​​हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप को ‘खामोश हत्यारा’ भी कहा जाता है, क्योंकि लोगों को इस बात का पता ही नहीं चलता है कि उन्हें इसकी शिकायत है और जब कोई हादसा हो जाता है, तब मालूम पड़ता है। लेकिन तब तक कई बार बहुत देर हो चुकी होती है। उच्च रक्तचाप का रोग किसी भी इंसान को किसी भी उम्र में हो सकता है। यह बीमारी स्त्री-पुरुष में भेद नहीं करती। यदि यह रोग एक बार लग जाए, तो ताउम्र पीछा नहीं छोड़ता।

क्या है ब्लडप्रेशर?

रक्त द्वारा धमनियों पर डाले गए दबाव को ब्लड प्रेशर या रक्तचाप कहते हैं। रक्त दाब की मात्रा हृदय की शक्ति व रक्त संचार प्रणाली में रक्त की मात्रा और धमनियों की हालत पर निर्भर रहती है। रक्तचाप दो प्रकार का होता है- अधिकतम और न्यूनतम। जब बायां निलय सिकुड़ता है तब अधिकतम दबाव होता है, उसे प्रकुंचक दबाव कहते हैं। इसके तुरंत बाद न्यूनतम दबाव होता है जिसे संप्रसारण दाब कहते हैं। ब्लड प्रेशर मापक यंत्र में पारा लगा होता है जो दाब के बढ़ने व घटने के साथ उठता-गिरता है। आमतौर पर किसी भी स्वस्थ युवा का औसत प्रकुंचक दाब (सिस्टोलिक) 120 मिमी और संप्रसारण दाब (डायस्टोलिक) 80 मिमी होता है। इन्हें 120/80 लिखा जाता है। यह औसत है, व्यवहार में इससे थोड़ा कम ज्यादा हो सकता है। वैसे रक्तचाप की एक विशेषता यह भी है कि वह उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है। इसका कारण यह है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसका लचीलापन कम हो जाता है। किसी भी महिला का किसी भी असामान्य परिस्थिति में अल्पकालीन रूप से रक्तचाप बढ़ सकता है जो बीमारी नहीं है, लेकिन सदैव 140/90 रहता हो तो वह उच्च रक्तचाप का रोगी है और उसे उपचार की आवश्यकता है।

कारण- प्राइमरी हाइपरटेंशन की वजह तो अभी तक ज्ञात नहीं हुई है। हां, इसके मरीजों को सोडियम सॉल्ट के प्रति संवेदनशील अवश्य पाया गया है। वैसे उच्च रक्तचाप के लिए जो कारण उत्तरदायी हैं, उसमें प्रमुख हैं- आनुवांशिकता, इंसुलिन प्रतिरोध, किडनी की बिमारियां, स्लीप एप्निया, अंत:स्रावी विकार, शारीरिक श्रम का अभाव, तनाव, मोटापा, धूम्रपान, शराब, बढ़ती उम्र। महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन और गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप बढ़ने की प्रवृत्ति पाई जाती है। वैज्ञानिकों ने 2 आनुवांशिक बदलावों का पता लगाकर दावा किया है कि यह उच्च रक्तचाप से ग्रस्त रोगियों में इसकी दर एक तिहाई तक बढ़ा सकते हैं।

लक्षण- हालांकि इसके कोई खास या स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसीलिए इसे खामोश हत्यारा कहा जाता है। फिर भी कुछ बातें ऐसी हैं जो उच्च रक्तचाप की ओर इंगित करती हैं। इनमें प्रमुख हैं सिरदर्द, थकान, घबराहट, बेचैनी, आंखों के सामने धुंधलापन छाना, चेहरे पर सूजन व लाली तथा अनिद्रा।

