Summary: प्रभास की नई फिल्म ‘द राजा साब’ पैसा वसूल है या फुस्स?, कहानी से लेकर एक्टिंग तक का पढ़े रिव्यू
साउथ के सुपरस्टार प्रभास की नई फिल्म ‘द राजा साब’ पैन इंडिया रिलीज हो चुकी है और फैंस के बीच इसे लेकर एक्साइटमेंट लेवल चरम पर है। फिल्म में प्रभास के साथ संजय दत्त और निधि अग्रवाल जैसे बड़े कलाकार भी हैं।
The RajaSaab Movie Review: साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास एक बार फिर से बड़े पर्दे पर लौट आए हैं। उनकी फिल्म ‘द राजा साब’ पैन इंडिया रिलीज हो चुकी है। फिल्म में उनके साथ निधि अग्रवाल, संजय दत्त जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का ट्रेलर जबरदस्त था और पोस्टर को भी दर्शकों ने काफी पसंद किया। अब जब हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘द राजा साब’ रिलीज हो चुकी है, तो लोग यह जानने के लिए एक्साइटेड हैं कि क्या यह फिल्म प्रभास के फैंस के लिए पैसे वसूल साबित होगी और कहानी में कितना मज़ा है। तो चलिए जानते हैं फिल्म का पूरा रिव्यू और क्या इसमें देखने लायक पल हैं।
फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी गंगम्मा (जरीना वहाब) और उनके पोते राजू (प्रभास) के इर्द-गिर्द घूमती है। गंगम्मा अल्ज़ाइमर से पीड़ित हैं और अक्सर चीज़ें भूल जाती हैं, लेकिन अपने पति, पूर्व भूत-प्रेत भगाने वाले कनक राजू (संजय दत्त) की यादों को हमेशा संजोकर रखती हैं। राजू अपने दादा की तलाश में हैदराबाद जाता है और वहां उसे पता चलता है कि उसके दादा अब इस दुनिया में नहीं हैं, बल्कि भूत बनकर लौट आए हैं। अब राजू को अपने दादा के अतीत, उनके लालच और भूतिया रहस्यों का सामना करना पड़ता है। पूरी कहानी इसी संघर्ष और सस्पेंस के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां राजू को भूतों, खतरनाक सिचुएशन और परिवार की भावनाओं से निपटना पड़ता है।
कहानी में ट्विस्ट
फिल्म के इंटरवल के बाद में कुछ ऐसे सीन हैं जो थोड़ी रोमांच और क्यूरियोसिटी पैदा करते हैं। इनमें राजू का भूतों से सामना, संजय दत्त का मानसिक खेल और अस्पताल का इमोशनल सीन शामिल हैं। ये पल थोड़ी देर के लिए कहानी में ताजगी और रोमांच जोड़ते हैं और फैंस को बांधे रखते हैं। हालांकि, ये सीन पूरी फिल्म को नहीं बचा पाते, लेकिन हॉरर और फैंटेसी पसंद करने वालों के लिए ये मज़ेदार और देखने लायक एक्सपीरियंस जरूर देते हैं।
अभिनय कितना असरदार है
प्रभास ने लंबे समय के बाद कॉमिक रोल में कोशिश की है और कुछ सीन में हंसी भी आती है, लेकिन कई जगह उनका अभिनय डामाडोल लगता है। जरीना वहाब का एक्टिंग सिंपल है, जो कहानी के इमोशनल हिस्से को जोड़ता है। संजय दत्त ने अपने किरदार में गंभीर और रहस्यमय हैं। मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल और रिद्धि कुमार के रोल छोटे हैं और कहानी में ज्यादा वैल्यू एडेड नहीं है।
डायरेक्शन और गाने
निर्देशक मारुति ने फिल्म को बड़े लेवल में पेश करने की कोशिश की है। कुछ सीन देखने में शानदार और ग्रैंड लगते हैं, लेकिन पूरी कहानी में तालमेल नहीं बैठ पाता। हॉरर, कॉमेडी और इमोशनल सीन के बीच कनेक्शन कमजोर है, जिससे फिल्म का टोन कभी-कभी गड़बड़ लगता है। साथ ही, फिल्म लगभग 3 घंटे लंबी है, जिससे कहानी थोड़ी खिंची हुई लगती है।
फिल्म की खासियत और कमियां
फिल्म की अच्छी बात है प्रभास की कॉमिक कोशिश, जो कुछ सीन में हंसी दिलाती है। इसके अलावा संजय दत्त और जरीना वहाब के सीन भी अच्छे हैं और हॉरर-फैंटेसी वाले दृश्य दिखने में मज़ेदार हैं। लेकिन फिल्म में कुछ कमियां भी हैं कहानी कमजोर है, महिला किरदारों को ज्यादा मौका नहीं मिला और फिल्म थोड़ी स्लो है।
देखें या नहीं
अगर आप प्रभास के फैन हैं या हॉरर-फैंटेसी पसंद करते हैं, तो फिल्म देखी जा सकती है। फिल्म में कुछ मज़ेदार और रोमांचक सीन हैं। लेकिन अगर आप मजबूत कहानी और लगातार मनोरंजन चाहते हैं, तो यह फिल्म उम्मीद के मुताबिक नहीं लगेगी।


