पहले छह महीने मां के दूध और छह महीने बाद मां के दूध के साथ ठोस आहार उसके शरीर की नींव बनाते हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि शिशु को कैसा आहार दिया जाए ताकि वह दिमाग से भी दुरुस्त रहे।
कैसी हो शिशु की खुराक
मांओं को ध्यान रखना चाहिए कि शिशु के पेट का आकार वयस्क के पेट से 5 गुना छोटा होता है। ऐसे में जरूरी है कि शिशु को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिलें। अगर आपको लगता है कि घर के खाने से आपके शिशु को आयरन, जिंक और विटामिन पूरी तरह नहीं मिल पा रहे तो आप फोर्टीफाइड या सप्लीमेंट जैसे आहार भी दे सकती हैं।
आज के वक्त में मां अपने बच्चों के मोटापे या हाइट जैसी बातों का बहुत ज्यादा ध्यान रखती है। उसे लगता है कि अगर बच्चा मोटा नहीं है और कद बढ़ रहा है तो वह सेहतमंद है। लेकिन मां होने के नाते आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि बच्चे का सिर्फ ऊपरी शरीर स्वस्थ होना ही काफी नहीं है बल्कि उसका दिमाग सेहतमंद होना भी जरूरी है। दरअसल शिशु के जन्म के साथ ही फांउडेशन तैयार होना शुरू हो जाता है। पहले छह महीने मां के दूध के साथ और छह महीने बाद मां के दूध के साथ ठोस आहार उसके शरीर की नींव बनाते हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि शिशु को कैसा आहार दिया जाए ताकि शरीर के साथ दिमाग से भी दुरूस्त रहे। शिशु के शरीर और दिमाग दोनों की सेहत के लिए शिशु के आहार में पोषक तत्वों जैसे कि माइक्रोन्यूट्रियंट और मैक्रोन्यूट्रियंट दोनों का सही मात्रा में होना जरूरी है। तो आइये जानते हैं, शिशु को आप कैसा आहार दें ताकि उसका बचपन हंसते, मुस्कुराते व खेलते हुए बीते।
जरूरी पोषक तत्वों की जानकारी
मैक्रोन्यूट्रियंट आहार में प्रोटीन, फैट और काब्रोहाईड्रेट जैसे तत्व शामिल हैं, जो शिशु के शरीर को मजबूती देते हैं। इसकी वजह से बच्चों को खेलने की ऊर्जा मिलती है। माइक्रोन्यूट्रियंट जैसे मिनरल्स (आयरन, फोलिक एसिड और जिंक इत्यादि) व विटामिंस शिशु के दिमागी विकास और इम्युनिटी के लिए जरूरी हैं। शिशु को प्रोटीन, फैट और काब्रोहाईड्रेट तो रोजाना चपाती, चावल, दूध और घी आदि से मिल जाता है लेकिन माइक्रोन्यूट्रियंट की कमी रह जाती है। अगर आपका शिशु बार-बार बीमार होता है तो उसमें इम्युनिटी की कमी है जो जिंक से मिलती है, वहीं बच्चों के दिमागी विकास के लिए आयरन जरूरी है। मां के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि मां के दूध में सभी पोषक तत्व होते हैं, लेकिन आयरन नहीं होता। शुरूआती छह महीने जब शिशु मां के दूध पर निर्भर होता है तो वह अपने शरीर में जमा आयरन से उसे पूरा कर लेते हैं, लेकिन छह महीने बाद शिशु के आयरन को आहार से पूरा किया जाना जरूरी होता है।
शुरूआती 1000 दिन हैं खास
शिशु के शुरूआती 1000 दिन उसकी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण दिन होते हैं, क्योंकि पहले साल ही शिशु का वजन तीन गुना बढ़ता है तो ऊंचाई में भी डेढ़ गुना बढ़ जाती है। जब शरीर बढ़ता है तो जाहिर है दिमाग का विकास कैसे पीछे रह सकता है। दो साल तक बच्चे का दिमागी और मानसिक विकास 80 फीसदी तक हो जाता है। इसलिए समय पर बच्चे को संतुलित आहार देना बहुत जरूरी है।
शाकाहारी परिवारों में पोषण
हमारे घरों में गेहूं, चावल या मकई जैसा खाना ज्यादा खाया जाता है और यही आहार शिशु को भी दिया जाता है, लेकिन बच्चों को दाल का पानी, हरी सब्जियां, टोफू, फल इत्यादि नियमित रूप से नहीं दे पाते। इस उम्र में बच्चों के पोषक तत्वों की डिमांड बढ़ जाती है, जो अकसर पूरी नहीं हो पाती। समस्या यह भी है कि अगर शिशु का शारीरिक विकास न हो तो अभिभावकों को तुरंत इसका पता चल जाता है लेकिन दिमागी विकास दिखाई नहीं देता, तो इसका पता लगाना मुश्किल होता है। इसलिए शिशुओं को शुरूआत से ही माइक्रोन्यूट्रियंट से युक्त खुराक दें।

लेखिका न्यूट्रिशनिस्ट व डोंट डाइट! 50 हैबिटस ऑफ थिन पिपल की लेखिका हैं।
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