नोवेल कोरोना वायरस यानी कोविड19 दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे जुड़ी छोटी हर एक जानकारी पर जहां लोगों की निगाहें बनी हुई हैं, वहीं लोग इस बार में भी जानने इच्छुक हैं कि आखिर कोविड19 नाम के पीछे का मतलब क्या है?
क्या है मतलब कोविड19 का
पहला मामला जब चीन में दिसंबर के अंत में आया तो इसे कोराना वायरसके रूप में जाना गया । वैज्ञानिकों ने इसका नाम 2019-nCoV दिया। 2019 इसलिए क्योंकि वह उस साल पैदा हुआ। नया वायरस होने से नोवेल और कोरोना फैमिली से होने पर CoV नाम दिया गया। इस तरह से कोविड-19 कोरोना वायरस डिजिज 2019 के नाम से जाना जाने लगा ।
किसी देश को कलंकित नहीं किया जाना चाहिए
जब चीन में कोरोना का पहला केस आया था तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘चीनी वायरस’ बुलाया था जिसके बाद WHO और यूनिसेफ ने भी उन्हें कहा था कि किसी वायरस की कोई नागरिकता नहीं होती और किसी देश को कलंकित नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि (WHO) ने इसे कोविड-19 नाम दिया और इसके महत्व के बारे में बताया। WHO के चीफ ने कहा कि हम इस बात का ध्यान रखना चाहते थे कि इसका नाम ऐसा न रखा जाए जिससे कोई कलंकित हो। WHO चीफ ने कहा, ‘दरअसल, नाम रखने के पीछे यह वजह है ताकि किसी और नाम का इस्तेमाल न हो, जो कि अनुचित और किसी को कलंकित करने वाला हो सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘भविष्य में किसी भी तरह के कोरना वायरस का मामला आता है तो वह उसके लिए स्टैंडर्ड फॉर्मैट होगा।’