हाई ब्लड प्रेशर के दुष्परिणाम

उच्च रक्तचाप को आप साधारण बात समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि इसके कई घातक और गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यहां तक कि जान भी जा सकती है। इससे पांच खतरे मुख्य रूप से जुड़े होते हैं। ये हैं- हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज, लकवा, गुर्दे की खराबी तथा अंधत्व। ब्लडप्रेशर लगातार हाई रहने को डॉक्टर अभी तक हृदयाघात या स्ट्रोक की आशंका मानते रहे हैं। उच्च रक्तचाप हृदय की गति को भी बंद कर सकता है। कई बार ब्लड प्रेशर की वजह से आंखों की कोई धमनी भी फट सकती है जो व्यक्ति को अंधा भी बना सकती है। उच्च रक्तचाप का सर्वाधिक चिंतनीय पहलू यह है कि यह व्यक्ति की मौत का कारण बन सकता है। यही नहीं इसकी वजह से व्यक्ति को लकवा भी आ सकता है, कभी-कभी उच्च रक्तचाप की वजह से दिमाग की नसें भी फट जाती हैं और उनमें रक्तस्राव शुरू हो सकता है जिसे ब्रेन हेमरेज कहते हैं। इसमें व्यक्ति या तो तत्काल मर जाता है अथवा कोमा में चला जाता है। उच्च रक्तचाप गुर्दे को जो कि शरीर के काफी महत्त्वपूर्ण अंग हैं, को भी क्षतिग्रस्त करता है।

जरूरी टेस्ट

हाइपरटेंशन का कारण जानने के लिए कुछ टेस्ट कराए जाते हैं, इनमें प्रमुख हैं-क्रिएटिनाईन, इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट, ग्लूकोज टेस्ट, कोलेस्ट्रॉल टेस्ट, यूरिन टेस्ट, ईसीजी तथा चेस्ट एक्स-रे।

उपचार

ब्लड प्रेशर को दवाइयों द्वारा नियंत्रित रखा जाता है। आमतौर पर इसके लिए रोजाना दवा लेनी पड़ती है। बेहतर होगा कि रोजाना सुबह ब्रश करने के बाद खाली पेट दवा लें। दवा का असर 24 घंटे तक बना रहता है। वैसे खानपान, उचित व्यायाम आदि से भी यह कंट्रोल में रह सकता है। बेहतर होता कि माह में दो बार अपना ब्लड प्रेशर चेक कराएं।

अमेरिका की आयोवा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने उस प्रोटीन की खोज की है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकता है। एसीआईसी-2 नाम के इस प्रोटीन की मदद से ही दिमाग को इस बात के संकेत मिलते हैं कि शरीर को अब ब्लड प्रेशर पर अंकुश लगाना चाहिए। शोधकर्ता फ्रैंक अबाउड के अनुसार ‘यह प्रोटीन जैसे ही दिमाग को संकेत देता है कि व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है, तो खून की नसें फैल जाती हैं, इसके अलावा तंत्रिका तंत्र भी खून पतला बनाने की कोशिश में जुट जाता है। इससे दिल पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता।’

दिल की बिमारियों का सबसे बड़ा कारण होता है ब्लड प्रेशर की अनियमितता। हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति को समय पर दवाएं लेना जरूरी होता है वरना समस्या बढ़ जाती है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ऐसा टीका खोज निकाला है जिससे ब्लड प्रेशर के मरीज हर चार महीने में इसे लगवाकर दवाई खाने के झंझट से मुक्त हो सकते हैं। यह टीका एक स्विस बायोटेक्नोलॉजी फर्म साइटोस के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले हारमोन को नियंत्रित करता है। अब तक इस टीके का परीक्षण 72 मरीजों पर किया जा चुका है, जिसमें यह पूरी तरह कारगर पाया गया और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं नजर आया। परिणाम उत्साहजनक हैं, लेकिन अभी इसका बड़े स्तर पर परीक्षण करने की जरूरत है। दिल के मरीज को ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के लिए औसतन हर दिन दवाएं लेना पड़ती हैं, लेकिन अधिकतर लोग दवाओं का कोर्स पूरा नहीं कर पाते, इसलिए टीका उन लोगों के लिए मददगार साबित होगा।

