ग्लोबल वार्मिंग कहें या प्रदूषण को इसके लिए जिम्मेदार ठहराएं, दिल्ली में इस बार सर्दी उस तरह नहीं पड़ी जैसी कि पिछले सालों से पड़ती रही थी। लेकिन जनवरी में जाते-जाते एक कोल्ड वेव ऐसी आई कि अनेक बुजुर्गों को अपने साथ ले गई। अचानक ही ऐसे अनेक लोगों की मौत की खबर दिल को दहला गई, जो बीमार भी नहीं थे। मेरे पिता की मृत्यू भी सर्दियों की ऐसी ही एक सुबह हुई थी। हमारे बुजुर्ग हमारे लिए बहुत बड़ी नियामत होते हैं। उन्होंने हमारे लिए जो भी किया है, अगर उसको याद करें तो हम शायद कभी भी उसकी बराबरी न कर सकें, इसलिए अपनी ओर से जितना हो सके, उतना ध्यान बुजुर्गों का रखना चाहिए।

किसी भी अस्पताल में जाकर देखें तो पाएंगे कि वहां सबसे ज्यादा भीड़ बुजुर्गों की ही है। इस मौसम में सामान्य रोगियों की संख्या तो घट रही है लेकिन गंभीर रोगियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। बुजुर्ग सर्दी में अक्सर सांस नहीं आने की शिकायत करते हैं जिसका कारण ज्यादातर दिल की समस्या या दमे का अटैक होता है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में पडऩे वाला कोहरा दमा रोगियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। अस्पतालों में वृद्ध रोगियों की संख्या में 25 फीसदी इजाफा हो गया है। उधर हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि हार्ट फेल के मामले भी सर्दियों में काफी बढ़ जाते हैं। सर्द मौसम हार्ट अटैक के अलावा स्ट्रोक और निमोनिया का खतरा भी कई गुना बढ़ा देता है।

ऐसे मौसम में लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए। हृदय रोगियों खासतौर से बुजुर्गों को छाती में दर्द हो तो डॉक्टर को दिखाएं। खानपान में सावधानी बरतें, तली चीजों का परहेज करें। हृदय रोगों के लिए नियमित जांच कराएं और नियमित दवा दें। सांस फूलने, बाये कंधे, हाथ या सीने में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। हृदय और किडनी के रोगी तरल पदार्थों की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।

सर्दियों में बुजुर्गों को हाइपोथर्मिया का खतरा काफी बढ़ जाता है, जिसका कारण सिर्फ सर्दी से पर्याप्त बचाव के अलावा बुजुर्गों के क्रियाकलापों का कम हो जाना और ली जा रही दवाओं के दुष्परिणामों की सही जानकारी न होना होता है। हाइपोथर्मिया में शरीर अचानक ठंडा पड़ जाता है और बेहोशी के साथ साथ हृदय गति धीमी हो जाती है। हाइपोथर्मिया बुजुर्गों के लिए जानलेवा हो सकता है। इससे बचने के लिए वृद्धजन घर से बाहर निकलने से बचें और यदि बाहर जाना अत्यधिक आवश्यक हो तो निकलते समय कई लेयर्स में ऊनी कपड़े पहनें। धूप निकलने के बाद ही धीरे-धीरे सैर करें। इसके अलावा गर्म पेय का अधिक सेवन करें।

कई बार तेज ठंड के कारण पैरों और हाथों की अंगुलियां नीली पड़ जाती हैं और उनमें दर्द और खुजली होती है। इससे बचने के लिए मोजे और दस्ताने पहनने बेहद जरूरी होते हैं। समस्या बढऩे पर गर्म पानी से सिकाई करें लेकिन ध्यान रहे कि पानी अत्यधिक गर्म न हो, नहीं तो यह समस्या घटने के बजाय बढ़ जाती है।

सर्दियों में प्रदूषण और कोहरे के बढऩे से दमा यानी अस्थमा के रोगियों को अटैक पडऩे की आशंका भी बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए सर्दी की शुरूआत में ही अपने डॉक्टर के पास जाकर दवा की उचित मात्रा पूछ लें और सर्दी के लिहाज से क्या सावधानी और परहेज बरतना है, निश्चित कर लें। सांस के रोगी कोहरे में निकलने से बचें और विशेष रूप से एलर्जी वाली जगहों पर न जाएं। हर समय दवा या इन्हेलर अपने पास रखें। सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। बुजुर्ग हृदय रोगी सुबह की सैर एकदम बंद कर दें। ठंड में जल्दी सो जाएं और देर से उठें। गर्म कपड़े पहनें और कानों को अवश्य ढक कर रखें। बुजुर्गों की दवा के बारे में घर में रहने वाले सभी सदस्यों को पता होना चाहिए। खाने में हल्दी, अदरक, तुलसी, काली मिर्च और केसर जैसी गर्म चीजों का अधिक प्रयोग करें।

इसके अलावा सामान्य रूप से भी बुजुर्गों को सर्दियों से बचाने के लिए कमरे का तापमान 18 से 22 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रखें। इसके लिए हीटर में या दीवार पर थर्मामीटर का होना जरूरी है। अगर बिजली चली गई है तो किसी अन्य तरीके से कमरे को गर्म रखें। साथ ही साथ यह भी ध्यान रखें कि अगर आपने कमरे को अंगीठी या किसी ऐसे ईँधन से गर्म किया है जिसमें धुआं होता हो तो धुएं को बाहर निकालने के लिए खिड़की या दरवाजा हल्का सा खुला रखा जाए और ड्रायनेस न हो, इसके लिए किसी चौड़़े खुले बर्तन में पानी भरकर वहां रखें। कमरे को गर्म करना बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य का मामला मानकर चलें न कि लग्जरी यानी आराम का मामला। फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार व्यायाम करें। बुजुर्गों को फ्लू और निमोनिया का टीका लगवाएं।

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