दरवाजा गैस क्रेटर को डो टू हेल के नाम से जाना जाता है
इसमें आग धधकना पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। हालांकि तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति ने इसे बंद करने का ऐलान किया है।
Darvaza Gas Crater: ‘नरक का दरवाजा’ यानी गेट्स ऑफ हेल के नाम से मशहूर तुर्कमेनिस्तान का प्राकृतिक गैस क्रेटर सोशल मीडिया पर भी छाया रहता है। राजधानी अश्गाबात से करीब 160 मील उत्तर में स्थित यह रेगिस्तानी गड्ढ़ा दशकों से जल रहा है। इसमें आग धधकना पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। हालांकि तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति ने इसे बंद करने का ऐलान किया है।
1971 के गैस-ड्रिलिंग की असफलता के चलते यह गड्ढा बना। मान्यता है कि वैज्ञानिक रेगिस्तान में प्राकृतिक गैस के भंडार को खोज रहे थे। इसका करीब 60 मीटर व्यास और करीब 20 मीटर गहराई है। गैस फैलें नहीं, इसके लिए भूवैज्ञानिकों ने इसमें आग लगा दी थी। वैज्ञानिकों ने सोचा था कि कुछ सप्ताह में गैस जल खत्म हो जाएगी, लेकिन इस गहरे और चौड़े गड्ढा में आग अभी भी जल रही है और तब से इसे बुझाने के असफल प्रयास किए गए हैं।
