Facial रिजुवेनेशन ट्रीटमेंट यानी चेहरे का कायाकल्प युवा दिखने और त्वचा पर बढ़ती उम्र के संकेतों को टालने के लिए किया जाता है। चेहरे के रिजुवेनेशन ट्रीटमेंट में प्रमुख रूप से कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट, टॉपिकल ट्रीटमेंट, सिस्टमेटिक एंड प्रॉसीजरल ट्रीटमेंट शामिल हैं।
कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट
कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट चेहरे के फेशियल रिजुवेनेशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन इसके साथ ही इसमें साधारण सनस्क्रीन लगाना भी बहुत मदद करता है। चेहरे को उम्रदराजी से बचाने के लिए उचित यूवीए और यूवीबी सनस्क्रीन का उपयोग करने की सलाह भी दी जाती है क्योंकि इसका रेडिएशन टाइप 1 प्रोकोलेजन को कम कर देता है। इसके अलावा चेहरे पर हार्श डिटर्जेंट और साबुन और ज्यादा गर्म पानी के उपयोग से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा ड्राई हो सकती है। कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के बाद रोजमर्रा में मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल त्वचा को युवा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
टॉपिकल ट्रीटमेंट

फेशियल रिजुवेनेशन के लिए टॉपिकल एजेंट्स की पूरी सिरीज़ उपलब्ध है लेकिन इसका असर त्वचा पर दिखे, इससे पहले आपको काफी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इनमें विटामिन सी, ट्रेटीनोइंस, अल्फा हाइड्रॉक्सिल एसिड और विभिन्न एंटीजिंग रसायनों जैसे एजेंट होते हैं।
सिस्टमेटिक एंड प्रॉसीजरल ट्रीटमेंट
सिस्टमिक एजेंट मूल रूप से वे होते हैं जो एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हैं और त्वचा को सूर्य से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। इनमें विटामिन सी, विटामिन ई, कोनेजाइम क्यू, ग्रीन टीए मेलाटोनिन और सेलेनियम जैसे विभिन्न एजेंट शामिल हैं। टेस्टोस्टेरॉन और एस्ट्रोजेन जैसे हॉर्मोन भी त्वचा को जवां रखने वाले तत्व कोलेजन को बरकरार रखने में मदद करते हैं।
4. थेरेप्यूटिक प्रॉसीजरल ट्रीटमेंट

थेरेप्यूटिक प्रॉसीजरल ट्रीटमेंट की पूरी सिरीज़ है जिसमें आपकी स्किन को देखकर तय किया जाता है, कि कौन सा उपचार आपके लिए सही रहेगा। इसमें केमिकल पील्स, माइक्रोडर्माब्रेज़न, अंडर्मोलोजी, बोट्यूलिनम टॉक्सिन, ह्यूलूरोनिक एसिड फिलर्स, सॉफ्ट टिश्यू ऑग्मेंटेशन, लेजर, इंटेंस पल्स लाइटए नॉन एब्लेटिव आरएफए फ्रेक्शनल फोटोथर्मोलिसिस, एलईडी फोटोमोड्यूलेशन शामिल हैं।
केमीकल्स पील्स
पील त्वचा की बनावट को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक तकनीक है, जिसके जरिए धब्बेदार और सूरज से क्षतिग्रस्त त्वचा को सुधारा जाता है। इसमें बिना सर्जरी और दर्द के त्वचा की बाहरी परत से डेड स्किन को हटाया जाता है। यह प्रक्रिया त्वचा को एक समान रंगत देती है तथा दाग-धब्बों को कम करती है। त्वचा के विश्लेषण के आधार पर सही पील का चयन किया जाता है। आजकल ज्यादातर पील जेल के रूप में उपलब्ध हैं, इसलिए इनके दुष्प्रभाव की आशंका कम होती है।
इंस्टा स्कल्प्ट की कॉस्मेटिक फिजीशियन डॉ. मंजरी पुराणिक का कहना है कि डर्मा पील के जरिए त्वचा की सामान्य समस्याओं का समाधान किया जा सकता है, जैसे कि- मुहांसे, पिगमेंटेशन, काले घेरे, झुर्रियां, टैनिंग, त्वचा की असमान रंगत और बनावट, इत्यादि। इस प्रक्रिया में लगभग 20 से 30 मिनट का समय लगता है जो त्वचा की संवेदनशीलता पर निर्भर है और इस प्रक्रिया को पूरा होने में 8 से 12 दिनों का समय लगता है। त्वचा और जरूरत के आधार पर पील्स मूल रूप से तीन तरह की होती हैं-

