तेज याददाश्त का हमारे जीवन में क्या महत्त्व है इस बात से तो हम सभी परिचित हैं और हम इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते हैं कि अगर किसी व्यक्ति की  याददाश्त कमजोर है तो उसे इस कारण से कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है लेकिन इसमें घबराने की कोई बात नहीं क्योंकि यहां हम आपको जो टिप्स दे रहें हैं उसकी मदद से आप अपने याददाश्त को तेज बना सकते हैं –
 
हर दिन आप अपने लिए कुछ अच्छा और नया सोचें
 
इसके लिए जरूरी है कि आप कुछ नया और रोमांच पैदा करने वाला काम करें, कोई नया भोजन, या नये-नये शौकों को सीखें, नई-नई पहेलियां बनाए और सुलझाएं, नये-नये खेल खेलें, नए साहसिक कार्यों को करें इससे जहां आपको उत्साह, खुशी और आनंद मिलेगा, वहीं आपके दिमाग को भी तरोताजा करेगा। इसके साथ ही मानसिक रूप से चुस्त-दुरुस्त बने रहने के लिए दिमागी कसरत करते रहें। 
 
 
कठिन से कठिन विषयों पर सोचें
 
पूरी दुनिया में हो रही घटनाओं या ज्वलंत समस्याओं पर विश्लेषण और उस पर अपना विचार दें और लोगों की प्रतिक्रियाएं भी लें। माच्यूसेट्स जेनरल अस्पताल के नेचुरल रेमेडाय स्टडीज के डॉयरेक्टर डेविड मिस्कोउलोन का कहना है कि यदि विभिन्न सूचनाओं पर आकलन के लिए सोच विचार किया जाता है तो इससे हमारे मस्तिष्क को बहुत लाभ पहुंचता है, इससे हमारे दिमाग की कसरत हो जाती है।
 

कुछ रचनात्मक करें

 
गायन-वादन, नृत्य, अभिनय व अन्य कलाओं जैसे मूर्तिकला व शिल्प आदि कलाओं के द्वारा एकाग्रता का विकास होता है, अत: तनाव दूर करने तथा अपनी याददाश्त को चुस्त दुरुस्त बनाए रखने के लिए इन कलाओं का सहारा लिया जा सकता है। इसके लिए बड़ा चित्रकार या कलाकार होने की भी जरूरत नहीं। मनमाफिक रंगों द्वारा आड़ी तिरछी रेखाएं खींचकर अथवा गीली मिट्टी से विभिन्न आकृतियां बनाकर हम आसानी से अपनी याददाश्त को चुस्त-दुरुस्त बनाए रख सकते हैं।
 
मछलियां हैं कारगर
 
इंसुलिन ब्रेन को धारदार बनाएं रखने में अहम भूमिका निभाती है। यदि आपका मेमोरी पावर कम हो रहा हो तो आपको इंसुलिन की आवश्यकता है। इसके लिए मछली में सर्वोत्तम भोजन है। इसकी वजह है कि मछली ओमेगा-3 पाया जाता है, जो याददाश्त शक्ति को मजबूती प्रदान करता है इससे इंसुलिन नियंत्रित रहती है। इसके अलावा सरसों तेल और कनोला तेल में भी ओमेगा-3 अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
 
पौष्टिक और कम वसा वाला भोजन लें
 
पौष्टिकता और कम वसा वाले भोजन लेने से अल्जाइमर्स जैसे बीमारी होने का खतरा कम रहता है और दिमाग चुस्त और दुरुस्त रहता है। इसलिए अच्छी याददाश्त के लिए अपने भोजन में ताजा फल एवं सब्जियां, मछलियां और ऑलिव ऑयल आदि को प्राथमिकता के तौर पर शामिल करें।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
अपनाएं चाय-कॉफी
 
चाय कॉफी का सेवन भी हमारी याददाश्त को चुस्त-दुरुस्त रखने में सहायक होता है, अगर शरीर में पॉलीफिनॉल्स की पर्याप्त मात्रा हो तो इससे याददाश्त की कमी का खतरा कम हो जाता है। ताजा अनुसंधानों से ये बात स्पष्ट होती है कि चाय, कॉफी आदि पेय पदार्थ शरीर में पॉलीफिनॉल्स के महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं। इस प्रकार चाय और कॉफी हमारी याददाश्त को चुस्त-दुरुस्त रखने में भी सहायक होती हैं। चाय-कॉफी पीना ही नहीं चाय-कॉफी पीते समय बातचीत करना भी हमारी याददाश्त को चुस्त-दुरुस्त रखने में सहायक होती है। 
 
 
अकेलेपन से बचें
 
बुढ़ापे को दूर रखकर याददाश्त को भी अच्छा रखना है तो अकेलेपन से बचें। सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लें। हर उम्र के व्यक्तियों से विशेष, रूप से बच्चों से संवाद स्थापित करने का प्रयास करें। रिटायरमेंट के बाद या वृद्धावस्था में अत्यंत सक्रिय जीवन व्यतीत कीजिए इससे पूर्ण रूप से स्वस्थ रह सकेंगे। वैसे सक्रिय जीवन से रिटायरमेंट न लेने वाला कभी रिटायर या वृद्ध नहीं होता न ही याददाश्त संबंधी समस्याओं का शिकार होता है।
 

 

ब्रेन एक्सरसाइज

मोबाइल पर उपलब्ध छोटे-छोटे गेम्स भी आपके दिमाग की याददाश्त को बढ़ाते है। आपमें तार्किक और दृश्य शक्ति की भी क्षमता बढ़ती है।
 
नियमित एक सेब का सेवन करें
 
रोजाना सेब का सेवन करने से हम हमेशा न्यूरोलॉजिस्ट से दूर रह सकते हैं, क्योंकि सही मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स सेबों में ही पाए जाते हैं, जो एसिटाइलकोलीन नामक न्यूरो, न्यूरोट्रांसमीटर के लेवल को बढ़ा देते हैं, जो मेमोरी के लिए बेहद जरूरी होता है और उम्र ढ़लने के साथ-साथ शरीर में इसका लेवल भी घटता जाता है। डॉ. शी और डॉ. अमी चान द्वारा किए गए अध्ययन के दौरान देखा गया है जैसे ढ़लती उम्र के साथ इंसान की याददाश्त कमजोर पड़ती है उसी तरह की स्थिति से गुजरने वाले चूहों जब रोजाना सेब का जूस दिया जाने लगा, तो उनकी याददाश्त तेज हो गई। फिलहाल, डॉ. शी रोजाना 2 या 3 सेब खाने या फिर एक गिलास सेब का जूस पीने की सलाह देते हैं।
 
खुलकर हंसे
 
हास्य का भी याददाश्त को चुस्त-दुरुस्त रखने से गहरा संबंध है। हंसने के दौरान हमारे प्रसुप्त ब्रेन सेल्स या न्यूरॉन्स सक्रिय हो जाते हैं और हमारी याददाश्त को तेज करने में सहायता करते हैं। अपनी याददाश्त को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए जब भी मौका मिले खूब हंसें-हंसाएं।