दुनिया के लिए नया खतरा है कोरोना वायरस

पिछले महीने चीन में कोरोना वायरस ने भयंकर आतंक फैलाया था। इसकी चपेट में केवल चीन ही नहीं बल्कि जापान, थाइलैण्ड यहां तक कि भारत के भी कुछ नागरिक आए थे। कोरोना वायरस कई किस्म के होते हैं मगर इनमें से छह को ही लोगों को संक्रमित करने के लिए जाना जाता था। मगर नए वायरस का पता लगने के बाद यह संख्या बढ़कर सात हो चुकी है। इस नए वायरस के जेनेटिक कोड के विश्लेषण से यह पता चलता है कि यह मानवों को संक्रमित करने की क्षमता रखने वाले अन्य कोरोना वायरस की तुलना में ‘सार्स’ के समान है। इस वायरस को काफी खतरनाक माना जाता है। इसके कारण चीन में साल 2002 में 8,098 लोग संक्रमित हुए थे जिनमें से करीब 774 लोगों की मौत हो गई थी। कोरोना वायरस के कारण अमूमन संक्रमित लोगों में सर्दी-जुकाम के लक्षण नजर आते हैं लेकिन असर गंभीर हो तो मौत भी हो सकती है। ये जीवों की एक प्रजाति से दूसरे प्रजाति में जाते हैं और फिर इंसानों को संक्रमित कर लेते हैं, इस दौरान इनका बिल्कुल पता नहीं चलता। नॉटिंगम यूनिवर्सिटी के वायरोलॉजिस्ट प्रोफेसर जोनाथन बॉल के मुताबिक यह बिल्कुल ही नई तरह का कोरोना वायरस है, बहुत हद तक संभव है कि पशुओं से ही इंसानों तक पहुंचा हो। कुछ शोधों से यह पता चला है कि यह वायरस मीट के होल सेल मार्केट पोल्ट्री फार्म, सांप, चमगादड़ अथवा अन्य फार्म जानवरों से मनुष्य में आया है। चीन के कई शहरों में इस वायरस से सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है।

बच्चों को सिखाएं योग

बच्चों के भविष्य को बनाने में शिक्षा, संस्कार और सेहत अहम भूमिका निभाते हैं। पहली दो जरूरतों को पूरा करने में मां-बाप कोई कमी नहीं छोड़ते लेकिन अकसर सेहत के मामले वे केवल पौष्टिक खान-पान तक ही सोच पाते हैं। जबकि यह सर्वविदित है कि एक बेहतर, स्वस्थ शरीर के लिए योग से अच्छा उपाय कुछ भी नहीं है। अगर आप अपने बच्चों को बचपन से ही योग सिखाएं तो यकीनन वे दीर्घायु और आमजन की तुलना में ज्यादा स्वस्थ रहेंगे। हालांकि आज के दौर में युवाओं में जिम और डायट का काफी प्रचलन है लेकिन इसके कारण उनके शरीर में प्राय: अन्य कई प्रकार के विकार आ जाते हैं। वहीं योग अपनाने से उनके शरीर के विभिन्न अंग न केवल सुचारू रूप से कार्य करते हैं बल्कि मोटापे, अवसाद, श्वास समस्या जैसे आम होते जा रहे रोगों से भी कोसों दूर भी रहते हैं। 

