Special Items In Maharashtrian Bride : भारत विभिन्न धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं को समेटे है, जिसमे कुछ रीतियां वैदिक हैं तो कुछ रिवाज सामाजिक उद्गम से आए हैं और हमारे देश की इसी अतुल्य सांस्कृतिक विरासत में वेद वर्णित सोलह संस्कारों के भी विषय में वर्णन मिलता है। ये सोलह संस्कार भारत के एक विशिष्ट इतिहास को समेटे हैं।
बता दें जन्म से लेकर अंतिम क्रिया तक इन सोलह संस्कारों में एक ऐसा विशेष संस्कार भी है, जिसका महत्व अत्यधिक विशेष है, और वह है विवाह संस्कार। विवाह, यानिकि शादी, एक विशेष संस्कार है, जिसमे समूचे भारत के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग प्रकार की परंपराएं देखने को मिलती हैं। एक तरफ जहां विवाह का भाव एक ही होता है वहीं विवाह की रीतियां, पहनावे, परंपराएं सभी भिन्न। यदि हम देखें तो भारत के ऊपरी राज्य कश्मीर में दुल्हन का पहनावा देश के निचले भाग में बसे केरल की दुल्हन के पहनावे से बहुत भिन्न होता है।
सभी राज्यों की तरह महाराष्ट्र की दुल्हन का स्वरूप काफी सुंदर दिखाई पड़ता है। इस आर्टिकल में आप विशेष रूप से जानेंगे कि मराठी दुल्हन अपने श्रृंगार में किन आठ खास चीजों का इस्तेमाल कर अपने रूप को संवारती हैं और साथ ही सांस्कृतिक समृद्धता का परिचय देती हैं।
मराठी दुल्हन का खास श्रृंगार

किसी भी लड़की को अपने कॉलेज के दिनों से ही विशेष रूप से अपने विवाह का बेसब्री से इंतजार होता है। विवाह के दिन दुल्हन बनकर जहां लड़की को अपना घर बार छोड़ना होता है, वहीं ये उनके लिए एक नई शुरुआत की भी सूचक होती है। कई लड़कियां अपनी शादी के जोड़े को लेकर काफी पार्टिकुलर नजर आती हैं, क्योंकि इस खास दिन वो बेहद खूबसूरत, रॉयल और अट्रैक्टिव नजर आना चाहती हैं।शादी के दिन वो क्या पहनेगी, इसके लिए लड़कियां काफी लंबे समय पहले से ही सपने संजो लेती हैं और तैयारियों में जुट जाती हैं। और जब बात मराठी दुल्हन की हो तो क्या कहने। महाराष्ट्र की दुल्हनों का सुंदर स्वरूप काफी खास नजर आता है। सिर से पांव तक बारीकी से परख कर वे अपने खास दिन के लिए खास कपड़े और आभूषण चुनती हैं। इस आर्टिकल में आप जानेंगे की खास आठ चीजों से कैसे मराठी दुल्हन अपना श्रृंगार करती हैं।
मुंडावलया

किसी भी मराठी जोड़े के लिए मुंडावलया एक काफी इंपोर्टेंट आभूषणों की गिनती में आता है। दरअसल महाराष्ट्र क्षेत्र के वर वधु अपने श्रृंगार में खास तौर पर मुंडावलया का इस्तेमाल करते है। सच्चे मोतियों से बना यह खूबसूरत हेड पीस दरअसल मराठी दूल्हे और दुल्हन के लिए काफी खास और शुभता का प्रतीक माना जाता है। जहां एक तरफ यह खास आभूषण दूल्हे और दुल्हन के माथे पर सजता है वहीं चेहरे के दोनो ओर इसकी लटकने दूल्हे और दुल्हन दोनों के ही लुक को काफी खास बना देती हैं।
खोपा

आज की दुल्हने एक तरफ जहां बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा आलिया भट्ट के ब्राइडल लुक से हेयरस्टाइल को अपनाती नजर आती हैं, वहीं आज भी मराठी दुल्हनों के बीच खोपा काफी पॉपुलर है। दरअसल कस के जुड़ा बांध के लगाया जाने वाला यह हेड ज्वेलरी काफी खास होता है, जिसके डिजाइन काफी कूल नजर आते हैं। फिल्म बाजीराव मस्तानी के काशीबाई से इंस्पायर्ड खोपा मराठी ब्राइड्स की पहली पसंद हैं।
चांद बिंदी

