Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

मूर्ख बंदर का किस्सा -पंचतंत्र की कहानी

एक राजा की एक बंदर से खूब अच्छी दोस्ती थी । राजा उसे इतना प्यार करता था कि उसने उस बंदर को अपना अंगरक्षक बना लिया था । जहाँ कहीं राजा जाता, उसकी मदद के लिए बंदर भी जरूर साथ जाता था । प्रजा को पहले तो यह देखकर बड़ी हँसी आती थी, पर धीरे-धीरे […]

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

आखिर चोर ने किया उपकार -पंचतंत्र की कहानी

किसी नगर में एक विद्वान ब्राह्मण रहता था । उसमें बहुत से गुण थे, पर किसी कारण उसमें चोरी करने की बुरी आदत पैदा हो गई । यह आदत बढ़ते-बढ़ते इतनी बढ़ी कि उस विद्वान ब्राह्मण के बाकी सारे गुण पीछे छिप गए । अब वह हमेशा इसी जुगाड़ में रहता था कि किसी तरह […]

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

बगले के आंसू -पंचतंत्र की कहानी

किसी वन में बरगद का एक पेड़ था । उस पर बगुलों का एक समूह रहता था । उसी पेड़ की खोखल में एक भयानक सर्प भी रहता था । वह मौका पड़ते ही उन बगुलों के अंडे खा जाता था । इससे बगुले बहुत दुखी थे । उन्हें समझ में नहीं आ रहा था […]

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

किस्सा धर्मबुद्धि और पापबुद्धि का-पंचतंत्र की कहानी

किसी नगर में दो मित्र रहते थे । एक का नाम था धर्मबुद्धि और दूसरे का पापबुद्धि । दोनों का स्वभाव और रंग-ढंग अलग-अलग था, फिर भी मित्रता पक्की थी । लिहाजा विदेश में दोनों साथ-साथ रहे और खूब धन कमाकर लौटे । जब वे अपने शहर में प्रवेश करने लगे, तो पापबुद्धि ने कहा, […]

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

मूर्खों को दी सीख चिड़िया ने -पंचतंत्र की कहानी

एक बार की बात, एक पहाड़ पर बंदरों की टोली रहती थी । सर्दी का मौसम था । अचानक बारिश होने लगी । इससे सर्दी और अधिक बढ़ गई । बंदर सर्दी से बुरी तरह अकुला रहे थे । एक पेड़ के नीचे उन्हें गुंजाफल दिखाई दिए । उन्हें उन बंदरों ने अंगारे समझ लिया […]

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

शंकुकर्ण की कहानी -पंचतंत्र की कहानी

किसी जंगल में एक शेर रहता था । उसका नाम था वज्रदंष्ट्र । वजदंष्ट्र बड़ा शक्तिशाली था । पूरे जंगल में उसका आतंक था और पशु-पक्षी उसका नाम सुनकर ही डर जाते थे । वज्रदंष्ट्र के दो सलाहकार थे, चतुरक सियार और क्रव्यमुख भेड़िया । ये दोनों वज्रदंष्ट्र के पास ही रहते थे और अपनी […]

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

घूम रहा है लोभ का विचित्र चक्र -पंचतंत्र की कहानी

किसी नगर में चार ब्राह्मण युवक रहते थे । वे ज्ञानी और योग्य थे । उन्होंने शास्त्रों का भी विधिवत अध्ययन किया था । पर गरीबी के कारण उन्हें बड़ा कष्ट झेलना पड़ रहा था । आसपास कहीं उनकी पूछ नहीं थी । हर जगह उन्हें दुत्कारा जाता । आखिर उन चारों मित्रों में से […]

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

टिटिहरी के आगे हारा समंदर -पंचतंत्र की कहानी

समुद्र के किनारे टिटिहरी का जोड़ा रहता था । वे दोनों हँसी-खुशी अपना समय गुजारते थे । एक बार की बात, टिटिहरी को अंडे देने थे । उसने टिटिहरे से पूछा, “मैं अंडे कहाँ दूँ?” टिटिहरे ने कहा, “देखो, समुद्र का किनारा कितना सुंदर और स्वच्छ है । यह कितनी दूर-दूर तक फैला है । […]

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

वह तो बेचारा ऊँट है! -पंचतंत्र की कहानी

किसी वन में एक शेर रहता था । उसका नाम था मदोत्कट । वह बड़ा शक्तिशाली था । बाघ, सियार, कौआ, भेड़िया उसके सेवक थे । सभी उसका आदर करते थे और मदोत्कट शेर भी अपने सेवकों का खासा खयाल रखता था । एक दिन की बात मदोत्कट शेर ने एक ऊँट को आते हुए […]

Posted inपंचतंत्र की कहानियां, हिंदी कहानियाँ

कहानी नीलदेव की -पंचतंत्र की कहानी

किसी वन में एक सियार रहता था, जिसका नाम था चंडरव । एक दिन की बात, चंडरव सियार भटकते हुए एक गाँव में चला गया । गाँव के कुत्तों ने उसे देखा, तो उसके पीछे पड़कर बुरी तरह भौंकने लगे । चंडरव सियार कुत्तों से बचने के लिए तेजी से भागा । भागते-भागते वह एक […]

Gift this article