२२ गृहलक्ष्मी मार्च २०१६
कुछ खट्टी कुछ मीठी
मैं पूर्वांचल यूपी की रहने वाली हूं तो ऐसे में वहां के कुछ जायकों की यादें आप सबसे साझा कर रही हूं। मुझे याद है जब मैं बनारस में थी चाहे त्योहारों का मौका हो या फिर हो किसी खास का आगमन, हमारे घर में हमेशा पारंपरिक खाना बनाने और खिलाने की परंपरा रही। मेरे जेहन में कुछ जायके ऐसे हैं जो आज भी कहीं ना कहीं मेरे साथ-साथ हर उस शख्स को याद आते होंगे, जो यूपी से संबंध रखता है। बड़े शहरों की व्यस्त जिंदगी के बीच ना मेरे पास वक्त है और ना ही वो जायके मैं आसानी से बना सकती हूं। मेरी यादों में बसे हैं वो महकते अचार। हर सीजन में किसी ना किसी अचार की खुशबू से महकता था घर। अगर सर्दियों का मौसम हो तो निश्चित रूप से अदरक, नींबू और हरी मिर्च का अचार खाने का जायका बढ़ाता था। तो वहीं मार्च में भरवां लाल मिर्च का लाजवाब स्वाद रास आता था तो गर्मियों में आम के अचार का स्वाद मेरे साथ-साथ ना जाने कितनों के जेहन में ताजा
होगा। अब ना अचार बनाने का समय, ना इतनी एनर्जी और सच कहूं तो ना ही दिलचस्पी बची है। आखिरकार सब कुछ बाजार से लेकर आने का विकल्प जो मिल गया है। खैर, ये तो रही अचार की यादें। अब आपको लिए चलते हैं पापड़ चिप्स की दुनिया में। छोटे शहरों और गांव की छत पर चारपाई पर फैले चिप्स और पापड़ों की भी एक अलग दुनिया थी जो आज भी यूपी के छोटे शहरों में घर-घर की शान और परंपरा होती है। आज भी होली जैसे मौके पर घरों में पापड़, चिप्स को पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है। लेकिन मेट्रो
सिटी में इतना वक्त कहां। यहां तो मेहमानों का स्वागत बाजार में मौजूद रेडीमेड चिप्स से किया जाता है। हालांकि हमारी मम्मियां अब भी अक्सर
हमें पुरानी चीजें अपने हाथों से बनाकर चखा ही देती हैं।
गुलगुले का स्वाद आज भी छोटे शहरों या गांवों में ही लिया जाता है या फिर कभी कभार उम्रदराज महिलाओं के हाथों में दिख जाता है यह हुनर। गोरखपुर के गांवों और शहर में बनाया जाने वाला एक खास व्यंजन है रिकवच, जिसमें अरबी के पत्तों को उड़द की दाल के साथ तेल में फ्राई करके चंक्स तैयार कर उसमें ग्रेवी डाली जाती है। एक डिश है कोहडौरी। शायद कई लोगों को
मालूम होगा तो कुछ इस जायके से अंजान होंगे। यह एक अलग सी डिश होती है जिसे पूर्वांचल के गोरखपुर में खासतौर पर घरों में बनाया जाता है। कोहडौरी बनाने के लिए कद्दू घिस कर उसमें धुली उड़द को भिगोकर पीसकर उसमें गरम मसाले और दरदरा धनिया और हींग मिलाकर हाथों से बड़ी बनाकर धूप में सुखाते हैं और फिर इसे किसी भी सब्जी में इस्तेमाल करते हैं।
निमोना भी एक ऐसी डिश है, जो यूपी के कुछ हिस्सों में बड़े चाव से बनाई और खाई जाती है। यह मटर की ग्रेवी होती है। एक व्यंजन है दाल का दुल्हा जिसमें सामान्य दाल में आटे के कुछ डिजाइनर टुकड़े डालकर पकाए जाते हैं। नाम भले ही आपको अटपटा लगे लेकिन ये दाल का दुल्हा होता बड़ा कमाल का है। बनारस शहर में सर्दियों में हर घर में चूड़ा मटर बनाया जाता है जिसे आप बड़े शहरों में पोहा भी कह सकते हैं। लेकिन चूड़ा मटर में सिर्फ चूड़ा मटर ही होता है जब कि पोहे में आप कई एक्सपेरिमेंट करते हैं। लखनऊ के हरदोई
शहर में होली पर आलू मटर के समोसे बनाए जाते हैं। तो वहीं यूपी के इस शहर में हर खास मौके पर आलू और उड़द के दाल की कचौड़ी बनाई जाती है। यहां एक और स्वाद मिलता है जिसका नाम है रसावर। इसे रसखीर भी कहते हैं जिसे गन्ने के रस में चावल डालकर बनाया जाता है। लखनऊ के पास हरदोई के गांवों की एक और डिश है गुड़ धनिया जिसमें साबुत भुने गेहूं में राब या गुड़ के साथ मिक्स करके गुड़ धनिया बनाया जाता था। हालांकि इसमें धनिया का कोई रोल नहीं होता था। वैसे अब भले यह डिश गायब हो चुकी है लेकिन यकीन मानिए वहां रहने वाले लोगों की यादों में जरूर शुमार होंगी। अब बात पकौडिय़ों की करते हैं यूं तो आपने पकौडिय़ों की ना जाने कितनी ही वैरायटीज ट्राई की होंगी लेकिन उत्तर प्रदेश के गांवों में बनने वाले कद्दू के फूल की पकौड़ी का जायका शायद ही लिया हो या शायद पहली बार ही इसका नाम सुन रहे हों। कुछ भी हो भले ही आज एक्सपेरिमेंटल फूड का दौर हो चला हो। भले ही आज स्टाइलिश मॉम्म के पास अलग- अलग स्टाइलिश खाने के ऑप्शन हों लेकिन पुराने जमाने की मांओं के हाथ के परंपरागत और अनूठे जायके आज भी जेहन में ताजा हैं। आज भी उन जायकों की यादों से महक उठता है आपका, मेरा, हमारा वो बचपन, हमारी वो गलियां जिन्हें हम कहीं पीछे छोड़ आए हैं।