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गृहलक्ष्मी नवंबर २०१४
दिल की बात आपके साथ
हते हैं वक्त का पहिया अपनी रफ्तार से चलता रहता है, वो किसी के लिए नहीं रुकता है। इसकी चाल में जिसने अपनी चाल को ढ़ाल लिया वो तो जमाने के साथ चलता है लेकिन जिसके कदम धीरे हो जाएं वो जमाने की रेस में पीछे रह जाता है। समय के साथ सिर्फ वक्त ही नहीं बदलता, वक्त के साथ बदल जाती हैं सोच व मान्यताएं भी। अपने करियर के बीते 26 वर्षों के अनुभव में मैंने सबसे ज्यादा दुल्हन के स्वरूप को बदलते देखा है।
आप सोच रहे होंगे कि ये मैं भला कैसी बात कह रही हूं… पर ये सच है। बेशक दुल्हन का अर्थ आज भी वही है जो पहले था पर पहले इस नाम में जो हया छिपी थी वो अब काफी हद तक खत्म हो चुकी है। आज की लड़की अपने शादी के पल को खुलकर जीती है, वो शर्म या हया के चलते उस मौके को गंवाती नहीं है। जो मेरे हिसाब से गलत भी नहीं है क्योंकि जिस तरह से परिस्थितियां बदल रही हैं, उसी हिसाब से सोच और धारणाओं का भी बदलना लाजि़मी है।
ये परिस्थितियां ही तो हैं कि पहले हमारे घर के बड़े-बुजुर्ग मिलकर शादी के लिए अपने बच्चों का रिश्ता तय किया करते थे। दूल्हा-दुल्हन शादी के बाद ही एक-दूसरे से मिलते और इसके बाद ही उन्हें आपस में प्रेम होता था। लेकिन आज के दौर में लड़के-लड़कियां पहले एक-दूसरे को पसंद करते हैं, फिर आपसी ताल-मेल होने के बाद… अगर ख्यालात व पसंद इत्यादि मिलती हो, तभी दोनों जिंदगी एक-साथ गुजारने का फैसला करते हैं और तभी शादी की बात आगे पहुंचती है।
ऐसा करने से लड़की के मन की सारी झिझक निकल जाती है और वो जिस लड़के के समक्ष शादी के दिन खड़ी होती है, उससे पहले भी कई बार मुलाकात कर लेने के कारण उसकी निगाहें लाज या शर्म से नीचे होने की बजाय खुशी से उठी हुई होती है।
गौर किया जाए तो इसमें गलत भी कुछ नहीं, ये हर हाल में सही है। प्रभु श्री राम और माता सीता ने एक-दूसरे को देखा और आकर्षित होकर मन ही मन में एक-दूसरे को पति-पत्नी मान लिया। पार्वती जी ने भी शिव जी को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की और श्रीकृष्ण एवं राधा तो साक्षात प्रेम रूप में ही अवतरित हुए। इन सभी बातों से साबित होता है कि हर युग में लड़की को अपने लिए स्वयं वर चुनने की इज़ाजत रही है।
केवल वर के चुनाव में ही नहीं आज हर एक लड़की अपने रंग-रूप को लेकर भी बहुत जागरूक हो गई हैं। शादी की बात पक्की होते ही लड़कियां इंटरनेट पर या अपनी किसी खास सहेली से मशविरा करके अपने लिए अच्छे से अच्छे कॉस्मेटिक क्लीनिक का चुनाव करती हैं। वहां वो केवल चेहरे के लिए ही नहीं बल्कि अपनी पूरी बॉडी की रंगत को निखारने के तरीकों की जानकारी लेती हैं और जो उनके लिए सही है, उसे चुनती भी हैं। इतना ही नहीं अपनी खुशी को मन की झिझक पर हावी करके वे बॉडी के लिए कई सर्विस जैसे बिकनी वैक्स, बॉडी ब्लीच, बॉडी पॉलीशिंग आदि को भी अपनाती हैं ताकि शादी के दिन उसके कॉन्फिडेंस में कोई कमी न आ सके।
पिछले दशक या उससे पहले तक लड़कियां शादी की बात पक्की होते ही घर पर खुद-बा-खुद उबटन लगाकर अपने रंग को निखार लिया करती थी या फिर अपनी भाभी सहेलियों से पूछ-पूछकर घरेलू नुस्खे अपनाकर अपनी खूबसूरती को निखारने के उपाय करती थी। पार्लर जाकर बिकनी वैक्स करवाना तो दूर की बात है वो बॉडी की सर्विस लेने में ही शर्म महसूस करती थी। शादी के दिन किए जाने वाले मेकअप की बात या तो बड़ी बहन या फिर भाभी तय किया करती थी। पार्लर की शक्ल तो वो शादी वाले दिन ही देखती थी।
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या गलत है और क्या सही, तो मैं आपको बता दूं कि गलत न तो वो था और ना ही गलत ये है। सब कुछ वक्त के अनुसार चल रहा है। वक्त की रफ्तार के संग चाल मिलाती आज की लड़कियों का भी दुल्हन स्वरूप उतना ही ह्रश्वयारा व खूबसूरत है जितना कि पुराने जमाने में हुआ करता था।
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वक्त के साथ दुल्हन के सजने-संवरने के अंदाज़ चाहे कितने ही बदल गए हों लेकिन शादी के दिन सबसे खूबसूरत दिखने का सपना पहले भी उनकी आंखों में बसता था और आज भी बसता है।
भारती तनेजा
गोल्डन लेडी ऑफ इंडिया
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