Arjun Kapoor
Arjun Kapoor Credit: Instagram/Arjun Kapoor

Arjun Has Hashimoto’s Disease: “इश्कजादे”, “गुंडे” और “2 स्टेट्स” जैसी फिल्मों एक्टिंग करने के लिए फ़ेमस बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर ने हाल ही में हाशिमोटो रोग से अपने संघर्ष के बारे में खुलकर बात की है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो  थायरॉयड हेल्थ, सेल्फ केयर और बॉडी पॉजिटिविटी से जुड़ी है। आइए आज इस आर्टिकल में हम हाशिमोटो रोग के बारे में हर डीटेल जानेंगे। 

इसका पूरा नाम हाशिमोटो थायरॉयडिटिस है, जो एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। इसमें इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉयड ग्रंथि पर हमला करती है। इससे क्रॉनिक इनफ्लेमेशन होता है, जिससे थायरॉयड की आवश्यक हार्मोन बनाने की क्षमता कम हो जाती है। समय के साथ, यह अक्सर हाइपोथायरायडिज्म का कारण बनता है, जहां थायरॉयड कम एक्टिव हो जाता है।

इसके मुख्य लक्षणों में वजन बढ़ना, थकान, बालों का पतला होना और झड़ना, डिप्रेशन और मूड स्विंग, ठंड बर्दाश्त न करना, सूजा हुआ चेहरा, मांसपेशियों में कमजोरी, धीमी हृदय गति, कब्ज और ड्राई स्किन है। 

उनके बॉलीवुड डेब्यू से बहुत पहले किशोरावस्था के दौरान अर्जुन कपूर को पता चला कि उन्हें हाशिमोटो रोग है। उन्होंने खुल कर स्वीकार किया है कि इस बीमारी ने उनके वजन, एनर्जी लेवल और कॉन्फिडेंस को काफी हद तक प्रभावित किया है। अर्जुन ने अपने युवावस्था में मोटापे से संघर्ष किया, उनका वजन सबसे ज्यादा 140 किलो था।

डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद अर्जुन को हाशिमोटो के कारण अपने सुस्त थायरॉयड फंक्शन के कारण वजन कम करना मुश्किल लगता था। इस बीमारी के कारण उन्हें अक्सर थकान महसूस होती थी, जिससे वर्कआउट और फिजिकलएक्टिविटी चैलेंजिंग लगता था। ग्लैमर से प्रेरित इंडस्ट्री में अधिक वजन की वजह से उन्हें खुद पर संदेह और असुरक्षा की भावना पैदा हुई, जिसके बारे में भी अर्जुन ने खुलकर बात की है।

अर्जुन कपूर का वजन बढ़ना सिर्फ लाइफस्टाइल चुनाव का नतीजा नहीं था, बल्कि यह उनके कम एक्टिव थायरॉयड से भी जुड़ा था, जो हाशिमोटो रोग का एक लक्षण है। थायरॉयड ग्रंथि, जो मेटाबॉलिज़्म को कंट्रोल करती है, हाशिमोटो के रोगियों में काफी धीमी हो जाती है, जिससे स्ट्रिक्ट डाइट और एक्सरसाइज के साथ भी वजन कम करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

अर्जुन ने इलाज के लिए एक प्लान बनाया, जिसमें शामिल थे:

थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (आमतौर पर लेवोथायरोक्सिन)।

थायरॉइड हेल्थ और ओवरऑल मेटाबॉलिज़्म का सपोर्ट करने के लिए डाइट में बदलाव।

फंक्शनल ट्रेनिंग, कार्डियो और वेट लिफ्टिंग सहित रेगुलर एक्सरसाइज।

क्रॉनिक बीमारी के साथ जीने के लिए इमोशनल काउन्सलिंग।

हाशिमोटो के रोगी अक्सर इस डाइट को फॉलो करते हैं- 

ग्लूटेन फ्री (ग्लूटेन सेन्सिटिविटी आम है)।

एंटी-इंफ्लेमेट्री फूड्स (सब्जियां, फल, हेल्दी फैट) पर जोर दें।

प्रोसेस्ड फूड्स और रिफाइन्ड चीनी का सेवन कम। 

कभी-कभी डेयरी का सेवन भी कम, खासकर अगर लैक्टोज इनटोलरेंट हों।

हाशिमोटो के बावजूद अर्जुन ने बॉलीवुड में एंट्री करने से पहले 50 किलो से अधिक वजन कम करने की कोशिश की। फ़ेमस हो जाने के बाद भी अर्जुन हाशिमोटो रोज को मैनेज करने के साथ रेगुलर जांच, दवा और लाइफस्टाइल में बदलाव को मेटेन करते हैं।

स्पर्धा रानी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज ने हिन्दी में एमए और वाईएमसीए से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है। बीते 20 वर्षों से वे लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट लेखन में सक्रिय हैं। अपने करियर में कई प्रमुख सेलिब्रिटीज़ के इंटरव्यू...