एक था जुलाहा । उसका नाम था मंथरक । वह कपड़े बुनकर गुजारा करता था । एक बार उसके लकड़ी के औजारों में से एक औजार टूट गया । तब लकड़ी लेने के लिए वह जंगल में गया । वहाँ एक बड़ा विशाल वृक्ष था । मंथरक को लगा, ‘औजार बनाने के लिए इस पेड़ […]
Author Archives: प्रकाश मनु
बड़े गवैया गर्दभलाल! -पंचतंत्र की कहानी
एक था गधा । दिन भर धोबी उससे खूब मेहनत का काम लेता और रात को चरने के लिए खुला छोड़ देता था । लिहाजा रात को वह निरुद्देश्य इधर से उधर घूमता रहता था । अचानक एक दिन इसी तरह घूमते-घूमते उसे एक सियार मिला और दोनों में खूब अच्छी दोस्ती हो गई । […]
और जब शेर हुआ जिंदा! -पंचतंत्र की कहानी
किसी स्थान पर चार ब्राह्मण युवक रहते थे । वे आपस में मित्र थे और एक-दूसरे से बहुत स्नेह करते थे । उन चार मित्रों में से तीन ने तो गुरुओं के आश्रम में जाकर विद्या ग्रहण की थी और शास्त्रों का अध्ययन किया था, जबकि चौथा अनपढ़ था । उसने कभी किसी विद्यालय का […]
एक नेवले की करुण कहानी -पंचतंत्र की कहानी
किसी नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी । उसका पति था देवशर्मा । वह भीख माँगकर गुजारा करता था । कुछ समय ब्राह्मणी ने एक शिशु को जन्म दिया । संयोग से उसी समय उस घर में एक नेवली ने भी संतान को जन्म दिया । नेवले को जन्म देकर वह नेवली गुजर गई । […]
नकलची ने किया जो गड़बड़झाला -पंचतंत्र की कहानी
किसी नगर में एक बड़ा ही धनवान सेठ रहता था, मणिभद्र । नगर में उसकी बड़ी इज्जत थी । सेठ बड़ा धार्मिक स्वभाव का और दयालु था । वह खूब दान-पुण्य और परोपकार भी करता था । इसलिए सभी उसकी इज्जत करते थे । पर फिर किसी कारण उस सेठ का सारा धन नष्ट हो […]
घोड़े की तरह हिनहिनाओ -पंचतंत्र की कहानी
किसी राज्य में नंद नाम का एक राजा था । वह बड़ा वीर और पराक्रमी था । दूर-दूर तक उसका नाम और प्रसिद्धि थी । उसकी वीरता के कारण शत्रु बेहद आतंकित रहते थे । अपने इन्हीं गुणों के कारण उसने दूर-दूर तक अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया था । नंद का मंत्री था […]
तुझमें तो सियार के ही गुण हैं! -पंचतंत्र की कहानी
किसी वन में एक शेर अपनी शेरनी के साथ रहता था । एक दिन शेर शिकार के लिए गया । दिन भर भोजन की तलाश में भटकता रहा । पर उस दिन कोई शिकार उसे नहीं मिल पाया । लौटते समय एक नन्हा सा सियार दिखाई दिया । शेर को लगा इस नन्हे सियार को […]
युधिष्ठिर कुम्हार ने सच कहा, लेकिन.. -पंचतंत्र की कहानी
किसी नगर में एक कुम्हार रहता था । उसका नाम था युधिष्ठिर । एक बार की बात, वह कहीं जा रहा था । अचानक उसका पैर फिसला और वह गिर गया । नीचे एक सख्त और धारदार घड़े का टुकड़ा पड़ा था । वह उसके माथे पर जा लगा । बहुत सा खून बह आया […]
और कुएँ से निकल आया गंगदत्त -पंचतंत्र की कहानी
एक मेढक था गंगदत्त । वह बड़ा ज्ञानी और सीधा-सादा था । हमेशा अच्छी और समझदारी की बात करता था । उसे झूठ और लाग-लपेट कतई पसंद नहीं था । इधर की बात उधर करना और ज्यादा छल-कपट भी उसे नहीं आता था । इसलिए मेढकों के दल में वह अलग-थलग पड़ गया था । […]
पहले मैं, पहले मैं! -पंचतंत्र की कहानी
एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण रहता था । उसका नाम था द्रोण । वह भिक्षा माँगकर गुजारा करता था । इसलिए जीवन में कभी कोई सुख उसे नहीं मिला । उसका शरीर भी बहुत कमजोर और दुबला-पतला था । द्रोण के पास संपत्ति के नाम पर कुछ विशेष नहीं था । बस, दो स्वस्थ […]
