ऑस्‍कर के लिए ‘लापता लेडीज’  की ऑफिशियल एंट्री पर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: Laapataa Ladies Oscar Nomination
Laapataa Ladies Oscar Nomination

Laapataa Ladies Oscar Nomination: भारत की तरफ से 97वें ऑस्‍कर अवॉर्ड के लिए आफिशियली ‘लापता लेडीज’ का नाम चुना गया है। फिल्‍म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इसे फॉरन फिल्‍म कैटेगरी के लिए भेजने का निर्णय किया है। आपको बता दें कि 29 अलग अलग भाषाओं की फिल्‍मों में से किरण रॉव निर्देशित ‘लापता लेडीज’ ने आफिशियल एंट्री में अपनी जगह सुनिश्चित की है। जहां फिल्‍म मेकर्स इस फिल्‍म के चयन से खुश हैं वहीं नेटिजेंस इस बात पर सवाल उठा रहे हैं। इस कम बजट फिल्‍म को क्रिटिक्‍स से लेकर आम लोगों ने पसंद किया। यही नहीं हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी खास मौके पर इस फिल्‍म की स्‍कीनिंग रखी थी। फिर आखिर क्‍या वजह है कि ऑस्‍कर के लिए आफिशियल एंट्री पर नेटीजेंस खुश नहीं है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।

Also read: कौन हैं ‘नाचो-नाचो’ को लिखने वाली रिया मुख़र्जी: RRR Song

इस साल एक से बढ़कर एक प्रेरित करने वाली और फ्यूचर की सोच को दर्शाने वाली फिल्‍में रिलीज हुई हैं। यही नहीं रीजनल भाषाओं में रिलीज हुई फिल्‍में भी काफी प्रभावशाली रही हैं। ‘लापता लेडीज’ ने भी दर्शकों के दिलों को छुआ लेकिन इसके ऑस्‍कर के लिए चुने जाने से लोग सहमत नहीं हैं। उससे भी ज्‍यादा फिल्‍म फेडरेशन ऑफ इंडिया की फिल्‍म को चयन किए जाने के पीछे की वजह पर लोग नाराजगी जता रहे हैं। फैडरेशन के आफिशियल लेटर की शुरूआत में लिखा है कि ‘इंडियन वुमन आर स्‍ट्रेंज मिक्‍सचर ऑफ सबमिशन एंड डॉमिनेंस ।’ इस बात पर नेटिजेंस एक्‍स पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उनका मानना है कि ये बात लिखना सही नहीं है और न ही ये वजह सही है इस फिल्‍म को ऑस्‍कर के लिए चुने जाने की। कई लोगों का मानना है कि इससे भी बेहतर फिल्‍में लिस्‍ट में थीं उनको छोड़कर इसे चुनना समझ से परे है। कुछ नेटिजेंस का मानना है कि ऐसा नहीं है कि ये फिल्‍म अच्‍छी नहीं है लेकिन ऑस्‍कर के लिए इसे भेजने की जगह ‘ऑल वी इमैजिन एज लाइट’ ज्‍यादा बेहतर ऑप्‍शन है।

आपको बता दें कि ऑस्‍कर में भारत की तरफ से आफिशियल एंट्री फिल्‍म फेडरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से भेजी जाती है। हालांकि अगर फिल्‍म मेकर चाहें तो प्राइवेट एंट्री में अपनी फिल्‍म ऑस्‍कर के लिए भेज सकते हैं। भारत की तरु से ऑफिशियली फॉरेन फिल्‍म कैटेगरी में अब तक सिर्फ तीन फिल्‍में भेजी गई हैं। जिनमें ‘मदर इंडिया’,,सलाम बॉम्‍बे और ‘लगान’ शामिल हैं। हालांकि इस कैटेगरी में भारतीय फिल्‍म ने आज तक कोई अवॉर्ड नहीं जीता है।

आइए आपको बताते हैं कि अब तक भारत की तरफ से फिल्‍म इंडस्‍ट्री ने किस कैटेगरी में अचीवमेंट हासिल किए हैं। 1982 में भानु अथैया को गांधी फिल्‍म के लिए बेस्‍ट कॉस्‍ट्यूम डिजाइनर का अवॉर्ड मिला था। 1991 में मशहूर फिल्‍ममेकर ‘सत्‍यजीत रे’ को ऑनरेरी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला था। साल 2008 में ए. आर. रहमान को स्‍लमडॉग मिलेनायर के ‘जय हो’ गाने के लिए अवार्ड मिले थे। इसी फिल्‍म के लिए रेसेलसेल पोकुट्टी की बेस्‍ट साउंड मिक्सिंग के लिए अवॉर्ड मिला था। साल 2023 में भारत ने दो ऑस्‍कर अवॉर्ड जीते। आर. आर. आर. के नाटू नाटू सॉन्‍ग के लिए एम. एम. किरवानी को बेस्‍ट ओरिजनल सॉन्‍ग का अवॉर्ड मिला। वहीं गुनीत मोंगा- कार्तिकी गोंजाल्विस ने बेस्‍ट डॉक्‍यूमेंट्री शॉट फिल्‍म का अवॉर्ड जीता था।

निशा सिंह एक पत्रकार और लेखक हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिलेमें हुआ। दिल्‍ली और जयपुर में सीएनबीसी, टाइस ऑफ इंडिया और दैनिक भास्‍कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्‍थानों के साथ काम करने के साथ-साथ लिखने के शौक को हमेशा जिंदा...