Skydiving grandma kim
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Summary: 86 साल की किम नॉर ने पूरी की 1,000वीं स्काईडाइव, मिला गोल्डन विंग्स अवॉर्ड

86 साल की उम्र में 1,000वीं स्काईडाइव पूरी कर किम नॉर ने दुनिया को प्रेरित कर दिया। आसमान से उनका यह साहसी जंप जुनून और जिंदादिली की मिसाल बन गया।

Skydiving Grandma 1000th Dive: जिस उम्र में ज़्यादातर लोग ज़िंदगी को ‘अब बस आराम’ की परिभाषा में बांध देते हैं, उसी उम्र में किम नॉर ने आसमान से छलांग लगाकर पूरी दुनिया को याद दिला दिया कि सपनों की एक्सपायरी डेट नहीं होती। 86 साल की उम्र में अपनी 1,000वीं स्काईडाइव पूरी कर चुकी किम नॉर आज सिर्फ़ एक इंसान नहीं, बल्कि हौसले और जुनून की उड़ती हुई मिसाल बन चुकी हैं।

किम नॉर को आज दुनिया “स्काईडाइविंग ग्रैंडमा” और “स्काईडाइविंग डीवा” के नाम से जानती है, लेकिन उनकी यह पहचान अचानक नहीं बनी। उनका आसमान से रिश्ता बचपन में ही जुड़ गया था। महज़ पांच साल की उम्र में जब उन्होंने अपने अंकल का सेकंड वर्ल्ड वॉर का पैराशूट देखा, तभी उनके मन में उड़ने का सपना जन्म ले चुका था।

हालांकि, उस सपने को पंख मिलने में वक्त लगा। 1959 में, सामाजिक बंधनों और पारिवारिक रोक-टोक के बावजूद, किम ने अपने माता-पिता के हस्ताक्षर तक जालसाजी से कर पहली छलांग लगाई। यह सिर्फ़ एक जंप नहीं थी, बल्कि उस सोच के ख़िलाफ़ बग़ावत थी जो कहती है कि “यह महिलाओं के लिए नहीं है।”

किम नॉर ने सिर्फ़ स्काईडाइविंग नहीं की, बल्कि इतिहास रचा। वह अमेरिका की पहली महिला पैराशूट टीम का हिस्सा बनीं, जिसने छह वर्ल्ड पैराशूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीते। ऐसे समय में जब महिलाओं की मौजूदगी ही सवालों के घेरे में थी, किम ने ऊंचाइयों से जवाब दिया।

दशकों के करियर में उन्होंने अमेरिका भर के 90 से ज़्यादा ड्रॉप ज़ोन्स से छलांग लगाई, हर बार यह साबित करते हुए कि उम्र शरीर में नहीं, सोच में बसती है।

यह ऐतिहासिक 1,000वीं स्काईडाइव फ्लोरिडा के न्यू वेल्स में पूरी हुई, और इसे और भी ख़ास बना दिया किम के परिवार ने। इस बार वह अकेली नहीं थीं उनकी बेटियां और नाती भी उनके साथ आसमान में थीं। 14,000 फीट की ऊंचाई से यह छलांग सिर्फ़ रोमांच नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाला एक भावनात्मक पल बन गई।

ज़मीन पर परिवार और दोस्त सांसें थामे उनका इंतज़ार कर रहे थे। लैंडिंग के बाद किम की आंखों में खुशी और आवाज़ में उत्साह साफ़ झलक रहा था, “हमने कर दिखाया… यह मेरे लिए अविश्वसनीय है कि वे इतनी दूर से सिर्फ़ इस पल के लिए आए।”

1,000 स्काईडाइव पूरी करने पर किम नॉर को यूनाइटेड स्टेट्स पैराशूट एसोसिएशन की ओर से सबसे बड़ा सम्मान गोल्ड विंग्स अवॉर्ड दिया जाएगा। यह सिर्फ़ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उस ज़िंदगी की मुहर है जो डर से नहीं, जुनून से जी गई। यह सम्मान बताता है कि जब इंसान अपने शौक को ज़िंदगी बना ले, तो उम्र महज़ एक नंबर रह जाती है।

जब किम से पूछा गया कि क्या अब वह रुकेंगी, तो उनका जवाब सीधा था “बिल्कुल नहीं।” उनके लिए स्काईडाइविंग सिर्फ़ एडवेंचर नहीं, ज़िंदगी का तरीका है। वह आज भी आसमान को देखकर वही उत्साह महसूस करती हैं, जो दशकों पहले करती थीं।

किम नॉर की कहानी हमें यह नहीं सिखाती कि सबको स्काईडाइविंग करनी चाहिए, बल्कि यह सिखाती है कि ज़िंदगी को टालने की आदत छोड़नी चाहिए। डर, उम्र, समाज और “लोग क्या कहेंगे” ..ये सब ज़मीन पर रहने वाले बहाने हैं। किम ने दिखा दिया कि अगर दिल उड़ना चाहता है, तो आसमान खुद रास्ता दे देता है।

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...