आजकल किशोरियों और महिलाओं में पीसीओडी की समस्या बहुत ही आम होती जा रही है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के अनुसार हर 4 में से एक महिला पीसीओडी की समस्या से पीड़ित है। यह एंडोक्राइन सिस्टम से संबन्धित समस्या है जिसमें महिलाओं के शरीर में मेल हार्मोन या ऐंड्रोजेन्स अधिक मात्रा में स्रावित होने लगते हैं। जिससे शरीर में हार्मोन्स का संतुलन डिस्टर्ब हो जाता है इसका असर एग के विकास पर पड़ता है।

आमतौर पर यह समस्या 30 साल से ऊपर की महिलाओं में पायी जाती थी लेकिन आजकल कम उम्र की लड़कियों में भी यह समस्या देखने को मिल रही है। पीसीओडी (पॉली सिस्टिक ओबेरियन डीसीज) एक ऐसी समस्या है जिसमें ओवरी में गांठ आ जाती है। जिसका परिणाम अनियमित पीरियड्स, इंफर्टिलिटी, मोटापे और कैंसर जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है।

पहचानें इसके लक्षण

PCOD की समस्या होने पर महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। वजन तेजी से बढ़ने लगता है जिससे मोटापे की समस्या भी पैदा हो जाती है। चेहरे और शरीर पर बाल अधिक निकलने लगते हैं। त्वचा संबंधी समस्याएँ जैसे भूरे रंग के चकत्ते का उभरकर आना या बहुत ज्यादा मुहांसों का होना भी इसका लक्षण हो सकता है।

इन पर दें विशेष ध्यान

डाइट को रखें सही :

अधिक जंक फूड, ओइली और तीखा, ज्यादा मीठा और फैट युक्त भोजन खाने से बचें। इस तरह की डाइट शरीर में फैट को बढ़ाती है जो इस समस्या के उत्पन्न होने का एक कारण बन सकता है। इसलिए इस तरह के आहार के बजाय संतुलित डाइट को अपने भोजन में सम्मिलित करें। साथ ही फल और पानी भरपूर मात्रा में ग्रहण करें।

लाइफ स्टाइल बिगड़ने न दें :

देर तक जागना और देर तक सोना, काम के दबाब, तनाव और चिंता के चलते महिलाओं की जीवन शैली में बदलाव आ जाता है। जिसके कारण शरीर में भी बहुत से परिवर्तन होने लगते हैं, यह शरीर में हार्मोन के संतुलन को भी डिस्टर्ब करता है। पीसीओडी से बचने के लिए अपनी दिनचर्या को सही करना बहुत जरूरी है। नियमित एक्सर्साइज़ और उठने- बैठने का क्रम सही करके इस समस्या से बचा जा सकता है।

मोटापा न बढ़ने दें :

ज्यादा जंक और फैटी फूड खाने से और व्यायाम न करने से शरीर में मोटापा बढ़ जाता है। मोटापे के कारण आजकल कम उम्र की बच्चियों में भी इस समस्या के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। पेट में ज्यादा चर्बी जमा हो जाने के कारण ऐस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने से ओवरी में सिस्ट बनने लगता है। जो बाद में समस्या को और भी ज्यादा पेचीदा कर देता है। वजन को काबू में करके इस समस्या से बचा जा सकता है।