यूं तो भारत वर्ष में बिंदी का विशेष महत्व है पर किसी भी मराठी महिला के लिए चंद्राकर बिंदी अत्यंत शुभ मानी जाती है, जो की ऑथेंटिक मराठी बिंदी का स्वरूप है। वैसे तो भारत के लगभग अधिकतर क्षेत्रों में गोल बिंदी को ही प्रयोग में लाया जाता है , परंतु चंद्रमा के आकार की यह बिंदी ऐतिहासिक रूप से भी काफी श्रेष्ठ मानी गई है। मराठा क्षेत्र की दुल्हनों के लिए चांद बिंदी बेहद खास हैं।
नथ

भारत में नारियों के आभूषण में सर्वाधिक लोकप्रिय आभूषणों में नथ का नाम शुमार है। दरअसल भारत के अलग अलग क्षेत्रों में महिलाएं अलग अलग प्रकार की नथ धारण करती हैं, जिनमे मराठी नथ का स्टाइल और डिजाइन काफी अलग और खास है। महाराष्ट्र के पुराने पेंटिंग्स के अनुसार मराठा क्षेत्र की रानियां और महारानिया भी इस विशेष नथ को पहनती थी, जिसके कारण हो बेहद खास नजर आती थी। आज मराठा क्षेत्र की दुल्हन इसे बेहद खास अंदाज में धारण करती हैं।
तनमानी

किसी भी दुल्हन के श्रृंगार में सबसे अहम उसका नेकपीस होता है, क्योंकि ज्वेलरी का ये हिस्सा किसी भी दुल्हन के नॉर्मल लुक को काफी क्लासी बना देता है। यूं तो महाराष्ट्रीयन ब्राइड्स के बीच तनमानी के काफी सारे डिजाइन प्रचलित हैं, पर गोल्डन बीड से बना मल्टी चैन नेकलेस, काफी खास नजर आता है। तनमानी का डिजाइन कुछ हद तक महारानी हार जैसा होता है, जो कि एक मराठी दुल्हन को रॉयल लुक देता है। मराठी दुल्हन का विशेष श्रृंगार उसके लुक को काफी सुंदर बना देता है, जिसके बाद वे खूबसूरत और एलिगेंट नजर आती हैं।
वाकी

मराठी दुल्हनों के ब्राइडल आभूषणों में सबसे खास वाकी होता है, जो काफी हद तक बाजूबंद जैसा नजर आता है। दरअसल बाजू में पहने जाने वाला यह आभूषण विशेष रूप से मराठी महिलाओं द्वारा त्योहारों पर पहना जाता रहा है। वाकी मराठी दुल्हन के लुक को काफी एथनिक और सुंदर बना देता है।
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हरा चूड़ा

चूड़ियां भारत की नारी के सुहाग का प्रतीक मानी गई हैं। एक तरफ जहां भारत के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग प्रकार की चूड़ियों का प्रचलन है, वहीं मराठी दुल्हने आज भी कांच की बनी हरी चूड़ियां पहनती हैं, जो उनके सुहाग की निशानी है। मराठी दुल्हनों का ये बेहद खास और स्पेशल आभूषण शुभता का प्रतीक है, जिसकी खनक को लक्ष्मी के आगमन का संकेत माना जाता है।
सिल्क की साड़ी

एक तरफ जहां कश्मीर की दुल्हने सूट और राजस्थान की दुल्हने घाघरा पहनती हैं, वहीं महाराष्ट्र में लुगड़े का विशेष महत्व है। सिल्क की किसी आम साड़ी की तरह दिखने वाला यह परिधान यूं तो बेहद आम नजर आता है, लेकिन इसे पहनने का अलग ढंग इसे काफी अलग बना देता है। मराठी दुल्हन की साड़ी बेहद यूनीक होने के साथ साथ काफी रॉयल भी नजर आती है। मान्यता है, प्राचीन समय में महाराष्ट्र क्षेत्र की महारानियां भी विशेष दिवस पर सिल्क आदि की विशेष लुगड़ा धारण करती थी।
