घर में अपनी नज़रों के सामने सब्जियां उगाना, फिर उन्हें पकाना और फिर खाना। एक अलग और अनूठा अनुभव है। मगर ताजी हरी सब्जियों का स्वाद चखने के लिए हमें ज़रूरत है किचन गाडर्न की। अब किचन र्गाडन का नाम सुनते ही मन में सवाल आता है बजट का। लेकिन अगर हम यूं कहें कि आप ज़ीरो बजट के साथ भी किचन गार्डन शुरू कर सकते हैं। तो कैसा रहेगा। जी हां चाहे बालकनी हो, यां फिर घर का बगीचा। किसी भी खाली जगह में किचन गार्डन बना कर आप मौसमी व पसंदीदा सब्जी को उगा सकते हैं। जैसे कि गार्डन में टमाटर, मिर्च, पुदीना, हरा धनिया आदि लगा सकते हैं।
किचन र्गाडन बनाने के लिए हमें कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा जैसे
मौसम
घर में बगीचा रखने के शौकीन लोगों के लिए गर्मी और बारिश का मौसम एकदम सही है। इस मौसम में आप बागवानी का भरपूर मजा ले सकते हैं, साथ ही प्रकृति की खूबसूरती महसूस करने का यह सबसे अच्छा समय है। गरमी के मौसम में लौकी, तोरई, खीरा, करेला, लोबिया जैसी सब्जियां ऐसी होती हैं, जिन्हें गमलों में आसानी से उगाया जा सकता है। इनकी बेलें बालकनी में फैल कर फूल और फल से घर को सुंदर तो बनाती ही हैं, गरमी में उनसे ठंडक का अहसास भी बना रहता है।
बगीचे के लिए जगह
इंद्रप्रस्थ हार्टीकल्चर सोसायटी, ईस्ट दिल्ली की प्रेसिडेंट कृष्णा गुप्ता ने बातचीत में बताया कि अगर आपके घर के बाहर कुछ खुली जमीन है, तो फिर किचन गार्डन बनाने के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं। अगर आपका घर ऊपर की किसी मंजिल पर है, तो भी चिंता की बात नहीं। ऊपर की मंजिल वाले घरों में किचन गार्डन बनाने के लिए बस थोड़ी-सी तैयारी की जरूरत होती है। जी हां वो ज़मीन की जगह बड़े गमलों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपके घर की बालकनी छोटी है, तो उसके बाहरी हिस्से में लोहे की मजबूत चैड़ी रेलिंग लगवाएं, ताकि चैड़े और बड़े गमलों को रखा जा सके।
सूरज की रोशनी
किचन गार्डन के लिए खाली जगह के साथ साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि घर के किस हिस्से पर सूरज की सीधी रोशनी पहुंचती है। क्योंकि सूरज की रोशनी से ही पौधे का विकास संभव है। पौधों को रोज 5 से 6 घंटे सूरज की रोशनी मिलना बहुत जरूरी होता है। इसलिए अपना गार्डन छांव वाले जगह पर न बनाएं।
गमले
सबसे पहले घर में रखे पुराने प्लास्टिक के डिब्बे और बोतले इकट्ठा कर लें। ध्यान रखें की डिब्बों के नीचे छेद होने चाहिए, जो थोड़े बड़े हों, ताकि अतिरिक्त पानी होने पर आसानी से निकल जाए। इसके अलावा बाज़ार में सब्जियां उगाने के मकसद से प्लास्टिक के चैकोर गमले भी खूब मिलने लगे हैं। एक तो ये हल्के होते हैं और इन्हें यह ध्यान रख कर तैयार किया जाता है कि सब्जियों के पौधों की जड़ें ठीक से गहराई और चैड़ाई में फैल सकें। अगर आपके पास खुली छत है, तो उस पर गमले रखने के लिए लोहे के सीढ़ीदार स्टैंड बनवाए जा सकते हैं, ताकि कम जगह में अधिक गमले लगाए जा सकें।
खाद-मिट्टी
खाद के लिए आप किचन वेस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे सब्जी के छिलके, बेकार कागज़, गली सब्जियां और फल यानि जो भी बायो डिग्रेडेबल है, उससे हम खाद तैयार कर सकते हैं। ध्यान रखें की गमलों में आधा हिस्सा गोबर की खाद या फिर कंपोस्ट और आधा हिस्सा मिट्टी और रेत मिलाकर भरें। मिट्टी भरते समय ध्यान रखें कि गमलों के पेंदे में छेद खुले हों और मिट्टी में अगर पत्थर हो तो उसे हटा लें। सब्जियों में अलग से रासायनिक खाद डालने की जरूरत नहीं होती। अगर कंपोस्ट की जगह वर्मी कंपोस्ट डालें, तो पौधे अधिक फल देंगे और उन्हें किसी तरह का रोग नहीं होगा। वर्मी कंपोस्ट आजकल नर्सरियों में आसानी से मिल जाता है।
