Ayurvedic Tridosha: आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर पंचभूत तत्वों से बना है। ये पांच प्राकृतिक तत्व- आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी हैं। जिनके असंतुलन या विकार होने से शरीर में वात, पित्त और कफ दोष उत्पन्न होते है जो विभिन्न बीमारियों का कारण बनते हैं। देखा जाए तो सिर से लेकर छाती के बीच जितने रोग होते हैं, वो सब कफ बिगड़ने के कारण होते हैं। छाती के बीच से लेकर पेट और कमर के आखिर तक जितने रोग होते हैं, वो पित्त बिगड़ने के कारण होते हैं। और कमर से लेकर घुटने और पैरों के आखिर तक के रोग वात दोष के कारण होते हैं।

शरीर के विभिन्न अंगों में होने वाला दर्द या रुजा भी है। शरीर के दर्द के इलाज के लिए आयुर्वेद में पहले उससे जुड़े दोष को पहचान कर ठीक करने का प्रयास किया जाता है जिससे काफी हद तक आराम भी मिलता है।
वात (वायु) दोष

वायु हमारे पूरे शरीर में प्रवाहित होती है और शरीर को नियंत्रित करती है। यह हमारे श्वसन-तंत्र, ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम, नर्वस सिस्टम और उत्सर्जन सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है। जब इस वायु के प्रवाह में कोई बाधा आती है, तो यह शरीर में एक जगह इकट्ठी होनी शुरू हो जाती है और कई तरह की बीमारियों को जन्म देती है।
लक्षण
व्यक्ति को कमजोरी या थका महसूस होना, नींद न आना, सिर में भारीपन-दर्द होना, पेट में सूजन , गैस्ट्रिक अम्ल, कब्ज की शिकायत होना, ब्लड प्रेशर होना, पैरों की मसल्स में दर्द होना, हाथ-पैर सुन्न होना, शरीर में ड्राइनेस आना, हड्डियों में फ्रैक्चर होनेेे का खतरा होना।
कारण
- भोजन में गोभी, भिंडी, राजमाह, सफेद चने, उड़द दाल,चावल जैसे शुष्क प्रकृति की चीजों, जंक और फास्ट फूड का अधिक सेवन।
- खाने में रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल ज्यादा करना।
- देर रात तक काम करना।
- तनावग्रस्त रहना।
- अपच जैसे पेट संबंधी विकार होना।
उपचार
- पेट संबंधी विकारों के लिए टिंडा, घिया, तौरी जैसी हल्की और सुपाच्य सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें।
- हींग का प्रयोग अधिक करें। चाहें तो गरिष्ट भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ 2 ग्राम हींग को फांकें।
- 1ः1ः1/2 के अनुपात में जीरा, धनिया और सौंफ लें। इन्हें 2 गिलास पानी में तब तक उबालें, जब तक कि पानी एक चौथाई न रह जाए। ठंडा होने पर पिएं।
- एक गिलास गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलाकर रात को सोने से पहले लें।
- रात को सोने से पहले गर्म दूध के साथ 2 टेबल स्पून केस्टर ऑयल का सेवन करने से कब्ज या पेट संबंधी विकारों मे आराम मिलेेगा।
- नहाने से पहले तिल, सरसों के तेल से शरीर की मालिश करें।
पित्त दोष

