गृहलक्ष्मी की कहानियां : एक बार सर्दियों की छुट्टियों मनाने मैं अपनी दीदी के घर गई हुई थी। चूंकि टीवी बेडरुम में रखी हुई थी। अत: मेरा ज्यादातर समय दीदी के कमरे में ही बीतता था। एक दिन जीजाजी ऑफिस से आए तो मैं आराम से उनके बेड पर लेटी हुई टी. वी देख […]
Author Archives: Sheetal Gaur
गृहलक्ष्मी की कहानियां – लघु कथा: ‘बदला’
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आवरण – गृहलक्ष्मी की कहानियां
गृहलक्ष्मी की कहानियां – हफ्ते भर की मेहनत के बाद पूरा घर सेट हुआ था, बिजेन्द्र के आॅफिस जाते ही मैंने सोचा आज अदरक वाली गरमागरम चाय पीते हुए अपनी मनपसंद पत्रिकाएं पढूंगी, जो पिछले कई दिनों से नहीं पढ़ पा रही थी। तभी डोरबेल की आवाज सुनकर दरवाजा खोला तो सामने 4-5 महिलाएं खड़ी […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां : सिमटते दायरे
क्या सोच रखा है मैंने गुड़िया के बारे में कि उसे उन्मुकतता से जीना सिखाऊंगी, उसे बांधूगी नहीं, कभी। लड़कों की तरह तो नहीं पर लड़कों से अलग ही बनाऊंगी, क्योंकि मैंने इस समाज को देखा था, सोचा था और समझा भी था, जहां पर कभी लड़के-लडकियां समान नहीं हो सकते थे…
प्रिया का आत्मसम्मान – गृहलक्ष्मी कहानियां
प्रिया अपने पिता की बहुत लाडली बेटी थी। इस वर्ष 71 प्रतिशत प्राप्त करके अपने विद्यालय में वह पूरी क्लास में अब्बल आई थी। बचपन से ही वह पढाई में बहुत होशियार थी। शहर के सबसे अच्छे कालेज में उसको मनचाहे कोर्स -बी.ए. इंग्लिश- में एडमिशन भी मिल गया था। अपनी प्रतिभा से वह जल्दी […]
Bone Cancer : मेरी बेटी के घुटने में दर्द और सूजन है, क्या यह बोन कैंसर हो सकता है?
डॉ. रजत गुप्ता, कंसल्टेंट ऑर्थोपीडिक ऑन्कोलॉजिस्ट- फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली
गृहलक्ष्मी की कहानियां – समाधान
समाधान गृहलक्ष्मी की कहानियां – सवाल यह है कि इन किशारों से कैसे पेश आएं? मान कि हर ताले की चाबी अलग होती है और सबकी परिवारिक पृष्ठभूमि, जीवनशैली व अंतः परस्पर संबंध भी अलग-अलग होते हैं लेकिन कुछ बातें तो सब पर लागू हो सकती हैं। सबसे पहले बच्चे के साथ खुलकर बात करते […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां – चलिए न कमरे में
गृहलक्ष्मी की कहानियां – बात मेरी दीदी की शादी की है। विवाह की रस्में पूरी होते-होते सुबह हो गई। दीदी का चेहरा तो घूंघट में था लेकिन जीजाजी के चेहरे पर थकावट साफ झलक रही थी। मां ने मुझ से कहा, ‘दामादजी को मंडप से बुला कर कमरे में ले जाओ। थोड़ा आराम कर लेंगे। बाकी रस्में […]
दुल्हन की पहली रसोई को आसान बनाए यह किचन एप्लाइनसेज
शादी के बाद दुल्हन की पहली रस्म रसोई की होती है, जिसमें उन्से कुछ मीठा या कोई व्यंजन बनाना होता है। आजकल बाजार में कई ऐसे किचन एप्लाइंसेज उपलब्ध हैं जोकि टेस्टी फूड के साथ आपके काम को भी आसान बनाते हैं। कप केक मेकर जैसा कि शादी के बाद दुल्हन की पहली […]
आकर्षण का मूलमंत्र – गृहलक्ष्मी कहानियां
कई दिनों से देख रही थी कि सामने वाले मकान में सफाई हो रही थी। मेरी बालकोनी से सामने वाले फ्लैट के अन्दर तक दिखाई देता है अगर पर्दा ठीक से न लगा हो। फिर हफ्ते भर दीवाली की साजो सफाई में इतनी व्यस्त रही कि सामने वाले फ्लैट में कोई आ भी गया यह तब पता चला जब एक दिन सवेरे कुकर की सीटी सुनाई दी।
