जीवन की दौड़भाग में एक गृहलक्ष्मी बहुत से रोल अदा करती है। कभी मां बनकर, कभी बेटी बनकर और कभी बहु बनकर। मगर इन सबसे परे उनकी अपनी भी एक पहचान है। तो आइए आज हम रोशनी डालते हैं डाॅ पूजा दीवान के जीवन पर। पूजा पेशे से एक गायनोकोलॉजिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ
हैं। साथ साथ एक मंझी हुई मशहूर गायिका, एक पत्नी और एक मां भी हैं। तो आज हम उनसे बातचीत के कुछ अंश आपके समक्ष साझा करने जा रहे है और आपको बताएंगे कि किस प्रकार डाॅक्टरी के साथ साथ वो अपना घर परिवार कैसे मैनेज करती हैं। इसके अलावा वो संगीत को किस प्रकार से वक्त दे पाती है। तो आइए डालते हैं
आप खुद को एक शब्द में कैसी गृहलक्ष्मी मानती हैं।
मैं एक मल्टी टास्कर गृहलक्ष्मी हूं। मैं मानती हूं की हर महिला, हर औरत, हर गृहणी मल्टी टास्कर है। हमें एक साथ विभिन्न कार्य करने होते हैं। हम घर संभालते हैं, परिवार संभालते हैं, बच्चों को भी देखते हैं और साथ ही साथ फोन पर अपना काम भी कर रह हैं। एक ही समय पर जब एक इंसान बहुत से कार्यो को करता है, तो उसे मैं मल्टी टास्कर मानती हूं। मेरे हिसाब से हर औरत मल्टी टास्कर है।
कार्यक्षेत्र के हिसाब से
मैं पेशे से एक चिकित्सक हू, गायनीगोलोजिस्ट हूं और इंफर्टिलिटी टेस्ट टयूब बेबी की स्पेशलिस्ट हूं और गायनी इंडोस्कोपिक सर्जन भी हूं। घर तो हमेशा आपका समय मांगा है। तो जब आप प्रोफेशनली काम करती हैं, तो आपको दोनों चीज़ों को मैनेज भी करना पड़ता है। डाक्टर के पास एमरजेंसी हमेशा रहती हैंै। मैं उसी हिसाब से काम को वक्त देती हूं ताकि कार्यक्षेत्र पर कोई भी चीज़ अनमैनेजड न हो।
इतनी भागदौड़ के बीच आप घर और अपना प्रोफेशन कैसे मैनेज करती हैं।
अगर आप दोनों में तालमेल बनाकर चलेंगी, तो आप हमेशा खुशहाल रहेंगी। घर को हमेशा समय देती हूं, ताकि हर काम समय पर हो सके और अपने पेशे के लिए भी पूरा वक्त निकालती हूं ताकि वो व्यथित न हो सके।
गृहलक्ष्मियों के लिए आपके पास क्या टिप्स है, कैसे वो मैनेज अपने घर और प्रोफेशन को मैनेज करें।
मेरा जो पेशा है, वो डाॅक्टरी का है। हमारी शैली क्रिया यानि आॅपरेशन तो अस्पताल में हमें जाकर करने पड़ते हैं। लेकिन चिकित्सा यानि कंसलटेशन हम घर पर करते हैं, चाहे वीडियो कंसलटेशन करें यां फोन पर बात कर सकते हैं। अभी आपके समय में बहुत सी चीजें जुड़ रही हैं। क्यों की मेरे हिसाब से वर्क फ्राम होम बहुत ही खुशहाल चीज़ है। मैं इसे खूब इंजॅाय करती हूं।
जिंदगी की तरफ आपका क्या नज़रिया है
एक तरफ मैं ये मानती हूं कि हमारा हर पल वैल युटिलाईज़ होना चाहिए। दूसरी तरफ जो हमारा गृहलक्ष्मी का रूप है। तो मेरा दिल दिमाग ये कहता है कि अगर मेैं अपने वर्तमान को यानि उस क्षण को एंजाय कर रही हूं, तो हमारा जीवन सफल माना जाएगा। इसलिए हम जहां जिस वक्त है, उस काम को पूरा समय दें। दूसरी चीजों के बारे में मत सोचें।
हर इंसान की जिंदगी बहुत से रोल अदा करने पड़ते हैं, तो आप समय कैसे मैनेज करती हैं।
जब मैं बाहर होती हूं, तब भी मेरा घर चल रहा होता है और जब मैं घर पर होती हूं तब भी मैं अपने प्रोफेशन को पूरा समय देती हूं। मंै मानती हूं तकनीक ने काफी हद तक हमारी जिंदगी को जकड़ लिया है। आज के समय में आप हर पल की मानिटरिंग कर सकती है। मेरे हिसाब से दोनों चीजों को मैनेज करना आसान है। कहा जाता है कि जो सबसे ज्यादा व्यस्त रहता है वही सबसे अच्छा वक्त मैनेज कर सकता हैं। तो समय के बीच तालमेल बैठाना आपके अपने हाथ में है।
