एक नया फिटनेस ट्रेंड इन दिनों देखने को मिल रहा है और वह है एंटी-ग्रेविटी योगा जिसे एरियल योगा भी कहते हैं। यूं तो यह ट्रेंड सेलिब्रिटीज़ के बीच तेजी से प्रचलन में है लेकिन अब आम लोग भी इसके बारे में जागरूक हो रहे हैं। एंटी-ग्रेविटी योग के जितने भी आसन होते हैं, उसे […]
Author Archives: Grehlakshmi
विश्व के सात महान आश्चर्य
विश्व के सात अद्भुत आश्चर्य, जिनमें कुछ प्राकृतिक और कुछ इंसानों द्वारा बनाई गई संरचनाओं का संकलन है। हैरान कर देने वाली और मन में जिज्ञासा उत्पन्न करती इन धरोहरों को संजोया जाता रहा है। वर्ष 2000 में स्विस फाउंडेशन ने विश्व के सात अजूबों के चुनाव के लिए ‘न्यू सेवन वंडर्स’ के नाम से एक कैम्पेन शुरू किया, जिसमें पूरे विश्व भर से सात अजूबों को विजेता चुना गया।
गृहलक्ष्मी की कहानियां – कान्हा
मोबाइल की रिंग सुन सुचारिता अपने दुपट्टे से हाथ पोंछती हुई डायनिंग टेबल पर रखे फोन की ओर बुदबुदाती हुई बढ़ी-
गृहलक्ष्मी की कहानियां : टू एग्जाम पेपर
बात उन दिनों की है जब मैं 4 क्लास में थी और हमारी परीक्षा का सैकेंड टेस्ट हो रहे थे। क्लास टीचर हम स्टूडेंट को एग्जाम पेपर उनकी सिटिंग अरेंजमेंट के अनुसार बांट रही थी। परंतु मेरे गलती से टीचर ने एग्जाम पेपर के दो सैट मुझे दे दिए थे। मैंने देखा,
गृहलक्ष्मी की कहानियां – कहूं मुझे टॉयलेट जाना है
मेरी शादी एक संयुक्त परिवार में हुई है, जहां सब मिल-जुलकर रहते हैं। यहां सब शाम के वक्त आंगन में बैठकर हंसी-ठिठोली करते रहते हैं।
यही है मेरी दुल्हनिया-गृहलक्ष्मी की कहानियां
गृहलक्ष्मी की कहानियां –तब मैं छह-सात साल का था। मेरी दादी प्यार से मुझे अपने पास बिठाती, खाना खिलाती। कभी-कभी मुझे कहतीं, ‘देख तेरी दुल्हनिया आएगी तो मैं उसे अपने कड़े दे दूंगी, अपनी सोने की माला दे दूंगी।’ मैं सुनता और खुश होता, फिर पूछता कि वह जो भी मांगेगी आप दे दोगी। दादी […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां – मेरा अंडा गिर गया
बात तब की है जब मेरी नई-नई शादी हुई थी, हमारी जॉइन्ट फैमिली थी। मुझे बच्चों के साथ खेलने का बहुत शौक था, इसलिए मेरी जेठानी के बच्चे जब नया खिलौना लाते थे तो मेरे साथ जरूर खेलते थे।
गृहलक्ष्मी की कहानियां – लहरिया साड़ी
बात कुछ समय पुरानी है। सावन का महीना शुरू ही हुआ था। मेरी सहेलियों ने कहा कि इस बार एक दिन सब सहेलियां लहरिया की साड़ी पहनेंगी और सब लोग मिल-जुल कर कहीं पिकनिक पर चलेंगी।
गृहलक्ष्मी की कहानियां – अभी तो मैं शुरू हुई हूं
शादी के बाद की पहली होली में मैं अपनी मां के घर बनारस गई हुई थी। मेरे पति और देवर भी साथ गए थे। देवर और मेरे बीच काफी मजाक होता है।
गृहलक्ष्मी की कहानियां : मुझे शादी करने दोगी
यह बात जब कि है जब मैं चार साल की थी। मैं बहुत ही बातूनी और शरारती थी। मेरा कभी भी पढ़ने में मन नहीं लगाता था। किसी के कुछ भी कहने पर बहाने बनाने लगती थी।
