Shark Tank Judge: शार्क टैंक इंडिया के फेमस जजेस से एक हैं लैंसकार्ट के सीईओ पीयूष बंसल हैं। बिजनेस में करोड़ों टर्नओवर पाने वाले पीयूष एक आम ज़िंदगी जीना पसंद करते हैं। उन्हें फैन फॉलोइंग बिलकुल पसंद नहीं हैं। पीयूष बंसल अपनी सादगी के लिए लोगों के दिलों पर छाप छोड़ चुके हैं। शो में उनका ऑनेस्ट फीडबैक, शो में आए उघमियों को प्रोत्साहित करने का तरीका, उन्हें सभी से अलग बनाता हैं।
Shark Tank Judge: फिर से जज नहीं बनाना चाहते थे पीयूष बंसल
पीयूष बंसल फिर से शार्क टैंक के जज नहीं बनना चाहते थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि शो के बाद उनकी बहुत ज्यादा लोकप्रियता बढ़ गई थी, जो वह नहीं चाहते थे। वह अपने परिवार के साथ एक सामान्य जीवन जीना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, “शो में फिर से न आने के सोचने का कारण बहुत ज्यादा फैन फॉलोइंग थी। मैं मानता हूं कि चमक थोड़ी देर के लिए होती है और मैं ऐसी जिंदगी नहीं चाहता था। मैं अपने और अपने ढ़ाढ़ई साल के बेटे के लिए एक सामान्य जीवान चाहता था, लेकिन लोगों की आंखों में चमक देखकर मैंने हां कह दिया।”
ऐसे खास बन गए पीयूष
आम ज़िंदगी जीने में विश्वास रखने वाले पीयूष बंसल की ज़िंदगी शार्क टैंक के ऐसे कौन से मोड़ से बदली और वो सबके पसंदीदा इंसान बन गए- ये वो मोड़ था जब शार्क टैंक में कंटेस्टेंट के रूप में आए जुगड़ू कमलेश की डील पीयूष बंसल के साथ फ़ाइनल हुई थी। कमलेश के साथ-साथ देश को भी एक नायक मिल गया था और कमलेश के साथ-साथ पीयूष बंसल भारत में हीरो के रूप में उभरे थे।
इसके बाद कई कंटेस्टेंट आए, जिसका सभी ने मज़ाक बनाया लेकिन पीयूष बंसल उनमें से एक थे जो सभी में उनके सपनों को पूरा करने के लिए जुनून भरने का प्रयास करते रहें। शो के दौरान ऐसे कई मौके आए जब वो किसी आइडिया में इन्वेस्ट नहीं कर सकते थे, तो उन्होने अपना नंबर साझा कर मदद का आश्वासन भी दिया।
ऑनलाइन चश्मे बेचकर खड़ी की कंपनी
शार्क टैंक के ये जज बिजनेस की दुनिया में काफी मशहूर हैं। पीयूष बंसल का जन्म दिल्ली के एक मध्यमवर्गील परिवार में हुआ था। इन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई एमसी गिल यूनिवर्सिटी से की और फिर आईआईएम बैंगलोर से पोस्ट-ग्रेजुएशन किया। इसके बाद पीयूष।ने ऑनलाइन चश्मे बेचने का प्लेटफार्म ‘Lenskart.com’ शुरू किया। पीयूष बंसल की उम्र 37 साल है। वे करीब 600 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक बताए जाते हैं।
सामाजिक सेवा में भी योगदान
पीयूष की सोच न केवल पैसे कमाने पर निर्भर करती हैं बल्कि वो सामाजिक सेवा में भी विश्वास रखते है। इसीलिए उन्होंने लैंसकार्ट फाउंडेशन से दिल्ली के तुगलकाबाद में अपना पहला चाइल्ड आई केयर सेंटर खोला हैं। उन्होने शुरुआती 4 महीनों में ही 3100 बच्चों की स्क्रीनिंग की है। इन सभी स्क्रीनिंग में से 1951 बच्चों में आँखों की समस्या पाई गई। इन सभी का जरूरत के अनुसार मुफ्त इलाज चलाया गया व मुफ्त ग्लासेस भी दिए गए।
तो कुछ इस तरह से शार्क पीयूष बंसल घर-घर पहचाने जाने लगे हैं और उनकी सादगी के हर कोई कायल बने हुए हैं।
