क्या आप खाद्य पदार्थ बचा के रखते हैं ताकि मुश्किल वक्त में काम आ सके ?यदि आप ऐसे भोज्य पदार्थ रखना चाहते है जिनकी पौष्टिकता समय के साथ खराब न हो तो अपनाइए इन्हें।
सफेद चावल –शोध से प्रमाणित हुआ है कि पाॅलिश किये चावल लगभग तीस वर्षो तक अपने पोषक तत्व व स्वाद को बरकरार रखते है। आपको इन्हें 40 डिग्री फैरेहनाईट से कम तापमान में एक आक्सीजन फ्री डिब्बे में रखना हैं। भूरे चावल सिर्फ छः महीने अपना स्वाद व पोषकता बरकरार रख पाते है क्योंकि उनमें प्राकृतिक तेल उनकी चोकर परत के नीेचे पाया जाता है।
शहद –शहद मधुमक्खियों की जादुई क़ारीगरी का कमाल ही है। मधुमक्खियां से साव्रित लार और इनके पँखों से पहुँची ठंड़ाई का ही असर होता है कि शहद अत्यंत ही अमलीय हो जाता है और नमी में कम होने की वजह से यह जीवाणु पनपने बिल्कुल नहीं देता। सीलबंद डिब्बों में शहद दशकों, शताब्दियों तक सुरक्षित रह सकता है। स्टोर करने रहने के दौरान शहद काला पड़ सकता है, अपनी महक खो सकता है और उसमें दानों का रवाकरण हो सकता है। यह सब तापमान पर आधारित प्रक्रियाएं है। शहद की शेल्फ लाईफ अमूमन दो वर्षो की होती है। शहद में नमी की मात्रा कम होने के बावजूद यह हवा से नमी चुराता है। अगर सही तरीके से शहद गर्म किया हुआ, छना हुआ है और सील किया गया है तो वो ऐसा ही सालोंसाल रह सकता है। अगर शहद में दाने पड़ गए है तो उसे खुले मर्तबान में गर्म पानी में रखें, उसे हिलाते रहें जब तक कि दाने पिघल के एकसार न हो जाएँ। शहद पुनः तरोताजा हो जाएगा।
नमक –नमक एक ऐसा तत्व है जो धरती से बनता है। नमक बरसों से अन्य पदार्थो को सुरक्षित करने में काम आ रहा है, क्यांेकि यह नमी को हटा देता है। आपकी आलमारी में रखा नमक मगर हमेशा नहीं रहेगा। आयोडीन, नमक में मिलाने से उसकी शेल्फ लाइफ कम हो जाती है। आयोड़ीन युक्त नमक मात्र पांच वर्षो तक ही सही रहता है।
सोया साॅस –कहा जाता है कि सोया साॅस बरसों तक खराब नहीं होता। विभिन्न कम्पनियोें और उनके द्वारा डाले गए पदार्थ जिनसे सोया साॅस बनाया जाता है यह उसपे निर्भर करता है। न खोले जाने पर सोया साॅस बहुत लम्बे समय तक चल सकती है। खुलने पर भी फ्रिज में रखे जाने से वर्षो तक यह खराब नहीं होती।
चीनी –चीनी को संग्रहित करने का आपका तरीका तय करता है कि आप वर्षो तक उसे रख पायेंगे या नहीं । एयरटाईट कन्टेनर में दानेदार चीनी को रखना उसको वर्षो तक चलाने का अचूक नुस्खा है। फुटकर विक्रेता भले ही चीनी की बोरियों पे स्टाम्प लगाएं पर कड़ी हो गई भूरी शक्कर नर्म होने की बाद भी खाने योग्य तो रहती है।
सूखी फलियाँ–फलियाँ सालों तक आपके द्वारा काम में ली जा सकती है। ब्रिगहम यंग विश्वविद्यालय द्वारा शोध के नतीजों में पाया गया कि राजमा 30 वर्षो तक खराब नहीं होते। उनकी प्रोट्रीन पाचन की शक्ति भी उतनी ही रहती है। अन्य सूखी फलियां भी सालों साल चलती है।
प्योर मेपल सीरप –यह एक ऐसा द्रव्य है जो वर्षो तक खराब नहीं होता। फफूंद, सूक्ष्मजीवों आदि से पूर्णतया सुरक्षित यह अन्य व्यावसायिक चाशनियों की तरह है। इसकी अनिश्चित शेल्फ लाईफ होती हैं। बिना खुला मेपल सीरप सालों तक चलेगा। अगर कोई फफूंद आपको बोतल के ऊपर दिखती है तो सीरप उबाल के फफूंद को हटा ले और साफ बर्तन में उडेंल के फ्रिज में रख दें।
दुग्ध पाउडर –भले ही स्वाद उतना अच्छा न हो पर दुग्ध पाउड़र बहुत समय तक चलता है। लाने ले जाने और रखने में भी यह दूध से ज्यादा आसान है। इसमें पोषक तत्व भी बरकारार रहते है।
चाकलेट – हो सकता है आपने वोे चाकलेट बाॅर खा ली हो जो सोफे के साईड में दबी-कुचली जाने कब से पड़ी थी। यह भी हो सकता है उसमें सफेद दाने उभर आएँ हो क्योंकि उसकी चीनी सघन हो गई हो पर उसे खाना पूर्णतया सुरक्षित है। चाकलेट सालोसाल खराब नहीं होती, हाँ स्वाद में फर्क जरूर आ सकता है।
शुद्ध वनीला एक्सट्रैक्ट – वनीला एक्सट्रैक्ट की शेल्फ लाईफ तीन वर्ष लिखी जाती है जबकि यह सालों साल चलते है। हो सकता है आपको कुछ दाने से प्रतीत हो या वो घना लगे पर यदि आप उसे हिला लेगें तो वो फिर से ठीक हो जाएगा।
हजारों लाखों खाने के डिब्बे सिर्फ इसीलिए फेंक दिए जाते है क्योंकि उनपे ‘बेस्ट बिफोर’, तारीख लिखी होती है। ध्यान रहे ‘बेस्ट बिफोर’ तभी लागू होता है जब डब्बे पर लिखे निर्देशानुसार आप खाद्य सामग्री स्टोर करते है जैसे ‘शुष्क ठंडी जगह पर रखें’ या ‘खुलते ही फ्रिज में रखें।’ इनकी पालना करते है। कई पदार्थ जैसे डेयरी आइटम एक्सपायरी डेट निकालने के बाद खाए भी जा सकतें है। व्हिस्की, शहद, जैम, आपको बीमार नहीं बनायेंगे अगर आप उन्हें वक्त निकलने पर खायेंगे। कच्चा सीफूड और मुलायम चीज़ उनकी प्रयोग की तारीख निकलने के बाद खाना हानिकारक होता है। अक्सर ‘तक बेेंचे’ या ‘तक प्रदर्शित करें’, दुकानदारों के लिए होता है। उपभोक्ता होनेे के नाते आपको हमेशा तक ‘प्रयोग करें’ या ‘बेस्ट बिफोर’ की तारीख ही देखनी चाहिए। खाद्य सामग्री के प्रति हमारी थोड़ी सी सावचेतता हमें बना देती है जागरूक और रखती है सेहतमंद हमेशा।
