जरूरतमंदों को देना चाहती हैं बेहतर जीवन 

दक्षिण एशिया समेत कई अन्य महाद्वीपों पर अपनी कंपनी सबा इंडस्ट्रीज़ चला रही मालिनी सबा एक सफल उद्यमी हैं। उनका मानना है कि एक अच्छा बिज़नेस चलाकर लोगों की सेवा की जा सकती है। इसी सोच के साथ मालिनी अपनी कंपनी के जरिए देश-विदेश हर जगह इस कोशिश में जुटी हैं कि सबको स्वास्थ, मानव अधिकार और शिक्षा मिले। मालिनी की कंपनी दुनियाभर में चावल, लौह अयस्क और सोना का व्यापार करती है। 

मालिनी बचपन से ही लोगों के लिए काम करना चाहती थी। मलेशिया में पली-बढ़ी मालिनी को बचपन से ही कड़ी मेहनत और अच्छे संस्कारों से परिचय कराया गया और अपने ईमानदार आचार विचार और मेहनत से ही वो एक सफल उद्यमी बनीं। अपने परिवार में उन्होंने शुरू से अपने पेरेन्ट्स को जरूरतमंद लोगों के लिए काम करते देखा था और वो खुद भी बचपन से जरूरतमंद बच्चों को किताबें और कपड़े लेकर देने जाया करती और उनके साथ काफी समय भी बिताती थीं। अपने इन्हीं अनुभवों को वो आज के अपने कार्यों का आधार मानती हैं।

बेहतर जीवन देने की है कोशिश

साल 2002 से ही मालिनी कई बड़े, कुछ अकेले और कुछ दूसरे समूहों के साथ मिलकर, प्रोजेक्ट्स के माध्यम से उन इलाकों में लोगों को स्वास्थ सेवाएं मुहैया करा रही हैं जहां गरीबी की वजह से लोग किसी भी तरह की बीमारी का सही उपचार नहीं करा पाते हैं। इन लोगों के लिए एचआईवी से लेकर पाचन से जुड़ी बीमारियां, स्त्री रोग से जुड़ी परेशानियों को देखने के लिए कई चिकित्सकों की सेवा उपलब्ध करवाया जाता है। मालिनी कहती हैं कि जिन सुविधाओं को पाते हुए हम अब उनकी ओर ध्यान भी नहीं देते, संसार में ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें वो मूलभूत सेवाएं आजतक नहीं मिल सकी है। मैं ऐसे लोगों को बेहतर जीवन देना चाहती हूं।

खाना बनाना और खिलाना है पसंद

सबा इंडस्ट्रीज़ दुनियाभर में पांच लाख टन चावल का निर्यात करता है और शायद इसलिए उद्योग और समाज सेवा के अलावा मालिनी को खाना बनाने का भी शौक है और उन्होंने अपनी झटपट बनने वाली रेसिपी की एक किताब भी लिखी है जिसका नाम है, ‘द ऐब्रिबिएटेड बुक’। इस किताब में उन्होंने दक्षिण एशिया में बनने वाली आसान रेसिपीज़ को शामिल किया है। 

 

अपने काम से लोगों के व्यक्तित्व में जोड़ती हैं चार-चांद

 

कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में अपना नाम बना चुकी डॉ. निदा खतीब बताती हैं कि पढ़ाई के बाद मैं एक क्लिनिक में काम सीखने लगी, अगर कोई रुट केनाल का मरीज आता तो उन्हें इस काम में बिलकुल मन नहीं लगता था, लेकिन यदि मेरे पास किसी टूटे हुए दांत को सही करने या किसी की स्माइल को अच्छा बनाने का कोई काम आता तो मुझे काम करने में मज़ा आता था। उस दिन मुझे काम खत्म करने का मन ही नहीं करता था। और यही वो समय था जब उन्हें लगा कि वो इसी क्षेत्र में आगे जाएंगी।

स्माइल बहुत कुछ बोलता है

किसी इंसान के चेहरे पर अगर एक असरदार मुस्कुराहट है तो उसका व्यक्तित्व बहुत लोकप्रिय होता है। इसकी दो वजह होती है। पहला तो ये कि वो सेहतमंद है और दूसरा ये कि वो पूरी तरह से कॉन्फिडेंट है। आजकल सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लगभग सभी लोगों पर अच्छी स्माइलिंग फेस वाली फोटोज़ अपलोड करने का प्रेशर रहता है और यही वजह है कि यंगस्टर अपनी फोटो और कैमरा एंगल के प्रति बहुत सजग रहते हैं। लेकिन ये सजगता ओरल हेल्थ के प्रति हो तो अच्छी स्माइल के साथ-साथ अच्छे दांत भी हमेशा साथ निभाते हैं। 

