मैं कुछ सात-आठ बरस की रही होऊंगी। हमारे जमाने में उस समय पैसों का चलन था, एक, दो, तीन आने तो नहीं,अब इतनी भी बूढ़ी नहीं हूँ …हाँ तो मैं कह रही थी, पाँच, दस, पंद्रह, बीस,पच्चीस, पचास पैसे…आप समझ रहे हैं न? हमें तो भई खर्च ने के लिए यही पैसे मिला करते थे […]