परहेज करें

ब्लड प्रेशर के रोगी को भोजन में नमक की मात्रा कम ही लेना चाहिए।

  फास्ट​​ फूड, डिब्बाबंद खाने से परहेज करें। इसकी अति ठीक नहीं।

  तेल घी का सीमित मात्रा में उपयोग करें।

कैसा हो ब्लड प्रेशर के मरीज का भोजन

  आधुनिक शोधों से पता चला है कि विटामिन-बी रक्तचाप रोकने में सहायक है, इसलिए जिन खाद्य पदार्थ, फल और सब्जियों में इसकी प्रचुरता हो, उन्हें अपने भोजन में शामिल करना चाहिए।

  भोजन में कैल्शियम, मैग्नेशियम और पोटैशियम की मात्रा बढ़ाएं।

  ब्लड प्रेशर से निजात पाने के लिए सफेद चावल की बजाय ब्राउन राइस का उपयोग करना चाहिए। अमेरिका और जापानी शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्राउन राइस में ज्यादा फाइबर होता है। इसमें धमनियों के कड़े हो जाने की स्थिति को रोकने की क्षमता होती है।

— यदि आप रोजाना संतुलित शाकाहारी भोजन करते हैं तो ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, इससे खून में कोलेस्ट्राल की मात्रा कम रहती है।

  भोजन में फल और सब्जियों का अधिक सेवन करें। पालक, गोभी, बथुआ, लौकी, तोरई, परवल, सहजन, कद्दू, टिंडा, नींबू आदि लाभदायक हैं। इसके अलावा लहसुन, प्याज भी उच्च रक्तचाप के रोगियों को लाभ पहुंचाते हैं। फलों में अनार, पपीता, मौसमी, संतरा, सेब, अमरूद, अनानास आदि का सेवन हितकारी है।

  दिनभर में कम से कम 10 से 15 गिलास पानी अवश्य पीएं।

— अमेरिका की फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी में डॉ. ए. फिगारो के नेतृत्व में हाल में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि तरबूज में मौजूद एल सिट्रलाइन रक्त वाहिकाओं में जमा वसा को हटाने में मदद कर उन्हें चौड़ा करता है। प्रतिदिन तरबूज का जूस पीने से ब्लड प्रेशर कम होता है।

  आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि उच्च रक्तचाप पर काबू पाने के लिए लहसुन कारगर हो सकता है।

पुराने लहसुन के सत्व को रक्तचाप नियंत्रण करने में अधिक कारगर पाया जाता है।

जब जाएं ब्लडप्रेशर नपवाने

— बिना किसी चिंता के डॉक्टर के यहां जाएं।

  पैदल चलकर जाने की बजाय वाहन से जाएं।

  यदि डॉक्टर का क्लिनिक बहुमंजिला इमारत में हो तो लिफ्ट से जाएं, बजाय सीढ़ियां चढ़ने के।

— क्लिनिक पर पहुंचने के बाद 10 मिनट शांत भाव से बैठें, तब अपना ब्लड प्रेशर नपवाएं।

  ब्लड प्रेशर नपवाते समय कुर्सी पर ठीक से बैठें और पैर जमीन पर रखें।

  आपकी बांह और रक्तचाप मापक यंत्र आपके दिल जितनी ऊंचाई पर होना चाहिए तभी सही रीडिंग आएगी।

— ब्लड प्रेशर की जांच करवाने के आधा घंटा पूर्व कॉफी, कोल्ड ड्रिंक का सेवन न करें और न ही धूम्रपान, क्योंकि इनसे कुछ समय के लिए ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है।

  40 वर्ष की आयु के ऊपर हर स्त्री-पुरुष को सचेत रहना चाहिए तथा 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को हर छह माह में अपना परीक्षण कराना चाहिए।

यह भी पढ़ें –

आपका टेंशन न बन जाए कहीं हाइपरटेंशन