मॉनसून आते ही लोगों के खान-पान भी बदल जाते हैं। युवाओं की भीड़ फास्ट-फ़ूड के ठेले (रेहड़ी) पर कम और भट्टो के ठेले पर ज्यादा दिखती है। मक्का कहें या कॉर्न या फिर भट्टा, इसका हर रूप खाने में स्वादिष्टï और सेहत के लिए लाभकारी होता है। अब तो स्वीट कॉर्न और बेबीकॉर्न भी हमारे आम भोजन का हिस्सा बन चुका है। और पॉपकॉर्न के तो कहने ही क्या!   ी के साथ लेने पर खांसी में आराम मिलता है। इससे सांस संबंधी रोगों का भी इलाज संभव है।

  • आयुर्वेद की मानें तो भट्टा  वातकारक और पित्तनाशक है।
  • बच्चों के विकास के लिए भट्टा बहुत फायदेमंद है। ताजे दूधिया मक्के के दानों को पीसकर उसे शीशी में बंद कर धूप में रख दें। जब उसका दूध सूख जाए और शीशी में केवल तेल रह जाए तो उसे छानकर इस तेल से बच्चों के पैरों की मालिश करें। उनके पैर मजबूत होंगे और वो जल्दी चलना शुरू करेंगे। 
  • भट्टो में मैग्नीशियम, आयरन, कॉपर, फॉस्फोरस और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इससे हमारी हड्डिïयां मजबूत बनती हैं। भरपूर मात्रा में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट होने के कारण यह हमें लंबे समय तक ऊर्जावान रखता है।
  • भट्टो का स्टार्च त्वचा के लिए भी गुणकारी है। यह खुजली से राहत देता है। इसके प्रयोग से त्वचा खूबसूरत और मुलायम भी होती है।
  • भट्टो में पाए जाने वाला विटामिन ष्ट, कैरोटिनॉइड तथा बायोफ्लेवनॉइड तत्त्व दिल की बीमारियों की रोकथाम में भी सहायक है।
  • भट्टो को पकाने के बाद उसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स की मात्रा 50′ बढ़ जाती है। यह बढ़ती उम्र को रोकता है। इतना ही नहीं, पके हुए भुट्टïे में फॉलिक एसिड होता है, जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ने में सहायक है। यह लीवर के ट्यूमर्स को भी नष्टï करता है। स्तन कैंसर, लीवर कैंसर के होने की आशंकाओं को काफी हद तक कम करता है।

मक्के के दाने

  • जिन लोगों का वजन सामान्य से कम है, उन्हें अपने आहार में कैलोरी की मात्रा बढ़ाने की आवश्कता है। इसके लिए वे अपने आहार में मक्के को शामिल करें क्योंकि इसके एक कऌप दानों में 130 कैलोरी होती है। लेकिन मोटापे के शिकार व्यक्ति या वजन घटाने को इच्छुक व्यक्ति इसके अत्यधिक सेवन से बचें क्योंकि यह आपका वजन घटाने की बजाय बढ़ा देगा।
  • मक्के का नियमित और संतुलित सेवन कर एनीमिया जैसे रोगों की संभावनाओं को भी कम कर सकते हैं। इसमें एनीमिया विटामिन क्च१२, और फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो लाल रक्त कोशिकाओं के निमार्ण के लिए आवश्यक खनिजों में से एक हैं। इसमें आयरन भी प्रचुर मात्रा में होता है, जो नई लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है।
  • उबला हुआ कॉर्न खाने से भी आयरन की कमी पूरी हो सकती है और आप एनीमिया से बच सकते हैं।
  • मक्के के दाने में कैरोटिनोयाड्स नामक तत्त्व भी पाए जाते हैं, जो हमारी आंखों के रेटिना के लिए लाभदायक है। इससे हमारी आंखों की रोशनी ठीक रहती है। मक्के में मौजूद विटामिन ्र किसी भी प्रकार के दृष्टिïदोष होने से रोकता है।
  • मक्के में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। इसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही प्रकार के फाइबर होते हैं। घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकने में मदद करता है। इसमें अघुलनशील फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, जो हमारे पाचन संबंधी समस्याओं जैसे-कब्ज, बवासीर को दूर करता है। लेकिन इसके अत्यधिक सेवन से बचें क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है जिससे पेट दर्द, अपच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। 
  • यदि आप याद्दाश्त संबंधी किसी रोग से पेरशान हैं, तो मक्के का सेवन करें, विशेषकर अल्जाइमर रोग से ग्रस्त हों तो। थायमिन की कमी से दिमाग में होने वाली कई क्रियाएं बाधित होती हैं, जिनके फलस्वरूप मस्तिष्क संबंधी बीमारी होने की आशंका होती है। अल्जाइमर भी इनमें से एक है। मक्के में थायमिन (विटामिन क्च१) की अच्छी मात्रा होती है, जो मस्तिष्क कोशिका और ज्ञान संबंधी क्रिया को बढ़ाती है।
  • मक्के में ग्लूटेन (लस) नहीं होता। ग्लूटेन का सेवन करने से कई लोगों को पाचन, दस्त, कब्ज, थकान और त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनसे बचने के लिए आप मक्के का सेवन कर सकते हैं।
  • गर्भावस्था में मक्के का सेवन मां और बच्चे दोनों के लिए लाभदायक है। इसमें फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु का वजन कम हो सकता है तथा जन्म के समय तंत्रिका नली में भी नुकसान हो सकता है। यदि उक्त रक्तचाप अथवा हाथ-पैर में सूजन हो तो डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें।
  • यदि मधुमेह के रोगी इसका सीमित सेवन करें तो इससे इंसुलिन की अनुपस्थिति में मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। मक्के के दानों में उपस्थित फाइटोकेमिकल्स उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं।
  • मक्के के दाने को रात भर मिट्टïी के बर्तन में भिंगो कर सुबह इस पानी को छानकर इसमें शहद अथवा मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब में जलन, रूक-रूककर पेशाब आने की समस्या से निजात मिल सकती है और गुर्दे की कमजोरी भी दूर होगी।
  • मक्के के ढेर सारे फायदे तो हैं ही इसके बाल भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। पथरी से बचाव में इसके बाल कारगर हैं। मक्के के बाल को रात भर पानी में भिगोकर सुबह इसे छानकर पीने से पथरी होने से बचा जा सकता है। पथरी के उपचार में मक्के के बाल को पानी में उबालकर बनाए गए काढ़े का प्रयोग होता है।

