महिलाओं के अंदर कोई भी कार्य करने की भरपूर क्षमता है और इसे हर एक महिला को उपयोग करना चाहिए।’ कल्पना मोरपरिया, कंट्रीहेड महिलाएं यदि गृहस्थी संभालती हैं तो उनकी जिम्मेदारी घर के सभी सदस्यों की जरूरतों को पूरा करना और उनका ध्यान रखने की होती है और यदि वह आॉफिस गोइंग वुमेन है, तो घर के साथ-साथ आफिस की भी जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं। इस तरह से घर और आॉफिस में बेहतर तालमेल बिठाने के चक्कर में कई बार महिलाएं खुद के लिए समय नहीं दे पातीं। जबकि सही मायने में खुश रहने के लिए जरूरी है कि हर महिला अपनी दिनचर्या से खुद के लिए कुछ समय निकालें।
समय के अभाव और पारिवारिक जिम्मेदारी के चलते अक्सर महिलाएं खूबसूरती को नजरअंदाज करती हैं जिसकी वजह से वह समय के पहले ही उम्रदराज दिखने लगती है। इसके अलावा वह अपने खानपान और स्वास्थ्य पर भी ध्यान नहीं देती है। जिसकी वजह से अनेक प्रकार की समस्याओं से पीड़ित हो जाती हैं। मनुष्य के शरीर को यदि हम एक बहुत ही उच्चकोटि की मशीन समझें तो शायद इसका रखरखाव भी हमें समझ में आ जाएगा। कोई भी मशीन जब नई होती है तो सामान्यतः उसमें कोई बुनियादी समस्या नहीं आती। वो खूब चुस्ती से काम करती है और उसकी समस्याएं सिर्फ काम से संबंधित या उपरी होती हैं।ऐसे ही हमारा शरीर है इसे यदि समय से सही पोषण नहीं दिया जाए तो शरीर कमजोर हो जाता है। ऐसे में जरूरत होती है नियमित देखभाल की। महिलाएं यदि अपने लिए समय नहीं निकालती हैं, समय पर खानपान नहीं करती हैं, उचित पोषण नहीं लेती हैं, पर्याप्त मात्रा में आराम व नींद नहीं लेती हैं तो आगे चलकर अनेक प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त हो सकती हैं।
शरीर की देखभाल
स्त्री शरीर और पुरूष शरीर में मूल अंतर प्रजनन तंत्र का होता है। उनकी संरचना ही नहीं कार्य भी भिन्न होते हैं। शरीर में उत्सर्जित होने वाले हार्मोंस के कारण स्त्री जननांगों में प्रतिमाह व प्रति गर्भावस्था एवं प्रसव काल में परिवर्तन आते रहते हैं। इसके कारण वक्ष एवं गर्भाश्य मुख कई रोगों विशेषतः कैंसर के खतरे में घिरते हैं। इनके बचाव या जल्दी पकड़ में आ जाने के लिए आवश्यक है कि वक्षस्थल की चिकित्सकीय जांच, अल्टृ्रासाउंड एवं मैमोग्राफी करवाई जाए। मासिक स्त्राव के दौरान भी अपना हिमोग्लोबिन चैक करवाना जरूरी है व समय-समय पर अपनी सभी जाचें करवा लें ताकि रोगों का समय पर पता चल सके और स्वस्थ जीवन की राह चुनें।
अंग फेल होना
प्रति वर्ष कम से कम एक बार यदि ब्लड यूरिया व सीरम क्रियाटिनिन की जांच करवाई जाए, तो गुर्दे स्वस्थ व सामान्य है अथवा नहीं, इसका पता चल जाता है। रक्त में विभिन्न प्रकार की वसाओं की मात्रा दिखाने वाले जांच समूह को ‘लिपिड प्रोफाइल’ कहते हैं। और 40 वर्ष की आयु के पश्चात् तो इस जांच को प्रतिवर्ष करवाना ही चाहिए। यदि लिपिड प्रोफाइल में विसंगति आए, तो उचित परहेज, व्यायाम आदि एवं अन्य सलाह चिकित्सक से लेकर स्वस्थ रहने का प्रयास हर महिला को करना चाहिए।
यकृत यानी लिवर की जांच
यकृत यानी लिवरकी भी समय-समय पर जांच होनी चाहिए। इसके फेल होते ही शरीर के अन्य अंग भी ताश के पत्तों की तरह लुढ़कने लगते हैं। लिवर के स्वास्थ्य के लिए हमें लिवर फंक्शन टेस्ट समूह की जांच करवानी चाहिए। सीरम बिलीरूबिन, एस.जी.ओ.टी व एस.जी.ओ.टी. व एस.जी.पी.टी. इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं। तो समय रहते हुए ही उसकी इलाज कराना गुणवतापूर्ण दीर्घ आयु के लिए आवश्यक है।
खानपान पर ध्यान दें
अच्छी सेहत के लिए अपने भोजन पर ध्यान भी बहुत जरूरी है आपके भोजन में सभी आवश्यक तत्व होने जैसे विटामिन, कैल्शियम, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइटेड, जल, व खनिज लवणों की उचित मात्रा हो कैल्शियम एक ऐसा तत्व है, जो कि रजोनिवृति समय के आसपास की महिलाओं में कम होते-होते उनकी हड्डियों पर दुष्प्रभाव डालता है और आॉस्टियोपोरोसिस को जन्म देता है। 40-45 वर्ष के उपरान्त सीरम कैल्शियम जांच साल में कम से कम एक बार करवाना आवश्यक है।
बढ़ती उम्र में देखभाल
जैसे-जैसे आयु बढ़ती है शरीर रूपी मशीन के पुर्जे उतनी चुस्ती से कार्य नहीं कर पाते हैं। उदाहरण के लिए फिल्टिरेशन के कम सक्षम हो जाने से शरीर में विभिन्न इलैक्टिरोलाइट की मात्रा में विसंगतियां पैदा होती है । इसके कारण गहरी बेहोशी या दिमाग पर असर भी पड़ सकता है। तो 60 वर्ष की उम्र तक सभी जांच करवा लें ताकि आप स्वस्थ रह सकें और अपने डाक्टर अनुसार ही दवाईयां लेना ही उचित है।