किचन में आप कितना वक्त देती है और रसोई में हाईजीन और साफ सफाई को लेकर आपके क्या फंडे हैं।
रसोई हमेशा स्वच्छ होनी चाहिए। कहते हैं रसोई घर में ईश्वर का वास होता है। बहुत से घरों में तो नंदलाला को रसोई घर में ही स्थापित किया जाता है। इसमें कोई दोराय नहीं कि रसोई को साफ रखना चाहिए। आप काम समेटते हुए करती हैं, यां फैलाते हुए करती हैं, यां फिर फैलाती जाती हैं। सबका अपना अपना काम करने का तरीका होता है। मैं पकाने के साथ साथ समेटती रहती हूं ताकि एक समय के भीतर सब कुछ सिमट जाए। आपको पूरी फूर्ति से काम करना पड़ता है। आपको अपने डोमेस्टिक हैल्पर्स पर पूरी तरह से डिपेंड नहीं रहना चाहिए। आपको अपना काम खुद करना आना चाहिए। अगर आपको काम आएगा तभी तो गाईड कर सकेंगी। अगर आपको नहीं आता होगा काम तो आप अपने कार्य में ज्यादा समय लगा देंगी।
किचन और प्रोफेशन के बाद आप मी टाईम कैसे स्पैंड करती हैं।
मी टाईम बहुत ज़रूरी टाईम है। अगर हमारे पास मी टाई हो तो हम कई चीजें कर सकते हैं। सबसे पहले आत्म चिंतन कर सकते हैं। इस वक्त में आप खुद को सेल्फ डिसकवर कर सकते हैं और हम इनसाईट फुलनेस कर सकते हैं। हमें अपने लिए वक्त चाहिए। आम लोगों का मानना है कि ये मेरा टाईम है और इसमें मैं जो चाहूं वो करूं। अगर उस हिसाब से देखू ंतो उस तरह से मेरे पास मेरा मी टाईम नहीं है। क्यों की मेरा शौंक हमेशा से रहा है संगीत। मैं एक गायिका हूं। मैंने शास्त्रीय संगीत सीखा हुआ है। भक्ति और फयूज़न पर मेरी दो एलबम रिलीज़ हो रही है। अगर इसको मैं कार्य मानती हूं तो मेरे पास मी टाईम नहीं है। मेरा कोर प्रोफेशन तो मेडिकल ही है। मगर संगीत में बीते हुए पल ही मेरा मी टाईम है।
आपको संगीत के लिए कैसे वक्त मिलता है।
समय की बहुत कमी है। समय को वैल्यू करना पड़ता है। इसके साथ साथ आपके अंदर फोकस, एफर्ट, क्वालिटी और परफेक्शन होना जरूरी होता है। जैसे की हर बच्चे के साथ होता है वैसे ही जब मैं पांचवी कथा में थी, तो मुझे टीचर ने पूछा कि आप क्या बनना चाहते हो, तो मैंने कहा कि मैं डाॅक्टर बनना चाहती हूं। पांच साल की उम्र से हारमोनियम और शास्त्रीय संगीत सीख रही थी। मेरी हाॅबी हमेशा यही रही कि मैं कुछ भी ऐसा करूं कि हमें उससे आउटपुट भी मिले। म्यूज़िक थैरेपी पर भी मैं काम रही हूं। इन दिनों मैं राग से रोग चिकित्सा पर काम कर रही हूं। मेरे बहुत से पेंशेंट तनाव ग्रस्त रहते थे और उन्हें म्यूज़िक थैरेपी से बहुत सहायता मिली। मैंने अपनी पहली भजनों की एलबम अपने माता पिता को भेंट की। मुझे हमेशा फैमिली का पूरा सपोर्ट मिला है। मैंने धीरे धीरे संगीत को डाॅक्टरी से जोड़ा।
आपकी जिंदगी में फैशन के क्या फंडे हैं।
फैशन वो होता है कि जिसे आप गाईड करते हैं। कुछ भी पहनें, जिसमें आप क्लासी दिखे। एक बाहरी ब्यूटी है, जो लोगों को आकर्षित करती है और अंदरूनी ब्यूटी बाहर ज़रूर नज़र आती है और वो दूसरों की नज़रों में झलकती है।
रैपिड फायर राउंड में आपके नज़रिए से कौन सा खिताब आपकी जिंदगी में किसे सूट करता है।
सहनशील गृहलक्ष्मी
हर मां सहनशील होती है। मां उम्र भर सहती है और बच्चे को सिखाती भी है।
दबंग गृहलक्ष्मी
मैं हूं एक दबंग गृहलक्ष्मी
फुर्तीली गृहलक्ष्मी
मेरी मां बेहद फुर्तीली गृहलक्ष्मी है।
जिंदादिल गृहलक्ष्मी
मेरी बुआ एक जिंदादिल गृहलक्ष्मी है और वो जीवन को बहुत अच्छे से जीती हैं, हौसला बढत्राती है और एक प्रेरणा हहैं।