मक्के का आटा

  • मक्के का आटा भी स्वास्थ्य के लिए ऌफायदेमंद है। पंजाब में मक्के की रोटी और सरसों का साग अत्यंत मशहूर है। वहां का तो यह प्रिय भोजन भी है। टीबी के मरीज या जिन्हें टीबी होने की आशंका हो, उन्हें प्रतिदिन मक्के की रोटी खाना चाहिए। यह टीबी के उपचार में लाभकारी है। 
  • मक्के का आटा लीवर के लिए भी फायदेमंद है। प्रचुर मात्रा में रेशा होने के कारण पाचन क्रिया के साथ ही पेट के कैंसर की संभावना दूर करता है। मधुमेह के रोगियों के लिए भी मक्के का आटा लाभकारी है।
  • यदि आप नियमित रूप से मक्केकी रोटी खाते हैं तो शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। मक्के का आटा आपके शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। इससे कब्ज, बवासीर और पेट के कैंसर की संभावना कम होती है।

मक्के का तेल

  • मक्के के तेल का सेवन भी स्वास्थ्य केलिए लाभप्रद है। इसके तेल में ओमेगा-3 ऌफैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो आपके दिल को स्वस्थ रखने में सहायक है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर धमनियों को अवरूद्घ होने से रोकता है। दिल के दौरे के खतरे को कम करता है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को संतुलित रखता है। मक्के का तेल अन्य तेल की तुलना में ज्यादा पोष्टिïक और सुपाच्य होता है।
  • यदि आप अपने बालों को मुलायम और रेशमी बनाना चाहते हैं तो मक्के का तेल लगाएं। इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 ऌफैटी एसिड की संतुलित मात्रा होती है, जो सिर को शुष्क और परतदार होने से बचाती है। ये तत्त्व बालों के टूटने और झड़ने की समस्या को कम करते हैं।
  • मक्के के तेल को गर्म करें। सिर पर मालिश करें और 15 मिनट तक बालों में रहने दें। उसके बाद शैंपू 
  • करें। आपके बाल रेशमी और मुलायम हो जाएंगे।
  • यदि हम भट्टो का सेवन सीमित मात्रा में करें तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए कई मायने में फायदेमंद है। बस इतना ध्यान रखें कि इसकी मात्रा सीमित रहे और भुट्टïा खाने के तुरंत बाद पानी ना पीएं। भुट्टïा खाने और पानी पीने के बीच कम-से-कम 45 मिनट का अंतराल अवश्य रखें क्योंकि तुरंत पानी पीने से गैस्ट्रिक और पेट दर्द की समस्या हो सकती है। मक्के को दाने को कभी भी कच्चा न खाएं। इससे भी पेट दर्द की समस्या हो सकती है।
  • थोड़ी सी सावधानी बरतें तथा मानसून के महीने में गर्म-गर्म भुट्टïे का स्वाद लें, और  सेहत भी बनाएं।

यदि मधुमेह के रोगी इसका सीमित सेवन करें तो इससे इंसुलिन की अनुपस्थिति में मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। मक्के के दानों में उपस्थित फाइटोकेमिकल्स उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं।

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