ऑस्‍कर के लिए ‘लापता लेडीज’  की ऑफिशियल एंट्री पर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: Laapataa Ladies Oscar Nomination
Laapataa Ladies Oscar Nomination

Laapataa Ladies News: ‘लापता लेडीज’ इस साल की वो फिल्‍म जो बिना किसी ताम झाम के दर्शकों को लुभाने में कामयाब रही। न बड़े स्‍टार्स, न वीएफएक्‍स और न ही कोई एक्‍शन फिर भी फिल्‍म बॉक्‍स आफिस पर छा गई। किरण राव निर्देशित इस फिल्‍म की कहानी और कलाकारों का अभिनय दर्शकों के सिर चढ़ कर बोला। इस फिल्‍म में किरण राव ने कई जगह समाज की उन पहलुओं पर कटाक्ष भी किया जिन्‍हें जानते हुए भी लोग अनदेखा करते हैं। उनकी इस कहानी और कहानी के किरदारों ने इतना प्रभावित किया कि चीफ चस्टिस ऑफ इंडिया चंद्रचूण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में इसकी स्‍पेशल स्‍क्रीनिंग का आयोजन करने का निर्णय किया है। स्‍क्रीनिंग के समय फिल्‍म के निर्देशक किरण राव और निर्माता आमिर खान भी इस स्‍क्रीनिंग में मौजूद रहेंगे।

Also read: एनिमल फेम तृप्ति डिमरी कार्तिक आर्यन संग इस फिल्म में आएंगी नज़र?: Tripti Dimri Upcoming Film

YouTube video

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रचूण ने जज और रजिस्‍ट्री अधिकारियों और उनके परिवार जनों के लिए लापता लेडीज की स्‍क्रीनिंग का आयोजन किया है। सर्वोच्‍च न्‍यायालय की स्‍थापना के पचहत्‍तरवें वर्ष के दौरान आयोजित गतिविधियों में इस फिल्‍म की स्‍क्रीनिंग को शामिल किया गया है। आपको बता दें कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय में लापता लेडीज की स्‍क्रीनिंग 9 अगस्‍त को शाम 4 बजे के बाद होगी। इसकी स्‍क्रीनिंग का विचार सीजेआई की पत्‍नी कल्‍पना दास का था। फिल्‍म की स्‍क्रीनिंग लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता के लिए उठाए जाने वाले कदमों में से एक है। सुप्रीम कोर्ट के ऑडिटोरियम में स्‍क्रीनिंग का आयोजन किया जा रहा है। स्‍क्रीनिंग के दौर किरण राव और आमिर खान भी मौजूद रहेंगे।    

इस फिल्‍म की कहानी दो लड़कियों के इर्द गिर्द घूमती है। फूल और पुष्‍पा शादी के बाद घूंघट की वजह से ट्रेन में बदल जाती हैं। फूल का पति उसके बदल जाने के बाद ढूंढने की कोशिश में पूरा जोर लगा देता है। वहीं पुष्‍पा जो फूल की जगह आ जाती है उसकी गतिविधियों पर पोलिस को शक होता है। फिल्‍म में महिलाओं की स्थिति और उनके जीवन जीने के तरीके पर भी कटाक्ष किया गया है। किरण राव की इस फिल्‍म में कलाकरों के अभिनय ने कहानी को और भी प्रभावित रूप से पर्दे पर पेश किया है। लैंगिक असमानता की कुछ ऐसी घटनाएं जो हमारे आस पास होती हैं लेकिन उस पर ध्‍यान भी नहीं जाता, उन छोटी छोटी बातों को फिल्‍म में बखूबी दिखाया गया है।  

निशा सिंह एक पत्रकार और लेखक हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिलेमें हुआ। दिल्‍ली और जयपुर में सीएनबीसी, टाइस ऑफ इंडिया और दैनिक भास्‍कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्‍थानों के साथ काम करने के साथ-साथ लिखने के शौक को हमेशा जिंदा...