Summary: स्थिर रिश्ते की अनकही पीड़ा
जब रिश्ता सुरक्षित होते हुए भी भीतर बेचैनी दे, तब उसे समझदारी से संभालना या दिशा बदलना ज़रूरी हो जाता है।
Emotionally Distant in Relationship: कई बार रिश्ते में कोई धोखा नहीं, कोई झगड़ा नहीं, पूरी तरह आर्थिक स्थिरता, समाज की मंजूरी, ऊपर से देखने में यह रिश्ता बिल्कुल परफेक्ट है। इस रिश्ते में कोई कमी नजर नहीं आती। पर क्या सच सिर्फ इतना ही है। कई बार पति-पत्नी का जो रिश्ता परफेक्ट और सुरक्षित नजर आता है, उसमें सुकून की कमी हो सकती है। अगर रिश्ते में साथी एक-दूसरे के भावनाओं की अपेक्षा करें तो यह स्थिति हो सकती है। आईए जानते हैं, इस लेख में एक ऐसे रिश्ते को जहां सुरक्षा है पर सुकून नहीं।
सुरक्षित रिश्ता और सुकून की कमी क्या अंतर है
सुरक्षित रिश्ता: जिस रिश्ते में धोखे या असुरक्षा का डर नहीं होता। पार्टनर अपनी जिम्मेदारियां अच्छे से निभाते हैं। समाज में और परिवार में आपका रिश्ता स्वीकार्य हो। सामाजिक स्तर पर देखा जाए तो सुरक्षित रिश्ता एक परफेक्ट रिश्ता है। पर व्यक्तिगत स्तर पर अगर रिश्ते में भावनात्मक समझ की कमी है तो यह एक अधूरा रिश्ता है।

सुकून की कमी: रिश्ते में सुकून की कमी होने का सीधा संबंध भावनाओं की उपेक्षा से है। अगर आप अपने साथी से खुलकर अपनी बात नहीं कह सकते। आपका साथी आपकी भावनाओं को नहीं समझता तो आप अपने रिश्ते में खुद को बेचैन पाते हैं।
क्या हर असुकून भरा रिश्ता गलत है
ऐसा नहीं है कि पति-पत्नी के रिश्ते में कभी कोई झगड़ा, उपेक्षा या एक-दूसरे को समझने में परेशानी ना हो लेकिन इस तरह के अस्थाई परेशानियां बातचीत से सही हो जाती हैं। परंतु जब यही परेशानियां रिश्ते में लंबे समय तक चले। उसे बातचीत से सुलझाने की बजाय इग्नोर किया जाए या भावनाओं को दबाया जाए। तब रिश्ते में या बेचैनी स्थाई रूप ले लेता है और रिश्ते में स्थाई रूप से सुकून की कमी आती है।
अगर आप रिश्ते में थोड़ा एडजस्ट कर रहे हैं तो यह बिल्कुल सही है। लेकिन जब आपके एडजस्टमेंट की हद खुद को भूलने या पूर्ण समर्पण तक पहुंच जाए तो वहां रिश्ते में आप खुद के भावनाओं को उपेक्षित महसूस करते हैं जो कि गलत है।
जब आप रिश्ते को सुरक्षित बनाने के लिए हर समय अपने आप को दबाते हैं। अपनी राय देने या बताने से डरते हैं या बहस से बचने के लिए चुप रहते हैं। तो इस जगह रिश्ते में आप खुद को बिल्कुल अकेला महसूस करते हैं जो कि आपके रिश्ते से धीरे-धीरे सुकून को खत्म कर देता है।
कैसे संभाले खुद को और रिश्ते को
खुद से सवाल करें: क्या आपके साथी के दोबारा आपकी भावनाओं की उपेक्षा की जा रही है या फिर आप खुद से ये मान रही हैं।
खुली और ईमानदार बातचीत: अपने परेशानी, डर, इच्छा और भावना के बारे में खुलकर बात करें। आप रिश्ते में कैसा महसूस करते हैं इसके बारे में अपने साथी को बताएं।
अपने आप को समझे: रिश्ते में आप अपने साथी से क्या चाहती हैं, जो पूरा न होने पर आप दुखी हैं या बेचैन होती हैं। उसे समझ के खुद से सवाल करें। क्या सच में यह बड़ी बात है, जिसे बात करके सुलझाया नहीं जा सकता। खुद से यह सवाल करना आपको एक समझ प्रदान करेगा।
साथी के साथ क्वालिटी टाइम: दिन में 15 से 20 मिनट अपने साथी के साथ समय बिताएं। इस दौरान आपकी बात आपके रिश्ते और एक दूसरे के बारे में हो।
संभालने की कोशिश काम ना करें तो: अगर आप अपने रिश्ते में सुकून ढूंढने की सारी कोशिश कर चुके हैं या फिर भी आप रिश्ते में खालीपन महसूस कर रही हैं या आपको लगता है कि आपके प्रयास का साथी पर कोई असर नहीं हो रहा तो इस समय आपको प्रोफेशनल की मदद की जरूरत है।
