अविनाश को ऑफिस से छुट्टी नहीं मिली थी। इसलिए हम शादी में सिर्फ दो दिन पहले ही पहुंचे। ऑटो से उतरते ही कई जोड़ी आंखें हमारी ओर उठ गईं । उन आंखों ने हमें, खासकर मुझे देखकर आपस में खुसर-फुसर शुरु कर दी।
Author Archives: Sheetal Gaur
गृहलक्ष्मी की कहानियां : मेरी भी शादी करा दो
गृहलक्ष्मी की कहानियां : उसकी तैयारी देख बड़ी भाभी अक्सर चुटकी लेती। ‘‘ऐसा न हो कुमुद की इसी मंडप में कोई तुम्हें भी ब्याह कर ले जाए।” शादी के दिन तो दुल्हन से ज्यादा कुमुद ही मंच से लेकर मंडप तक छायी हुई थी। रंग-रूप ही नहीं अपने आकर्षक व्यक्तित्व और आधुनिक ढंग के मैचिंग […]
प्रेम-प्याला- गृहलक्ष्मी की कहानियां
भले ही राज बाबू की शादी को कई साल बीत गए थे लेकिन जिस प्यार की भावना का अहसास उन्हें आजकल हो रहा था वैसा तो कभी हुआ ही नहीं। अब जाकर वो समझे हैं कि सच्चा प्यार क्या होता है।
जीत – गृहलक्ष्मी कहानियां
‘‘मुझे शादी नहीं करनी मम्मी! बस कह दिया ना, मैं बालिग हूं, अपने बारे में फैसला कर सकती हूं। देट इज फाइनल।” कमरे से बाहर जाते हुए श्रेया ने तो जैसे अपना अंतिम निर्णय ही सुना दिया था। मम्मी-पापा को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये शब्द उनकी इकलौती बेटी के हैं, जिस पर उनकी सारी खुशियां टिकी थी।
Male Problems- पुरूषों की सेक्स की समस्याएं
सेक्स से जुड़े सवाल-जबाब पुरूषों की सेक्स की समस्याएं Male Problems -यह सच है कि सेक्स एक शारीरिक जरूरत हैए पर हकीकत यह है कि यह मन से जुड़ा मामला हैए क्योंकि सेक्स मन से संचालित होता है और शरीर के जरिये व्यक्त होता है। पर देखने में आ रहा है। कि आजकल के माहौल […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां : चक्रव्यूह में फंसी औरत
गृहलक्ष्मी की कहानियां : घर के छोटे से बगीचे में हरे भरे सुंदर फूलों के पौधे करीने से गमलों में लगे थे। मेन दरवाजे से अन्दर घुसते ही भगवान जी की एक सुंदर बड़ी सी मूर्ति स्थापित थी और मोगरा अगरबत्ती की खुशबू का झोंका यकायक सांसों को महकाने लगता। एक कोने की तिकोनी मेज […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां -दुखी होने का अधिकार
विनि की दोनों सहेलियां बिखर गई थीं। पारुल टूटे कांच की तरह और दूसरी सुकन्या, उसे तो बिखरने का अधिकार तक न था।
विडंबना – गृहलक्ष्मी कहानियां
ये एक स्त्री के लिए विडंबना ही तो है कि घर-बाहर हर जगह उसका अपना ही वजूद सुरक्षित नहीं। नरपिशाचों से खुद को बचाते हुए लक्ष्मी का भाग्य भी ऐसी ही परिस्थितियों से गुज़र रहा था।
भाग्य या दुर्भाग्य – गृहलक्ष्मी कहानियां
राजा की आंखों के आगे अंधेरा छा गया वह वहीं एक कुर्सी पर सिर पकड़कर बैठ गया और सोचने लगा कि यह सब क्या हो गया? अब वह रानी को क्या जवाब देगा और मां से क्या कहेगा? अब उसकी जेबों में उसका भाग्य था और घर में बिखरा हुआ दुर्भाग्य था।
लाइव गिफ्ट- गृहलक्ष्मी की कहानियां
कमरे की नीली रोशनी में उसका गोरा चेहरा, बिखरे बाल और तराशे हुए बदन को देखकर मैं पागल सा हो गया। अपने को रोक पाना मुश्किल सा लगने लगा, मेरा दिमाग शून्य होता जा रहा था…
