बहुत समय पहले की बात है। अब्दुल्ला नाम का एक गरीब आदमी था। उसकी पत्नी सुलताना उसे हमेशा कोसती रहती थी। उनका घर सुलतान के महल के खंडहर की टूटी दीवार से लगा हुआ था।
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एक बार और – गृहलक्ष्मी कहानियां
सारा सामान बस पर लद चुका है। बस छूटने में पाँच मिनट बाकी है। ड्राइवर अपनी सीट पर आकर बैठ गया है। सामान को ठीक से जमाकर कुली नीचे उतर आया है और खड़ा-खड़ा बीड़ी फेंक रहा है। अधिकतर यात्री बस में बैठ चुके हैं, पर कुछ लोग अभी बाहर खड़े विदाई की रस्म अदा कर रहे हैं। अड्डे पर फैली इस हल्की -सी चहल-पहल से अनछुई-सी बिन्नी चुप-चुप कुंज के पास खड़ी है। मन में कहीं गहरा सन्नाटा खिंच आया है। इस समय कोई भी बात उसके मन में नहीं आ रही है, सिवाय इस बोध के कि समय बहुत लंबा ही नहीं, बोझिल भी होता जा रहा है। लग रहा है जैसे पाँच मिनट समाप्त होने की प्रतीक्षा में वह कब से यहाँ खड़ी है। कुंज के साथ रहने पर भी समय यों भारी लगे, यह एक नयी अनुभूति है, जिसे महसूस करते हुए भी स्वीकार करने में मन टीस रहा है।
असामयिक मृत्यु – – गृहलक्ष्मी कहानियां
सब-कुछ जहाँ का तहाँ थम गया।
गति महेश बाबू के हृदय की बंद हुई थी, पर चाल जैसे सारे घर की ठप्प हो गई। अधूरा बना हुआ मकान और अधकचरी उम्र के तीन बच्चे।
खोटे सिक्के – गृहलक्ष्मी कहानियां
‘जी, इन्हें कहाँ रक्खूँ?’
एक सहमी-सी आवाज़ पर सब घूम पड़े। देखा, एक छोटा लड़का थैली हाथ में लिए भयभीत-सा खड़ा है।
सुलतान और अंधा भिखारी – अलिफ़ लैला की कहानियाँ
एक समय की बात है, बगदाद पर एक बुद्धिमान सुलतान का शासन था। उसका नाम हारून-अल-रशीद था। वह बहुत दयालु था। वह बगदाद की सड़कों पर वेष बदलकर घूमता। इस तरह उसे अपनी प्रजा के दुख-दर्द का पता चल जाता। एक दिन उसने एक अंधा भिखारी देखा। वह राहगीरों के आगे गिड़गिड़ा रहा था।
हस्तरेखा और आपकी समृद्धि
मानव स्वभाव से ही जिज्ञासु रहा है। इसी जिज्ञासु प्रवृत्ति के कारण वह सदैव अपना भविष्य जानने के लिए इच्छुक रहता है। इसी जिज्ञासा को शान्त करने के लिए मानव ने अनेकों ऐसी प्रणालियां विकसित की जिनके द्वारा वह अपने भविष्य का अनुमान लगा सके और उनमें से एक प्रणाली है हस्तरेखा ज्ञान।
पर्यायवरण पर महान हस्तियों के विचार
अल्बर्ट आइंस्टाईन (महान वैज्ञानिक)– पर्यावरण सब कुछ है जो मैं नहीं हूं। जॉन मुइर (लेखक, पर्यायवरणविद्)– इन पेड़ों के लिए भगवान ध्यान देता है, इन्हें सूखे, बीमारी, हिम्स्खलन और एक हजार तूफानों और बाढ़ से बचाता है। लेकिन वो इन्हें बेवकूफों से नहीं बचा सकता। अच्छे जल और हवा में एक प्रवाह लें; और प्रकृति के […]
प्यारी बेटी के प्यारे पापा
जब भी बच्चों के देख-रेख की बात आती है तो हम मां को ही आगे कर देते हैं जबकि आज पिता भी घर संभालने से लेकर बच्चों को पालने का काम बखूबी कर रहे हैं।
बूढ़ा गिद्ध – हितोपदेश की रोचक कहानियां
गंगा नदी के किनारे एक बहुत बड़ा पेड़ था। इस पेड़ पर बहुत से पक्षी रहा करते थे। एक दिन एक बूढ़ा गिद्ध वहाँ आया और पक्षियों से बोला कि “क्या वह इस वृक्ष के खोल में रह सकता है।” सभी पक्षियों ने बूढ़े गिद्ध की आयु को देखते हुए, उसे वहाँ रहने की इजाजत दे दी। वे अपने हिस्से के भोजन में से भी कुछ भोजन उसे खाने को दे देते।
साधु की पुत्री – हितोपदेश की प्रेरक कहानियां
गंगा नदी के किनारे एक साधु रहते थे। वे न केवल विद्वान थे बल्कि उनके पास जादुई शक्तियाँ भी थीं।