देर रात तक स्मार्टफोन पर वीडियोज देखना है कई समस्याओं की जड़

आजकल बच्चों के हाथ में किताब से पहले ही स्मार्टफोन आ जाता है। यहां तक कि पढ़ने के लिए भी वो किताब के बजाय मोबाईल का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। और हाल ही के दिनों विभिन्न ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग मंचों के अस्तित्व में आने के बाद तो अब लोग घंटों तक स्क्रीन पर एकटक नजर गड़ाए रखते हैं। नेटफ्लिक्स, अमेजॉन, हॉटस्टार, यूट्यूब, टिक-टॉक जैसी एप्प पर वीडियो देखते हुए लोग अपना पूरा का पूरा दिन निकाल देते हैं। हाल ही में हुई एक रिसर्च में इस से जुड़ी एक बेहद चिंताजनक बात सामने आई है। रिसर्च के नतीजों के मुताबिक देर रात तक स्मार्टफोन व कम्प्यूटर स्क्रीन पर वेब सीरीज, फिल्म, वीडियो देखने वाले लोगों को कमजोर आंखों, आलस, नींद की कमी जैसी समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। इसके अलावा ये वीडियो देखते समय दर्शकों में जंक फूड खाने की आदत भी बढ़ी है जिसके कारण उनके शरीर पर भी बुरा असर पड़ रहा है। अगर समय रहते इस जीवनशैली को नहीं बदला गया तो यह समाज में व्यापक स्तर पर बुरा असर डाल सकती है।

सावधान, ऑनलाइन शॉपिंग की लत है एक मानसिक रोग!!

आविष्कारों के जहां कई लाभ होते हैं वहीं कई नुकसान भी होते हैं। जिनका खामियाजा अकसर आपको भुगतना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर दूर बैठे लोगों से सम्पर्क स्थापित करने के लिए बनाया गया मोबाईल फोन आपको अपने बगल में बैठे हुए लोगों से जुदा कर गया। और ऐसी ही एक आधुनिक तकनीक है, ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स, जहां आप स्मार्टफोन से लेकर चम्मच तक खरीद सकते हैं। लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च में यह बात सामने आई कि ऑनलाइन खरीददारी करने वाले अधिकतर लागों में भयंकर स्तर पर डिप्रेशन पाया गया। बल्कि खुद यही लोग अपनी इस आदत से छुटकारा पाने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए पहुंचे, और ऐसे 122 व्यक्तियों में 34 प्रतिशत लागों में तो यह लत इस हद तक जड़ें जमा चुकी है कि शॉपिंग न कर पाने पर उन्हें बेचैनी तक होने लगी है। जर्मनी के हैनोवर मेडिकल स्कूल के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि अब समय आ गया है कि बायिंग एण्ड शॉपिंग डिसऑर्डर (खरीद एवं बिक्री विकार) के बारे में गम्भीर अध्ययन किए जाएं वरना यह आने वाले समय में एक बड़ा खतरा बन सकता है। फिलहाल दुनिया के हर बीस में से एक व्यक्ति को यह बीमारी है।     

भारत ने खोजा दुनिया का पहला पुरूष प्रजनन निरोधक

भारत में बढ़ती जनसंख्या की समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है। जहां दुनिया इसपर अंकुश लगाने के तरीके ढूंढ रही है वहीं दूसरी तरफ भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने दुनिया के पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर अंकुश लगाने वाले पहले इंजेक्शन का सफलतापूर्वक क्लीनिकल ट्रायल कर लिया है। अनुसंधान परिषद ने इस पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर अंकुश लगाने वाले इंजेक्शन को अनुमति के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को भेजा है। यह इंजेक्शन 13 सालों तक असरदार रहेगा। इस इंजेक्शन को सर्जिकल नसबंदी के विकल्प के तौर पर बनाया गया है जो पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर अंकुश के लिए दुनिया में इकलौता तरीका है। इस ट्रायल में शामिल रहे एक वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर आरएस शर्मा का कहना है कि यह इंजेक्शन पूरी तरह तैयार है बस केवल ड्रग कंट्रोलर से इसकी अनुमति लिया जाना बाकी है। उन्होंने बताया कि इसका तीन चरणों में ट्रायल हुआ था जिसमें 303 लोगों ने भाग लिया और उन पर इसकी सफलता दर 97.3 फीसदी थी और इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं। इस उत्पाद को दुनिया का पहला पुरुष प्रजनन निरोधक कहा जा सकता है। वहीं, अमरीका और अन्य विकसित देशों में शोधकर्ता ऐसे ही निरोधक पर काम कर रहे हैं।  

प्रिन्स भान