मध्यम गहराई के पील्स
चूंकि इस प्रकार के पील ट्रिक्लोरोएसिटिक एसिड (टीसीए से तैयार किए जाते हैं, इसलिए यह त्वचा की ऊपरी परत से त्वचा की गहराई में प्रवेश करता है। परत को गहराई से हटाने के लिएए गहरी लाइनों और झुर्रियों तथा जिद्दी पिगमेंटेशन के लिए सबसे मजबूत रासायनिक पील का उपयोग किया जाता है। त्वचा की परतों में गहराई से प्रवेश करने के लिए इसमें बेहद प्रभावशाली टीसीए मौजूद होते हैं।
डीप पील्स
इसका प्रभाव त्वचा की हर परत पर पड़ता है। जो लोग अपनी त्वचा में कसावट लाने या झुर्रियों को ठीक करने के साथ अन्य समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं, उन्हें मीडियम या डीप पील कराने की सलाह दी जाती है। मीडियम या डीप पील को त्वचा पर लगाने और हटाने की अवधि कम होती है। इसे ज्यादा समय त्वचा पर लगा रहने दिया जाए तो धब्बे हो सकते हैं। इसलिए इसे चिकित्सक की निगरानी में किया जाता है।
सावधानियां
डर्मा पील के कुछ साइड इफेक्ट होते भी हैं, और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को खास तौर पर इसका ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद कुछ दिनों तक त्वचा में रूखेपन या लाल दाने का अनुभव हो सकता है, और कभी-कभी त्वचा की परत भी निकलने लगती है। कुछ लोगों को जलन या खुजलाहट हो सकता है। त्वचा परतदार दिख सकती है, जो धीरे-धीरे हटती चली जाती है। बेहद रूखी त्वचा वाले लोगों को मीडियम या डीप पील के बाद घर से बाहर निकलने में असुविधा महसूस हो सकती है।
बोटॉक्स और डर्मल फिलर्स
विभिन्न अन्य प्रक्रियाएं जैसे बोटोक्स और फिलर, संरचनात्मक सुधार के रूपों में मेजर फेशियल रीमॉडेलिंग और विभिन्न संरचनाओं को फिर से सही आकार देने के लिए करते हैं। इन दिनो चीक ऑग्मेंटेशन और लिप ऑग्मेंटेशन बहुत सामान्य प्रक्रिया हैं। अन्य उपचार जैसे फेशियल लिफ्टिंग भी कम से कम आक्रामक तकनीक से किए जाते हैं।
बोटुलिनम टॉक्सिन
प्रमुख एंटीएजिंग ट्रीटमेंट्स में बोटुलिनम टॉक्सिन नई और महत्वपूर्ण खोज है। यह एक्सप्रेशन की विभिन्न लाइनों, जैसे माथे की लकीरें, ग्लैबेलर लाइन, क्रोफीट और मेसोबोटॉक्स को ठीक करता है। खास बात यह है कि यह अभिव्यक्ति से संबंधित मांसपेशियों के आंशिक पैरालिसिस यानी पक्षाघात को भी ठीक कर सकता है।
हाइलूरोनिक एसिड फिलर्स
हाइलूरोनिक एसिड फिलर्स फेशियल एस्थेटिक्स की दुनिया में एक और नई खोज है जो चेहरे की संरचना को ही बदल सकते हैं। इससे चेहरे की लकीरें ठीक की जा सकती हैं जो उम्र बढऩे पर नैजोलैबियल फोल्ड्स यानी मुस्कुराने से बनने वाली लकीरों के कारण दिखाई देती हैं। इसके अलावा होंठों के आसपास की लकीरें, प्री-जॉल, होंठों का पतला, सिकुड़ा व खाली लगना भी इससे सही किया जा सकता है। होंठ और गालों में वॉल्यूम बढ़ाने के लिए भी फिलर्स का उपयोग किया जाता है। आइडियल फिलर वह होते हैं जो नॉन एलर्जोजनिक हों और लम्बे समय यानी एक से दो वर्ष तक काम करें।
उपचार की यह सभी तकनीक चेहरे के कायाकल्प के लिए बेहद प्रभावी हैं और इस संबंध में आगे के शोध भी चल रहे हैं।
(डॉ. रश्मि शर्मा, कन्सल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, फोर्टिस हॉस्पिटल, वसंत विहार और इंस्टा स्कल्प्ट की कॉस्मेटिक फिजीशियन डॉ. मंजरी पुराणिक से बातचीत के आधार पर)
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