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प्रेम—गृहलक्ष्मी की कहानियां

प्रेम—वह दफ्तर से सीधी आ गयी थी, इसलिए कुछ थकी-थकी-सी थी और उसकी काली गर्दन पर पसीने से मैल नम हो गयी थी। मेरे पहलू में बैठकर उसने पर्स से रूमाल निकाल और मुंह साफ करने लगी । मुझे यों ही बैठे देखकर उसे शायद हैरानी हुई । बोली, ‘आप मेरे आने पर खुश नहीं […]

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