौन-सा इलाज दिया जाएगा
ये गर्भावस्था के महीने और कैंसर के स्टेज पर निर्भर करता है।
सर्जरी (ऑपरेशन) सभी ट्राइमेस्टर में सुरक्षित मानी जाती है।
कीमोथेरपी दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में दी जा सकती है, लेकिन पहले ट्राइमेस्टर में इससे बचा जाता है क्योंकि इससे भ्रूण को नुकसान हो सकता है।
रेडिएशन, हार्मोन और टारगेटेड थेरेपी आमतौर पर डिलीवरी के बाद दी जाती हैं।
मानसिक और भावनात्मक सहयोग भी ज़रूरी है
गर्भावस्था के दौरान कैंसर का पता चलना मानसिक रूप से बहुत भारी हो सकता है। डर, चिंता, और तनाव ये सब होना स्वाभाविक है।
इसलिए डॉक्टर सुझाव देते हैं कि साइकॉलजिकल काउंसलिंग और सपोर्ट ग्रुप्स का सहारा लिया जाए, ताकि महिला को मानसिक मजबूती मिल सके।
गर्भवती महिलाओं के लिए ज़रूरी बातें:
गांठ को नज़रअंदाज़ न करें: ब्रेस्ट में कोई भी नई या अलग सी गांठ लगे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
जल्दी जांच कराएं: समय पर अल्ट्रासाउंड और बायोप्सी से बीमारी जल्दी पकड़ी जा सकती है
इलाज संभव है: गर्भावस्था के दौरान भी सर्जरी और कीमोथेरपी की जा सकती है, बस सही प्लानिंग ज़रूरी है
भावनात्मक सपोर्ट लें
मानसिक मजबूती के लिए काउंसलिंग बहुत मददगार हो सकती है, हालांकि गर्भावस्था के दौरान ब्रेस्ट कैंसर एक दुर्लभ स्थिति है, लेकिन समय पर पहचान और सही कदम उठाने से मां और बच्चे, दोनों का बेहतर इलाज और सुरक्षित भविष्य संभव है।
डॉक्टरों की यही सलाह है कि अगर आपको कुछ भी असामान्य लगे, तो अपने इंट्यूशन पर भरोसा करें और फौरन मेडिकल सलाह लें। ध्यान रखें, सही समय पर किया गया इलाज ज़िंदगी बचा सकता है।
Input – डॉ. पुष्पिंदर गुलिया, डायरेक्टर – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, सीके बिरला हॉस्पिटल, गुरुग्राम