 

महिलाओं के सामने हमेशा रहती है चुनौती

हमारे यहां महिलाएं हमेशा चुनौतिपूर्ण स्थिति में होती है क्योंकि वो हर काम को सबसे अच्छी तरह करने की कोशिश करती रहती हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि वो इस बात को समझे कि जरूरी नहीं कि वो सारे कामों में निपुण हो, या वो जो भी करे वो बेस्ट करे। ऐसा मान लेने से महिलाओं की लाइफ ज्यादा आसान हो जाएगी। महिलाएं अपने लिए समय निकालें। उच्च शिक्षा पाने की कोशिश करें और फिर जीवन में जो हासिल करना चाहती हैं वो करें।

 

चिकित्सकों के बिखरे समुदाय को जोड़कर समाज के लिए कर रही हैं काम

प्रोफेशन से रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुनीता दुबे अपने काम के प्रति जितनी ईमानदार हैं, उतनी ही पैसनेट समाज, डॉक्टर्स और पेशेन्ट्स के हक के प्रति काम करने के लिए भी हैं। आज वो मेडस्केप इंडिया, आर्यन मेडिकल एंड एजुकेशनल ट्रस्ट की संस्थापक अध्यक्ष हैं। डॉ. सुनीता ने शुरुआत तो डॉक्टर्स के हितों के दिशा में काम करने से किया था मगर महान वैज्ञानिक और देश के पूवर्ड्ड राष्ट्रपति दिवंगत अब्दुल कलाम जी ने दो मुलाकातों में ही उन्हें समाज के बड़े तबके के लिए सोचने की प्रेरणा दी और वो समाज की सेवा से भी जुड़ गई।

सामंजस्य बिठाने की कोशिश करती हूं

डॉ. सुनीता अस्पताल. मेडस्केप इंडिया के तहत कई समुदाय के लिए अलग और नए तरह के कार्य करने के साथ-साथ एक पत्नी और दो बच्चों की मां भी है। वो कहती हैं कि वो हर दिन अपने काम और घर-परिवार के लिए समय निकालने के लिए सामंजस्य बिठाने की कोशिश करती रहती हैं। जब घर पर होती हैं तो बच्चों के साथ, उनकी जरूरतों पर पूरा ध्यान देती हैं। और जब बाहर निकलती हैं तो अपने काम पर फोकस करती हैं।

कर चुकी हैं कई अनोखे कैंपेन 

पिछले चौहद सालों से चिकित्सकों के बिखरे समुदाय को एक साथ लाने, एक दूसरे से मिलाने और उनके हितों के साथ-साथ आम लोगों के स्वास्थ्य पर काम कर रही डॉ. सुनीता ने अब तक कई तरह के नए और अनोखे कैंपेन के माध्यम से अपने काम को आगे बढ़ाया है। उन्होंने डॉक्टर्स एंथम बनाया जिसे देशभर में पसंद किया गया। चिकित्सकों को प्रोत्साहित करने के लिए अवॉर्ड्स की शुरूआत की। अनोखी पहल कैंपेन के जरिए वो अब तक कई वंचित परिवारों को मुफ्त इलाज मुहैया करवा चुकी हैं और ये काम लगातार चलता ही रहता है। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने की दिशा में किए गए उनके काम की सराहना पूर्व प्रधानमंत्री प्रणव मुखर्जी व नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने भी किया है।

महिलाएं खुद आगे बढ़ें

डॉ. सुनीता कहती हैं कि जरूरी है कि प्रत्येक महिला ये समझे कि अगर उसे जीवन में कुछ भी पाना है तो इसके लिए उसे खुद आगे बढ़ना होगा। चीज़ो को खुद बदलना होगा क्योंकि जब आप खुद कुछ करने की ठान लेंगी, तो जरूर कुछ कर पाने मे सक्षम होगीं। हर महिला को ये जानना चाहिए कि हमारे अंदर भी अपार शक्तियां हैं, उन्हें पहचान लें तो कुछ भी कर सकते हैं। किसी भी महिला को अपनी खुशी के लिए किसी और पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

यह भी पढ़ें –बॉलीवुड मॉम्स के कुछ ख़ास टिप्स