शरीर में मौजूद पंचभूत तत्वों में अग्नि और जल के गड़बड़ा जाने से पित्त दोष होता है, जिसकी मात्रा बढ़ जाने से भी शरीर में दर्द होता है।
क्या है लक्षण
पेट में गैस बनना या एसिडिटी होना, उल्टियां आना, आंखों- हथेलियों-तलवों में जलन होना, बहुत ज्यादा दुर्गन्धयुक्त पसीना आना, शरीर में दाने या रैशेज होना, लगातार सिरदर्द बने रहना जो दिन के समय ज्यादा बढ़ जाता हो, यूरिन इंफेक्शन होना, बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होना और पेशाब में जलन होना, भूख न लगना, पाचन संबंधी गड़बड़ी होना।
कारण
- जंक, फास्ट फूड या अत्यधिक मिर्च-मसाले युक्त भोजन का अधिक सेवन।
- गर्म वातावरण मेें काम करना।
- अत्यधिक मात्रा में चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स पीना।
- एल्कोहल, शराब पीना या स्मोकिंग करना।
- दिन में लिए जाने वाले भोजन के बीच बहुत गैप होना या भोजन समय पर न करना।
उपचार
- नारियल पानी पिएं।
- रोजाना सुबह खाली पेट करीब 1 चम्मच सफेद मक्खन खाएं।
- नाश्ते में 1 गिलास दूध पिएं।
- मिर्च-मसालेदार भोजन से परहेज करें।
- रात में आधे गिलास पानी में 1/2 टेबल स्पून धनिया पाउडर मिलाकर रखें। सुबह छान कर पानी पिएं।
- खाना खाने के बाद 1/2 टेबल स्पून सौंफ और 1/2 टेबल स्पून मिश्री मिला कर खाएं।
- दिन में कम से कम 2 सर्विंग केला, अनार, सेब जैसे फल लें। एसिडिटी हो, तो नींबू, संतरा , कीनू जैसे खट्टे फलों का सेवन न करें। ठंडी तासीर वाले गन्ने का जूस पीने से आराम मिलेगा।
- सुबह खाली पेट कच्चा आंवला या 2 टेबल स्पून आंवला रस का सेवन करें।
- एसिडिटी में केला खाएं या ठंडा दूध पिएं।
कफ दोष

कफ धातु या शरीर में मौजूद तरल में असंतुलन होने पर कफ दोष होता है। यह कफ या साइनोवियल तरल शरीर के संधि-स्थलों या जोड़ो (जॉइंट्स) मे मौजूद होता है। आहार-विहार की गलत आदतों के कारण इस तरल में इज़ाफा होता है, जिससे साइनस और कंजेशन हो जाता है। शरीर में कफ दोष होने पर जोड़ों में मौजूद साइनोवियल तरल की कमी भी हो जाती है और वायु दोष बढ़ जाता है। इससे कंजेशन से आर्थराइटिस, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं भी पैदा हो जाती हैं।
लक्षण
हाथ-पैरों और जोड़ों में जकड़न और दर्द होना, मौसमी बदलाव होने पर एलर्जी का शिकार होना, सिर में भारीपन, साइनसाइटिस के कारण ब्लॉक नाक या कफ से बहती नाक, सांस लेने में कठिनाई होना, आंखों से पानी आना और जलन होना, वजन बढ़ना।
कारण
- बार-बार खाने की आदत, जंक फूड या वसायुक्त आहार का अधिक सेवन करना।
- दिन के समय सोने की आदत होना।
- आरामतलब होना, नियमित तौर पर वॉक करने या एक्सरसाइज न करना।
- ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक अधिक पीना।
- बहुत लंबे समय तक ठंडी जगह रहना।
उपचार
- रोजाना 3-4 किलोमीटर वॉक करें।
- सुबह खाली पेट 3-4 गिलास गर्म पानी पिएं।
- दिन में सुबह-शाम खाली पेट 1/2 गिलास गर्म पानी में 2 टेबल स्पून ऐलोवेरा जूस पिएं।
- भोजन के बाद 1/2 गिलास पानी में 2 चम्मच अदरक का जूस, 2-4 काली मिर्च के दाने, 1/2 टेबल स्पून धनिया पाउडर, 1/2 टेबल स्पून जीरा उबाल कर और छान कर पिएं।
- खाना हबड़ादबड़ी में न खाकर, चबा-चबा कर और आराम से खाएं।
- खाने के साथ पानी या कोल्ड ड्रिंक न पिएं।
- रात को सोने से पहले अदरक और नींबू मिलाकर बनी ग्रीन टी पिएं।
- नहाने से करीब 30 मिनट पहले तिल या सरसों के तेल से अपने शरीर की मालिश करें।
(डॉ संजना शर्मा, आयुर्वेदिक चिकित्सक, दिल्ली )
