गांधी (1982)
महात्मा गांधी पर बनी ये फिल्म बॉलीवुड में तो नहीं बनी, लेकिन गांधी जी पर बनी अब तक की सभी फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। रिचर्ड एटनबरो निर्देशित इस फिल्म में बेन किंग्सले ने गांधी जी की भूमिका निभाई है। इस फिल्म को आस्कर आवॉर्ड भी मिला था। इस फिल्म में गांधी जी के विभिन्न संघर्षों को पर्दे पर दिखाया गया था।

सरदार (1993)
केतन मेहता द्वारा निर्देशित ये फिल्म बनाई तो गई थी लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के चरित्र और देशप्रेम को लोगों तक पहुंचाने के लिए, लेकिन इस फिल्म में भी गांधी जी का किरदार प्रमुख किरदारों में से एक था। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे सरदार बल्लभाई पटेल पहले गांधी जी के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ख्यालों को सुनकर मजाक उड़ाते थे और बाद में गांधी जी के एक भाषण को सुनकर वो उनके प्रसंशक बन गए। फिल्म में अन्नु कपूर ने गांधी जी की भूमिका निभाई थी, जबकि परेश रावल ने सरदार की भूमिका में जान डाल दी थी।

द मेकिंग ऑफ द महात्मा (1996)
श्याम बेनेगल निर्देशित इस फिल्म में महात्मा गांधी के जीवन के उन वर्षों को दिखाया गया है जब वो दक्षिण अफ्रिका गए थे और वहां उन्होंने रंगभेद खत्म करने के दिशा में अपने सिद्धांतों से बिना समझौता किए ठोस कदम उठाए थे। फिल्म में रजित कपूर ने गांधी जी की भूमिका निभाई नहीं थी। इस फिल्म के लिए रजित को कई पुरस्सकारों से सम्मानित भी किया गया था।

हे राम! (2000)
कमल हासन द्वारा लिखी व निर्देशित इस फील्म की कहानी देश के विभाजन और महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ी है। फिल्म में गांधी का किरदार मंझे हुए कलाकार नसीरुद्दीन शाह ने निभाया था और ये कहना गलत नहीं होगा कि अब तक पर्दे पर गांधी जी के गुजराती एक्सेन्ट और बॉडी लैंग्वेज को इतना सटीक पर्दे पर किसी भी कलाकार ने नहीं उतारा है। फिल्म में कमल हासन एक ऐसे हिन्दु बने हैं जो गांधी जी को मारने की तैयारी करता है और बाद में उनके प्रति उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है। लेकिन उसके प्रायश्चित करने के पहले ही नाथुराम गोडसे उनकी हत्या कर देते हैं। हालांकि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई थी, लेकिन इसे क्रिटिक्स ने बहुत सराहा था और ये उस साल ऑस्कर्स में बेस्ट फॉरेन फिल्म की एंट्री के लिए भेजी गई थी।

लगे रहो मुन्ना भाई (2006)
साल 2003 में आई फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस की सफलता के बाद राजकुमार हिरानी और विधु विनोद चोपड़ा की हिट जोड़ी ने इस फिल्म को बतौर सीक्वेल रिलीज़ किया। फिल्म में दिखाया जाता है कि कैसे एक अंडरवर्ल्ड डॉन को बार-बार गांधी जी की आत्मा दिखती है और वो उन्हीं के सिद्धांतों से लोगों की मदद करना शुरू करता है। फिल्म में गांधी का किरदार दिलिप प्रभावलकर ने निभाया था। इस फिल्म से गांधीगिरी शब्द लोगों की ज़बान पर चढ़ गया था।

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