10 Most Unique Wedding Rituals in India
10 Most Unique Wedding Rituals in India

Unique Indian Wedding Rituals: भारत की शादियां सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि रिवाजों, रंगों और रिश्तों का उत्सव हैं। हर राज्य की अनोखी रस्में इस देश की सांस्कृतिक समृद्धि और एकता की झलक पेश करती हैं।

भारत में शादी सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक परंपरा की परतों में लिपटा पवित्र संस्कार है। यहां हर राज्य, हर भाषा और हर रीति में बसता है एक अलग रंग। चलिए, जानते हैं देश के अलग-अलग
हिस्सों से 10 ऐसे अद्भुत विवाह संस्कार, जो हमारी सभ्यता की आत्मा को स्पर्श करते हैं।

Antarpat - A Beautiful Moment of Waiting (Maharashtra)
Antarpat – A Beautiful Moment of Waiting (Maharashtra)

मराठी विवाहों में एक सुंदर परंपरा होती है अंतरपट की। जब विवाह संस्कार शुरू होते हैं, तब दूल्हा और दुलहन के बीच एक रेशमी परदा लगा दिया जाता है। यह परदा तब तक उनके बीच बना रहता है
जब तक कि पंडित जी शुभ मुहूर्त घोषित नहीं करते।
जब परदा हटाया जाता है, तब दोनों पहली बार एक-दूसरे को पति-पत्नी के रूप में देखते हैं।

गुजरात में शादी से कुछ दिन पहले दुलहन के मामा-मामी का विशेष सम्मान होता है। मामेरू या मोसालू नामक इस रस्म में मामा अपने भांजी के घर आते हैं और उसे साड़ियों, गहनों, मिठाइयों और उपहारों से नवाजते हैं।

Kashi Yatra – The Naughty Penance of the Groom (Andhra Pradesh and Tamil Nadu)
Kashi Yatra – The Naughty Penance of the Groom (Andhra Pradesh and Tamil Nadu)

दक्षिण भारत के कुछ समुदायों में शादी से ठीक पहले एक मजेदार रिवाज निभाया जाता है काशी यात्रा। इस रस्म में दूल्हा दिखावे के तौर पर शादी से पलायन करने की घोषणा करता है और संन्यासी बनने के इरादे से ‘काशी’ की यात्रा पर निकल पड़ता है। हाथ में छड़ी, पैर में चप्पल, और सिर पर टोपी लगाए वह मानो ज्ञान की खोज में निकल गया हो लेकिन तभी दुलहन का पिता और
भाई पहुंचते हैं, उसे समझाते हैं और विवाह के लिए मनाते हैं।

मणिपुर में विवाह की अंतिम रस्म होती है नगा-थबा। इस रस्म में दोनों परिवारों की महिलाएं मिलकर तालाब में दो मछलियां छोड़ती हैं एक दूल्हे की ओर से और एक दुलहन की ओर से। अगर मछलियां एक साथ तैरती हैं, तो माना जाता है कि जोड़ा भी जीवनभर सौहार्द और प्रेम से साथ रहेगा।

Wanwun – A Blessing in Music (Kashmir)
Wanwun – A Blessing in Music (Kashmir)

कश्मीर की शादियां संगीत और परंपरा का सुंदर संगम होती हैं। विवाह से पहले एक रस्म होती है वानवुन, जिसमें महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं। ये गीत केवल मनोरंजन नहीं होते, बल्कि दुलहन को आशीर्वाद देने, उसे नये जीवन के लिए तैयार करने का माध्यम होते हैं। घर को पहले लिवुन नामक शुद्धिकरण से गुजारा जाता है पूरा घर साफ किया जाता है, दीवारों पर सुगंधित मिट्टी लगाई जाती है, और शाम को चूल्हे की आग के पास बैठकर वानवुन के गीत गूंजते हैं। साथ में परोसा जाता है नून चाय जो कि गुलाबी नमकीन चाय है और हर रिश्ते में गर्माहट घोल देती है।

राजस्थान के राजपूत समुदाय में विवाह रस्मों में तोरण बंधन एक रोचक परंपरा है। विवाह स्थल के प्रवेश द्वार पर दुलहन की ओर से एक तोरण बांधा जाता है। दूल्हा जब वहां पहुंचता है, तो दुलहन तलवार लेकर प्रतीकात्मक रूप से उसकी ओर बढ़ती है मानो उसकी वीरता की परीक्षा ले रही हो। दूल्हा भी उसी अंदाज में मुस्कुराते हुए ‘रक्षा’ का वादा करता है। यह परंपरा प्रेम, सम्मान और साहस का प्रतीक है जहां रिश्ते की नींव समानता और परस्पर आदर पर रखी जाती है।

बंगाल में शादी की शुरुआत एक पवित्र रस्म गंगा निमंत्रण से होती है। शादी के कुछ दिन पहले सुबह-सुबह दुलहन के घर की विवाहित महिलाएं गंगा माता को विवाह में आमंत्रित करने निकलती हैं। वे पूजा की थाली में मिठाइयां, दीपक और धूप लेकर नदी किनारे जाती हैं और प्रार्थना करती हैं कि गंगा जल की तरह उनकी बेटी का जीवन भी पवित्र और सुगंधित बना रहे। यह रस्म बताती है कि
बंगाली संस्कृति में आध्यात्मिकता और मातृस्नेह कितनी गहराई से जुड़े हैं।

उत्तर प्रदेश के सरसौल क्षेत्र में शादियों में स्वागत का तरीका थोड़ा हटके है। यहां बारात के आगमन पर मेहमानों पर फूल नहीं, बल्कि टमाटर फेंके जाते हैं! यह अजीबो-गरीब लग सकता है, लेकिन यह मजेदार रस्म प्यार और मस्ती का प्रतीक है। मान्यता है कि शादी की शुरुआत थोड़े हंसी-ठिठोली और शोर-गुल से हो तो रिश्ता और भी जीवंत बनता है।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विवाह बारात का स्वरूप बेहद अनोखा होता है। यहां दूल्हे की बारात के आगे एक सफेद झंडा यानी निशान लहराया जाता है। ड्रम बजते हैं, गीत गाए जाते हैं और पूरी घाटी
में पर्व जैसा उत्सव होता है। शादी के बाद, जब दुलहन विदा होती है, तो उसके पालकी के आगे लाल झंडा लहराया जाता है। यह दोनों झंडे सफेद और लाल दो परिवारों के मिलन का प्रतीक हैं, जो अब
एक रंग में रंग गए हैं।

बिहार के कुछ हिस्सों में विवाह के बाद दुलहन जब ससुराल के आंगन में प्रवेश करती है, तो उसकी सास उसके सिर पर कई मिट्टी के घड़े रख देती है। दुलहन को उन घड़ों को संतुलित करते हुए बड़ों के
चरण स्पर्श करने होते हैं। जितनी सहजता से वह यह करती है, उतना ही माना जाता है कि वह नये घर में जिम्मेदारियों को संतुलित करने में निपुण होगी।

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...