बीज की रोपाई
हर सब्जी हर मौसम में नहीं उगाई जा सकती। मैदानी और गरम इलाकों में यह मौसम भिंडी, करेला, तोरई, लौकी, खीरा वगैरह उगाने का है। गमलों में सब्जी उगानी है तो करेला, लौकी, तोरई और खीरा के बीज बो सकते हैं। भिंडी के लिए अधिक जगह की जरूरत होती है।
पानी
गरमी के मौसम में सब्जी के पौधों को पानी की अधिक जरूरत होती है, पर एक दिन का अंतर करके पानी डालें, तो भी इनके लिए पर्याप्त होता है। गरमी के मौसम में पानी हमेशा शाम के वक्त डालें, जब सूरज छिप जाए। अगर गरमी तेज पड़ रही हो तो रोज शाम के पानी डालें।
पौधों का कैसे रखें ख्याल
इंद्रप्रस्थ हार्टीकल्चर सोसायटी, ईस्ट दिल्ली की प्रेसिडेंट कृष्णा गुप्ता ने बातचीत में बताया कि पौधों को शुरुआती दौर में बहुत अधिक पालन.पोषण की जरूरत पड़ेगी। आपको पौधे के अनुसार ही उन्हें पोषक तत्व यानि खाद, कम्पोस्ट और मिट्टी देनी चाहिए।
पौधों को नियमित पानी देना बेहद जरूरी है। खासकर पौधा जब छोटा होता है तो उसे पानी की ज्यादा जरूरत होती है।
एक-दो दिन के अंतर पर सब्जियों के पत्तों पर पानी में सिरका या फिर थोड़ा-सा नमक मिला कर स्प्रे कर दिया करें।
हमेशां स्प्रे शाम के वक्त ही करें। इससे पत्तों पर जमा गर्द धुल जाती है और पौधों को नमी मिलती है,
समय समय पर पौधों में खाद डालते रहें।
पौधों को साफ रखने के लिए रीठे का पानी स्प्रे कर दें, ताकि पौधे साफ रहें और कीड़ा भी न लगे ।
नींबूं और सिरके को मिलाकर पत्तियों पर डाले ।
कुछ आसान चीजें आप भी उगा सकते हैं गमलों में
पुदीना
पुदीना की पत्तियों को निकालकर बची हुई जड़ वाली डंडियों को अपने गमलों में डाल दीजिए। बस कुछ ही दिनों में हरा-हरा पुदीना लहलहाने लगेगा।
धनिया पत्ती
एक मुट्ठी पुराना धनिया लेकर उसे लकड़ी के गुटके से मसल लें। जब वह दो भागों में टूट जाए तब उसे अपनी क्यारी में फैला दीजिए।
हरी मिर्च
इसे उगाने के लिए आपको छायादार जगह की जरूरत होगी। सूखी मिर्च से बीजों को निकालकर क्यारी या गमलों में छिड़क दें।
अदरक
अगस्त-सितंबर में इसकी बुवाई होती है। यह अपनी जड़ों में लगता है। पुरानी अदरक की गाँठों की थोड़े-थोड़े अंतराल पर बुआई कर दें। इस पर पानी देते रहें। कुछ दिनों बाद आपकी क्यारी में हरे रंग की पत्तियां निकल आएंगी
अजवाइन
इस पौधे को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। अजवाइन को क्यारियों में डाल दें, इसे उगाने के लिए बस इतना ही काफी है।
सौंफ
बस चैड़े गमलों में सौंफ छिड़क दीजिए। इसकी बिलकुल बारीक लहराती हरी-भरी खुशबूदार पत्तियां ऊपर से कच्ची सौंफ के सुंदर गुच्छे आ जाएंगे
इसके अलावा जीरा, तुलसी, मीठा नीम (कड़ी पत्ता) जैसे पौधे आप अपने घर में उगा सकती हैं। पेड़ छोटे हों या बड़े, इन्हें देखभाल की बहुत जरूरत होती है। इन पर आपके प्यार और स्नेह का भी असर होता है। कोशिश कीजिए कि शुरूआत में किचन गार्डन पर ध्यान ज्यादा दें और खर्च कम करें। ताकि आपको आत्मसंतुष्टि का अहसास हों और जैसे जैसे सब्जियां उगने लगे, तो धीरे धीरे किचन गार्डन का एक बजट सेट कर लें।
